सुल्तानपुर : हवालात में दलित युवक की मौत, किशोरी के साथ तीन दिन पूर्व घर से फरार हुआ था
एक किशोरी के साथ घर से फरार होने के मामले में गिरफ्तारअनुसूचित जाति के एक युवक की सुल्तानपुर में कुड़वार थाने लॉकअप में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
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सुल्तानपुर में कुड़वार थाने लॉकअप में में बृहस्पतिवार की दोपहर अनुसूचित जाति के एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। युवक पर तीन दिन पूर्व एक किशोरी के साथ घर से फरार होने का आरोप था। पुलिस ने आरोपी की मां और उसकी पत्नी को हिरासत में लेकर दबाव बनाया तो वह किशोरी के साथ बुधवार की दोपहर थाने पहुंच गया। पुलिस बिना लिखा-पढ़ी किए ही किशोरी को उसके घर वालों को सौंपने पर आमादा थी, जबकि युवक को जेल भेजना चाहती थी। बृहस्पतिवार की दोपहर संदिग्ध परिस्थितियों में लॉकअप के अंदर ही आरोपी की मौत हो गई। मौत की सूचना के बाद एसपी ने घटना स्थल का निरीक्षण किया। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर एसओ कुड़वार, एसआई और मुख्य आरक्षी को निलंबित कर दिया है। लॉकअप पर ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए एसपी ने पत्र लिखा है।
क्षेत्र के जगदीशपुर गांव का राजेश कोरी (25) एक किशोरी के साथ 31 मई को घर से फरार हो गया था। किशोरी की मां ने राजेश के खिलाफ 31 मई की रात में ही थाने में बेटी को बहलाकर भगा ले जाने की तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने केस नहीं दर्ज किया। एक जून को कुड़वार थाने की पुलिस ने राजेश की मां आशा और उसकी पत्नी ज्योति को हिरासत में लेकर थाने पहुंच गई। इसकी जानकारी जब राजेश को हुई तो वह किशोरी को लेकर दो जून की दोपहर खुद ही कुड़वार थाने में पहुंच गया। परिवारीजनों के अनुसार पुलिस ने राजेश को लॉकअप में डाल दिया, जबकि किशोरी को अलग कमरे में रखा था। राजेश के हाजिर होने के बाद पुलिस ने बुधवार को उसकी मां आशा और पत्नी ज्योति को थाने से छोड़ दिया था।
बृहस्पतिवार की सुबह राजेश की पत्नी ज्योति खाना लेकर थाने पहुंची थी। राजेश ने लॉकअप के अंदर ही खाना खाया था। राजेश की पत्नी ज्योति के घर जाने के थोड़ी देर बाद ही लॉकअप के अंदर उसकी तबीयत बिगड़ गई। पुलिस कर्मी आनन-फानन में उसे लेकर सीएचसी ले गए, जहां चिकित्सकों ने राजेश को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस अभिरक्षा में राजेश की मौत की सूचना मिलते ही एसपी डॉ. विपिन कुमार मिश्र, सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी कुड़वार थाने पहुंच गए। एसपी ने घटना के बारे में एसओ अरविंद पांडेय से पूछताछ की। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। भाई की मौत की सूचना के बाद जिला अस्पताल पहुंचे राजेश के भाई संजय ने बताया कि उसे पुलिस ने मौत की सूचना नहीं दी। उसे गांव वालों से जानकारी मिली। संजय के अनुसार उसका भाई खुदकुशी नहीं कर सकता।
प्रथम दृष्टया पुलिस कर्मियों की लापरवाही : एसपी
पुलिस अधीक्षक डॉ. विपिन कुमार मिश्र ने बताया कि राजेश गांव की ही एक नाबालिग को भगा ले गया था। इसी मामले में पुलिस ने बुधवार को नाबालिग को बरामद करते हुए राजेश को पकड़ा था। बृहस्पतिवार को राजेश की संदिग्ध परिस्थतियों में मौत हो गई है। प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने के आरोप में एसओ कुड़वार अरविंद पांडेय, एसआई शस्त्राजीत प्रसाद व मुख्य आरक्षी बृजेश कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया है। पहरे पर तैनात होमगार्ड भोलेंद्र के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिला कमांडेंट होमगार्ड को सूचित किया गया है।
मेरा पति बेगुनाह, लड़की खुद भागकर पहुंची थी
जगदीशपुर गांव निवासी राजेश की पत्नी ज्योति ने बताया कि उसका पति अहमदाबाद में नौकरी करता था। लॉकडाउन में करीब दो माह पहले ही राजेश अपनी पत्नी ज्योति, बेटे समर (7) व नंदिनी (3) को लेकर गांव आया था। सभी बेहद खुश थे। ज्योति ने बताया कि किशोरी राजेश के साथ खुद भागकर गई थी।
पुलिस बना रही थी किशोरी की मां पर दबाव
जगदीशपुर गांव की रहने वाली किशोरी की मां ने बताया कि 31 मई को राजेश उसकी बेटी को घर से भगा ले गया था। रात में वह राजेश के खिलाफ तहरीर लेकर थाने पहुंची तो पुलिस ने मुकदमा नहीं लिखा। पुलिस ने थाने से यह कहते हुए वापस कर दिया कि जाओ तुम्हारी बेटी मिल जाएगी। बुधवार को जब बेटी थाने पहुंची तो पुलिस ने उन्हें बुलाकर कहा कि तुम्हारी बेटी मिल गई है इसे ले जाओ। राजेश को मारपीट कर किसी और मामले में जेल भेज देंगे। बेटी को घर लाने से मां ने इंकार कर दिया।
गले पर था काला निशान: डॉ. नागेंद्र
सीएचसी पर तैनात चिकित्सक डॉ. नागेंद्र ने बताया कि पुलिस राजेश को लेकर चार बजकर आठ मिनट पर पहुंची थी। राजेश कुछ बोल नहीं पा रहा था। उसके गले पर काला निशान जैसा था। दो मिनट बाद ही राजेश को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
बंदियों का सुसाइड प्वॉइंट बना जिला कारागार
अधीक्षक पाए गए थे दोषी
अमेठी के खरगीपुर गांव निवासी रंजीत उपाध्याय के बेटे राम अकबाल (34) को जानलेवा हमला करने के मामले में आठ मई 2018 को जेल भेजा गया था। नौ जून 2018 की रात बंदी राम अकबाल की बैरक में ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। तब जेल प्रशासन की ओर से बताया गया था कि बंदी ने बैरक में गमछे के सहारे खुदकुशी कर ली थी। मामला सुर्खियों में आने के बाद न्यायिक जांच बैठाई गई थी। तत्कालीन अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन चतुर्थ/न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि कुमार दिवाकर को मामले की न्यायिक जांच सौंपी गई थी। उन्होंने मामले की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट में जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया था। न्यायिक जांच में तत्कालीन जेल अधीक्षक को दोषी पाया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बंदी को बिना न्यायालय की इजाजत के तनहाई में रखने पर भी सवाल उठाया था। जेल प्रशासन न्यायिक जांच में बंदी की मौत के लिए दोषी करार दिए जाने के बावजूद कार्रवाई होने के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
नहीं हुई जेल प्रशासन पर कार्रवाई
जयसिंहपुर क्षेत्र के करमदासपुर गांव के हनुमान प्रसाद को वर्ष 2014 में बेटी की हत्या करने के जुर्म में जेल भेजा गया था। हनुमान प्रसाद लगातार खुद को निर्दोष बता रहा था। जेल में ही उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस मामले को लेकर कांग्रेस की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को लेकर न्यायिक जांच कराई थी। इस प्रकरण में भी जेल प्रशासन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी।
संदिग्ध हालात में फंदे से लटका मिला शव
अमेठी जिले के सिलोखर गांव निवासी राम खेलावन का बेटा विपिन यादव उर्फ डीएम यादव 30 अप्रैल 2021 को राहुल सिंह की हत्या के मामले में जेल भेजा गया था। विपिन यादव खुद को निर्दोष बता रहा था। उसे जिला कारागार के बैरक नंबर सात में निरुद्ध किया गया था। बुधवार को संदिग्ध परिस्थितियों में विपिन यादव का शव शौचालय के समीप पाइप से गमझे के सहारे फंदे से लटकता पाया गया।
न्यायायिक मजिस्ट्रेट से कारागार प्रशासन ने छिपाई बंदी के अवसाद की जानकारी
जिला कारागार में निरुद्ध बंदी विपिन यादव उर्फ डीएम खुद को निर्दोष बताता रहा। जिला कारागार प्रशासन की ओर से बुधवार की देर शाम जारी प्रेस नोट में बताया गया कि विपिन यादव अवसाद में चल रहा था। उसने अपने भाई अनिल और पिता राम खेलावन से जेल के फोन से बातचीत करते हुए छुड़ाने की गुहार लगाई थी। विपिन खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर खुद को फंसाने का आरोप लगाया था। जिला कारागार प्रशासन ने दावा किया कि विपिन ने इसी अवसाद के कारण फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। यदि ऐसा है तो जिला कारागार प्रशासन ने विपिन के अवसाद में रहने की बात न्यायायिक अधिकारियों के साथ ही जिला प्रशासन को क्यों नहीं बताई।