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Lucknow News: सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागों के तालमेल से ही मिलेगी सफलता, घटेंगे हादसे
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प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मंत्री दयाशंकर सिंह व मौजूद लोग।
लखनऊ। प्रदेश की जनसंख्या अधिक है। इसलिए हादसे अधिक नजर आते हैं। नो हेलमेट नो फ्यूल जैसी पहल भी अपेक्षित सफलता नहीं दिला पाई, जिससे लोगों में जागरूकता की कमी स्पष्ट है। इतना ही नहीं, सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागों में तालमेल भी नहीं है। एक्सप्रेसवे पर कहीं भी होल्डिंग एरिया नहीं हैं। डॉरमेट्री, रेस्टोरेंट, ट्रॉमा सेंटर तक नहीं हैं। ऐसे में परिवहन विभाग के अफसर ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी विभागों के अधिकारी जिम्मेदारी समझें।
यह कहना है परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह का। वह सोमवार को पीडब्ल्यूडी के विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (आईआरटीई) की ओर से प्रदेशभर के आरटीओ के लिए सड़क सुरक्षा पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा पर परीक्षाएं होनी चाहिए, जिसके अंक बच्चे के रिपोर्ट कार्ड में जुड़े। साथ ही, वाहनों की गति सीमा 120 किमी/घंटा होने पर निर्माताओं के इससे अधिक गति वाले वाहन बेचने पर रोक लगाने और बिना टेस्ट के डीएल जारी न करने की वकालत की। अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल, प्रमुख सचिव पीडब्लूडी अजय चौहान और परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने भी विभागों के सहयोग से सड़क सुरक्षा बेहतर बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में एआरटीओ प्रदीप सिंह, आलोक यादव, आरटीओ प्रभात पांडेय, संजय तिवारी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
कहीं रेडलाइट, कहीं स्टॉप लाइन गलत
आईआरटीई के प्रेसिडेंट डॉ. रोहित बालूजा ने लखनऊ की सड़कों के उदाहरण देते हुए बताया कि कहीं रेडलाइट, कहीं स्टॉपलाइन गलत बनी है। उन्होंने निशातगंज का उदाहरण देते हुए बताया कि पैदलयात्रियों के लिए जगह नहीं छोड़ी गई। ईको गार्डन पर लालबत्ती पहले लगी है, स्टॉपलाइन बाद में। अयोध्या हाईवे पर स्पीड लिमिट के अलग-अलग बोर्ड लगे हैं। कहीं 80, कहीं 60 तो कहीं 20 किमी प्रति घंटे का बोर्ड। उन्होंने रोडवेज बसों की बदहाल स्थिति भी दिखाई। कहा कि पार्किंग व स्टॉपिंग के 27 नियम हैं, लेकिन इनकी जानकारी जांचने वालों को भी नहीं होगी।
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यह कहना है परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह का। वह सोमवार को पीडब्ल्यूडी के विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (आईआरटीई) की ओर से प्रदेशभर के आरटीओ के लिए सड़क सुरक्षा पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा पर परीक्षाएं होनी चाहिए, जिसके अंक बच्चे के रिपोर्ट कार्ड में जुड़े। साथ ही, वाहनों की गति सीमा 120 किमी/घंटा होने पर निर्माताओं के इससे अधिक गति वाले वाहन बेचने पर रोक लगाने और बिना टेस्ट के डीएल जारी न करने की वकालत की। अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल, प्रमुख सचिव पीडब्लूडी अजय चौहान और परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने भी विभागों के सहयोग से सड़क सुरक्षा बेहतर बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में एआरटीओ प्रदीप सिंह, आलोक यादव, आरटीओ प्रभात पांडेय, संजय तिवारी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
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कहीं रेडलाइट, कहीं स्टॉप लाइन गलत
आईआरटीई के प्रेसिडेंट डॉ. रोहित बालूजा ने लखनऊ की सड़कों के उदाहरण देते हुए बताया कि कहीं रेडलाइट, कहीं स्टॉपलाइन गलत बनी है। उन्होंने निशातगंज का उदाहरण देते हुए बताया कि पैदलयात्रियों के लिए जगह नहीं छोड़ी गई। ईको गार्डन पर लालबत्ती पहले लगी है, स्टॉपलाइन बाद में। अयोध्या हाईवे पर स्पीड लिमिट के अलग-अलग बोर्ड लगे हैं। कहीं 80, कहीं 60 तो कहीं 20 किमी प्रति घंटे का बोर्ड। उन्होंने रोडवेज बसों की बदहाल स्थिति भी दिखाई। कहा कि पार्किंग व स्टॉपिंग के 27 नियम हैं, लेकिन इनकी जानकारी जांचने वालों को भी नहीं होगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मंत्री दयाशंकर सिंह व मौजूद लोग।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मंत्री दयाशंकर सिंह व मौजूद लोग।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मंत्री दयाशंकर सिंह व मौजूद लोग।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मंत्री दयाशंकर सिंह व मौजूद लोग।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मंत्री दयाशंकर सिंह व मौजूद लोग।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मंत्री दयाशंकर सिंह व मौजूद लोग।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मंत्री दयाशंकर सिंह व मौजूद लोग।
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