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केंद्र सार्वजनिक करें सुभाष चंद्र बोस से जुड़े दस्तावेज: गोविंदाचार्य

Thu, 24 Sep 2015 08:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 24 Sep 2015 08:28 PM IST
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Subhash Chandra Bose's documents should be made public says Govindacharya.

राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार को भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल की सरकार की तारीफ की।

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वहीं, उन्होंने चुनाव आयोग से सिंबल के बजाय सिर्फ उम्मीदवारों के चेहरों के आधार पर चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आई विकृतियों के लिए राजनीतिक दलों के निशान ही सबसे अधिक जिम्मेदार हैं।
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इसकी वजह से राजनीतिक दलों पर सत्ता पाने की लालसा हावी होती चली गई। नतीजतन आज पूरी राजनीतिक व्यवस्था सामाजिक सरोकारों से कट सी गई है। गोविंदाचार्य से जब नरेंद्र मोदी की शैली और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की आरक्षण पर राय के बारे में उन्होंने टिप्पणी से इन्कार कर दिया। वे बृहस्पतिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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गोविंदाचार्य ने कहा कि 1965 के बाद से राजनीति में बहुत गिरावट आई। 1965 से 1980 तक आयाराम-गयाराम का खेल रहा। फिर राजनीति पर बाहुबल की परत चढ़ाने का काम 1995 तक चला। इसके बाद 1995 से 2010 तक राजनीति से धनबल भी जुड़ गया। यही वजह है कि वर्तमान लोकसभा में सर्वाधिक करोड़पति आ गए हैं।

यह सब चुनाव चिह्न की अनिवार्यता के कारण हुआ। व्हिप व्यवस्था ने नेताओं को जनप्रतिनधि के बजाय दलप्रतिनिधि बनाकर रख दिया है। लिहाजा वे जनता के बजाय दलों के बारे में ही ज्यादा सोचते हैं।

दलों का महत्व घटना जरूरी

Subhash Chandra Bose's documents should be made public says Govindacharya.

उन्होंने कहा कि दलों का महत्व घटना जरूरी है। यह तभी होगा जब चुनाव आयोग मतदान में चुनाव चिह्न की व्यवस्था खत्म करे। आज तो लोग पैसा देकर पार्टियों के टिकट खरीदते हैं। इससे विचारधारा से जुड़े लोगों और कार्यकर्ताओं के लिए उन्हें वोट देना मजबूरी हो जाता है।

गोविंदाचार्य ने कहा, मैं चुनाव आयोग के आभारी हूं कि उसने पहले ईवीएम में नोटा का बटन शामिल किया और अब बिहार चुनाव में निशान के साथ उम्मीदवार का चेहरा भी जोड़ा है। पर, व्यवस्था पूरी तरह से तभी ठीक होगी जब चुनाव चिह्न को खत्म ही कर दिया जाए।

गोहत्या पर रोक के लिए दिल्ली में धरना : उन्होंने 7 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर गोभक्तों, गोशाला संचालकों और संतों के धरना की घोषणा की। यह धरना 7 नवंबर 1966 को दिल्ली में गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों की याद में दिया जाएगा।

मुजफ्फरनगर दंगा में राज्यपाल करें कार्रवाई
: मुजफ्फरनगर दंगा पर राज्यपाल को सौंपी गई जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर गोविंदाचार्य ने कहा कि उन्हें रिपोर्ट के तथ्य पता नहीं हैं। पर, उनकी अपेक्षा है कि राज्यपाल अपनी गरिमा के अनुरूप इस मामले में भी पूरी तटस्थता से कार्रवाई करेंगे।

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