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छात्र परिषद : न मुद्दे न हुंकार, मौन है छात्रों की सरकार

Wed, 19 Jan 2022 02:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jan 2022 02:18 AM IST
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student union inactive in lucknow
अक्षय कुमार, लखनऊ। प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी है। हर वर्ग अपने हित के मुद्दे उठा रहा है, लेकिन राजधानी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से छात्र हित की आवाज नहीं उठ रही है। वजह ये कि छात्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए उत्तरदायी छात्र परिषद कहीं मूकदर्शक की भूमिका में है, कहीं कागजों में सिमटी है तो कहीं है ही नहीं। लखनऊ विश्वविद्यालय, बीबीएयू, अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज, नवयुग कन्या महाविद्यालय आदि में मेरिटोरियस स्टूडेंट काउंसिल बनती तो हर साल है, लेकिन छात्रों के मुद्दे पर इसका प्रतिनिधित्व नहीं दिखता है।
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वर्तमान में ऑनलाइन परीक्षा हो या क्लास में सुविधाओं का मुद्दा। छात्र परिषद की सक्रियता कहीं नहीं दिख रही है। वर्तमान सत्र 2021-22 में कोविड काल के कारण कुछ ही विश्वविद्यालयों में छात्र परिषद का गठन हुआ है, जबकि अधिकतर जगह कागजों पर ही इसकी कवायद चल रही है। शायद यही वजह है कि विद्यार्थियों की सामान्य मांगों पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी ही चाल से कवायद करता है और विद्यार्थी भटकते रहते हैं।
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बीबीएयू में चल रही तैयारी
बीबीएयू में सत्र 2020-21 में छात्र परिषद का गठन कोरोना संक्रमण के कारण कैंपस अधिकतर समय बंद ही रहा। इसके कारण परिषद का गठन नहीं हुआ है। वहीं वर्तमान सत्र 2021-22 में नए विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया काफी देरी से हुई। इसलिए इस बार भी काउंसिल का गठन नहीं हो सका। ऐसे में अन्य विद्यार्थियों की बात रखने का कोई सवाल ही नहीं खड़ा होता है। विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ. रचना गंगवार ने बताया कि सत्र 2020-21 के लिए छात्र परिषद की गठन की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए विभागों से मेधावी विद्यार्थियों के नाम व जानकारी मांगी गई है। जल्द ही इसकी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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भाषा विवि में 2018 में हुआ था गठन
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में वर्ष 2018 में छात्र परिषद का गठन हुआ था। इसके बाद से यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई। उस समय छात्रावास में विद्यार्थियों से संवाद करने के लिए भी काउंसिल का गठन किया गया था। इसके बाद से इस परिषद का गठन ही नहीं हुआ है। छात्र खुद अपनी मांगों के लिए सीधे प्रशासन से संपर्क करते हैं। विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ. तनु डंग ने बताया कि कोविड काल के कारण दो साल से काउंसिल नहीं बनी है। हमारी कोशिश है कि जल्द इसका गठन कर लिया जाए।
- हमारे कार्यकाल में अधिकतर समय कोविड ही रहा। अन्य दिनों में छात्रों के मुद्दे डीन व डीएसडब्ल्यू के माध्यम से निस्तारित करने का प्रयास किया गया। हम छात्र और प्रशासन के बीच एक ब्रिज के रूप में काम करते हैं। प्रशासन को नए सुझाव भी छात्र हित के लिए देते हैं। छात्रों के मुद्दों को हमेशा सामने लाने की कोशिश की।
-विभंतिका द्विवेदी, अध्यक्ष, लविवि मेरिटोरियस स्टूडेंट काउंसिल
- छात्राओं में नेतृत्व क्षमता के विकास व सहयोग से काम करने की प्रकृति के विकास में स्टूडेंट काउंसिल सहयोगी भूमिका निभा रही है। विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन से लेकर नीति निर्धारण में भी हमारे सुझाव लिए जाते हैं। मैं तीन साल से काउंसिल में सदस्य रही हूं, इससे सभी छात्राएं संतुष्ट हैं।

शशि त्रिवेदी, अध्यक्ष, नवयुग कन्या महाविद्यालय स्टूडेंट काउंसिल
- छात्राएं अपने हर छोटे-बड़े मुद्दे लेकर हमारे पास आती हैं। यहां तक की वे अपने घरेलू मुद्दे भी हमसे डिस्कश करती हैं। कॉलेज स्तर की जो चीजें होती हैं, उसे हम अपने शिक्षकों व प्राचार्य से वार्ता कर निस्तारित कराते हैं। हाल में वाश रूम की काफी समस्या थी, जिसे दूर कराया गया। कोविड के दौरान काउंसलिंग सत्र का आयोजन कर छात्राओं की काफी दिक्कत दूर की गई है। यह काउंसिल काफी काम की है।
अनघ मिश्रा, अध्यक्ष स्टूडेंट काउंसिल, अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज
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