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यूपी बोर्ड: निजी प्रकाशकों की किताबें बंद करने का सुझाव

Fri, 25 Apr 2014 08:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 25 Apr 2014 08:34 AM IST
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suggation to cancil the books of privet publishers in up board

प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में इलाहाबाद में हुई बैठक में विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में यूपी बोर्ड के छात्रों का चयन प्रतिशत बढ़ाने के लिए एनसीईआरटी की किताबें चलाने पर विचार किया जाना चाहिए।

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बैठक में विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि आईआईटी, सीपीएमटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में यूपी बोर्ड के छात्रों की सफलता का प्रतिशत काफी कम है।

इसकी अपेक्षा आईसीएससी और सीबीएससी के छात्रों का चयन अधिक होता है। विशेषज्ञों ने बैठक में बताया कि यूपी बोर्ड में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम तो होता है।

इसकी छपाई निजी प्रकाशकों से कराई जाती है जिसमें वे एनसीईआरटी पैनल के लेखकों के पाठ्यक्रम शामिल कर किताबें छापते हैं।

इससे किताबें मोटी होती चली जाती हैं। उदाहरण के लिए कक्षा 11 में एनसीईआरटी की भौतिक विज्ञान की किताब 568 पेज की 115 रुपये में है, वहीं निजी प्रकाशकों की यह किताब 1245 पेज की है और कीमत 696 रुपये है।
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यूपी बोर्ड की किताबों में उदाहरण का भंडार है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में बच्चे भौतिक विज्ञान की किताब साल भर देखकर परेशान होते हैं और शिक्षक के लिए निर्धारित समय के भीतर इसे पढ़ा पाना संभव नहीं होता है।
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यूपी बोर्ड में कक्षा 11 व 12 दोनों साल की पढ़ाई के आधार पर छात्रों को परीक्षा देनी होती है। इससे छात्रों को दोबारा उसी विषय को पढ़ना पड़ता है जिसे वह एक साल पढ़ चुका होता है।


विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि सीबीएसई की तर्ज पर यदि यूपी बोर्ड में कक्षा 11 और 12 की पढ़ाई अलग कर दी जाए तो छात्रों की परेशानियां कम होंगी और परिणाम अच्छे होंगे।

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