‘सुजलाम-सुफलाम’ की तर्ज पर होगा बुंदेलखंड सहित सभी जिलों की पेयजल समस्या का समाधान
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बुंदेलखंड सहित प्रदेश के अन्य जिलों में पेयजल समस्या के समाधान के लिए महाराष्ट्र की ‘सुजलाम-सुफलाम’ योजना की तर्ज पर काम होगा। गंगा और यमुना की अविरलता बनाए रख इनमें पर्याप्त मात्रा में जल की उपलब्धता के लिए इनके तटों पर जल संचयन के लिए विशाल तालाबों का निर्माण होगा। यहां भूगर्भ जल की रिचार्जिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गंगा व यमुना पर जल आपूर्ति की निर्भरता कम करने के लिए सरकार आवश्यक कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री रविवार को अपने आवास पर बुंदेलखंड की पेयजल योजनाओं के बारे में प्रजेंटेशन देखने के बाद बोल रहे थे। उन्होंने कहा, सरकार ने छह विलुप्तप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। इसके सुखद परिणाम जल्द दिखने लगेंगे। सरकार पिछले वर्ष से ही बुंदेलखंड सहित प्रदेश के अन्य जिलों में जलसंचयन के लिए सार्थक प्रयास कर रही है। इससे इस वर्ष अधिकतर जिलों में पर्याप्त जल उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित जिलों में जल समस्या के हल के लिए सरकार, राजनीतिक व स्वयंसेवी संगठनों तथा जनसहभागिता से चलाए जा रहे ‘सुजलाम-सुफलाम’ अभियान का प्रस्तुतिकरण देखा। उन्होंने इस अभियान की सराहना की और कृषि उत्पादन आयुक्त प्रभात कुमार को महोबा और हमीरपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लागू करने के निर्देश दिए।
ऐसे काम करती है ये योजना
अभियान से संबंधित जिलों में सबसे पहले विभिन्न वाटरशेड ढांचों जैसे डैम, तालाब, एमआई टैंक तथा फार्म पांड को चिन्हित किया जाता है। उसके बाद प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति दी जाती है। मशीनों से बांधों, तालाब और झीलों की खुदाई व सफाई कर मिट्टी निकाली जाती है। मशीनें कंपनियों के सीआरएस फंड से उपलब्ध होती हैं। मशीनों के लिए आवश्यक डीजल प्रशासन उपलब्ध कराता है।
खुदाई से निकलने वाली उपजाऊ मिट्टी को कृषक अपने खर्चे से खेतों में पहुंचा देते हैं। इस प्रकार जन सहयोग, जिला प्रशासन, स्वयंसेवी संगठनों, कॉरपोरेट सेक्टर, विभिन्न दलों की सहभागिता से यह अभियान चलता है। महोबा और हमीरपुर में प्रयोग सफल होने के बाद पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में इसे लागू किया जाएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, मुख्य सचिव डॉ. अनूप चन्द्र पांडेय, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव सूचना अवनीश अवस्थी, महाराष्ट्र के मृदा एवं जल संरक्षण आयुक्त दीपक सिंघल, नीति आयोग के अन्य अधिकारी एवं भारतीय जैन संगठन के पदाधिकारी मौजूद थे।