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कतर्निया जंगल में पिकनिक मनाने गए स्टूडेंट्स पांच घंटे नदी पार फंसे रहे, डरी हुईं तीन छात्राएं बेहोश

Mon, 18 Dec 2017 03:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ/बहराइच
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ/बहराइच Updated Mon, 18 Dec 2017 03:15 PM IST
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students standed in the katarniya jungle
नदी पार कर लौटते ‌स्टूडेंट्स। - फोटो : amar ujala

बहराइच के नानपारा में संचालित एक इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट शनिवार को पिकनिक मनाने कतर्नियाघाट सेंक्चुरी गए थे। पिकनिक मनाने के बाद जब सभी लौटने को तट पर पंहुचे तो निजी नाविकों ने नदी पार कराने से इन्कार कर दिया। वनाधिकारियों द्वारा रोकने की बात कही। किसी तरह शिक्षक उस पार पहुंचे।

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वनाधिकारियों से बातचीत की तब रात आठ बजे छात्र-छात्राएं इस पार आ सके और घर को रवाना हुए। इस दौरान तीन छात्राएं सहमकर बेहोश भी हो गईं। हालांकि, अब वे स्वस्थ हैं। इस मामले में संस्थान संचालक ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों व मुख्यमंत्री से शिकायत की है।
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नानपारा में संचालित एक कोचिंग सेंटर के संचालक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि संस्थान के छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक भ्रमण पर शनिवार को कतर्नियाघाट सेंक्चुरी ले जाया गया। कतर्नियाघाट रेंज में पहुंचने पर कई प्रकार के शुल्क अदा करने के बाद जंगल भ्रमण कराने की बात वनकर्मियों ने कही। इतने पैसे का इंतजाम नहीं था।

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ऐसे में आम रास्ते पर ही भ्रमण की योजना बनाकर यात्रियों की नाव से दो चक्रों में छात्रों को गेरुआ नदी के उस पार मंदिर पर पहुंचाया। वहां पर सभी ने चार बजे तक पिकनिक का आनंद लिया। लौटने के लिए छात्र जब नदी के तट पर पहुंचे तो निजी नाविकों ने वन विभाग द्वारा किसी भी छात्र को नदी पार न कराने पर रोक लगाने की बात बताई। सिर्फ शिक्षकों को उस पार जाने दिया गया।

उन्होंने बताया कि रेंज कार्यालय पहुंचकर वन क्षेत्राधिकारी से कारण पूछा गया तो उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। देर रात तक अकारण रोके रखा गया। जेल भेजने की धमकी दी गई जिसके चलते तीन छात्राएं बेहोश हो गईं। उस पार मौजूद एसएसबी के जवानों के हस्तक्षेप के बाद छात्राओं की तबियत दुरुस्त हुई।

रात आठ बजे तीन हजार रुपया जुर्माना लेने के बाद वनाधिकारियों ने छात्रों को उस पार से लाने दिया। इसके चलते अफरातफरी की स्थिति रही। गौरतलब हो कि इस भ्रमण कार्यक्रम में 97 सदस्य थे। जिनमें चार शिक्षिकाएं व 28 छात्राएं शामिल थीं। इस मामले में कोचिंग संचालक राघवेंद्र ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ ही मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर शिकायत की है।

तो कौन होता हमले का जिम्मेदार

students standed in the katarniya jungle

गौरतलब हो कि वन विभाग की ओर से संचालक के मुताबिक उस पार छात्राओं को पांच घंटे रोका गया। जिससे सभी परेशान हो उठे। गेरुआ पार का इलाका जंगली हाथियों के साथ ही बाघ और तेंदुओं का है। ऐसे में रात में अगर वन्यजीव हमला करते तो जिम्मेदार कौन होता।

मैने नहीं की अभद्रता, जुर्माना वसूलकर छोड़ा
कतर्नियाघाट के वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने कहा कि शैक्षिक भ्रमण पर आने वाले छात्र-छात्राओं को रोक नहीं है। लेकिन बिना अनुमति के जंगल के कोर जोन में सभी को भ्रमण कराया गया। जबकि कोर जोन में बिना अनुमति जाने की इजाजत नहीं है। किसी के साथ अभद्रता नहीं की। जंगल के नियमों का पालन करते हुए सिर्फ जुर्माना वसूलकर छोड़ दिया।

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