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वह बनना चाहता था इंजीनियर लेकिन पापा देख रहे थे डॉक्टर का ख्वाब, प्रेशर में आकर रच डाली ये साजिश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 17 Feb 2018 02:27 PM IST
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- फोटो : डेमो
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लखनऊ के मड़ियांव इलाके में 12वीं के छात्र ने डॉक्टर बनने के पिता के दबाव से परेशान होकर खुद के अपहरण का ड्रामा रचा और इंजीनियर बनने की चाह में बृहस्पतिवार को फिजिक्स की परीक्षा छोड़कर अंडरग्राउंड हो गया। वह कई घंटे चारबाग में भटका और मुकदमा दर्ज होने की भनक लगने पर घर लौट आया।
कुछ देर तक उसने पुलिस को झूठी कहानी सुनाई, लेकिन कॉल डिटेल से बयान के मिलान की बात पर सच उगल दिया। इंस्पेक्टर ने छात्र को नसीहत और उसके पिता को हिदायत देने के साथ मुकदमा खारिज करा दिया। इंस्पेक्टर अमरनाथ वर्मा ने बताया कि नौबस्ता में रामलीला मैदान के पास एक मकान में किराये पर रहने वाला इंटरमीडिएट का छात्र बृहस्पतिवार दोपहर फिजिक्स की परीक्षा देने निकला था।
इसके बाद वह लापता हो गया। उसने दोपहर 3:05 बजे पिता को कॉल कर बाइक सवार बदमाशों द्वारा अगवा कर लिए जाने की सूचना दी। इसके बाद मोबाइल बंद होने से परेशान सीतापुर के गांव के निवासी पिता ने रिश्तेदारों को जानकारी दी और आननफानन लखनऊ पहुंचे।
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अनहोनी का अंदेशा जताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सर्विलांस से आखिरी लोकेशन ट्रेस की और पिता को साथ लेकर छात्र की तलाश में चारबाग पहुंची। जीआरपी व नाका पुलिस को भी अलर्ट किया गया। देर रात छात्र ने बड़े भाई से फोन पर संपर्क किया। अपहरण का मुकदमा दर्ज होने की भनक लगने पर वह घर लौट आया।
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कुछ देर तक उसने पुलिस को झूठी कहानी सुनाई, लेकिन कॉल डिटेल से बयान के मिलान की बात पर सच उगल दिया। इंस्पेक्टर ने छात्र को नसीहत और उसके पिता को हिदायत देने के साथ मुकदमा खारिज करा दिया। इंस्पेक्टर अमरनाथ वर्मा ने बताया कि नौबस्ता में रामलीला मैदान के पास एक मकान में किराये पर रहने वाला इंटरमीडिएट का छात्र बृहस्पतिवार दोपहर फिजिक्स की परीक्षा देने निकला था।
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इसके बाद वह लापता हो गया। उसने दोपहर 3:05 बजे पिता को कॉल कर बाइक सवार बदमाशों द्वारा अगवा कर लिए जाने की सूचना दी। इसके बाद मोबाइल बंद होने से परेशान सीतापुर के गांव के निवासी पिता ने रिश्तेदारों को जानकारी दी और आननफानन लखनऊ पहुंचे।
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अनहोनी का अंदेशा जताते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सर्विलांस से आखिरी लोकेशन ट्रेस की और पिता को साथ लेकर छात्र की तलाश में चारबाग पहुंची। जीआरपी व नाका पुलिस को भी अलर्ट किया गया। देर रात छात्र ने बड़े भाई से फोन पर संपर्क किया। अपहरण का मुकदमा दर्ज होने की भनक लगने पर वह घर लौट आया।
मुकदमे की भनक लगने पर घबराया
पिता के साथ थाने पहुंचे छात्र की कहानी सुन इंस्पेक्टर ने विवेचक को मड़ियांव व चारबाग में लगे सीसीटीवी की फुटेज खंगालने व उसके मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन से बयान का मिलान करने के आदेश दिए। हड़बड़ाए छात्र ने पिता को कक्ष से बाहर जाते देख बयान दिया कि बायोलॉजी में उसका मन नहीं लगता, मैथ लेना चाहता था।
पिता उसे डॉक्टर बनाने का ख्वाब देख रहे हैं। उनकी इच्छा का मान रखने को बायोलॉजी ले ली थी। कुछ दिन पहले पता चला कि परीक्षा छोड़ देने पर उसे विषय बदलने का मौका मिलेगा। सोचा कि फिजिक्स की परीक्षा छोड़ने से किसी को उसकी कहानी पर शक नहीं होगा, क्योंकि इस विषय में वह अच्छा था।
छात्र ने इंस्पेक्टर को बताया कि पिता के आननफानन रिपोर्ट दर्ज कराने की उसे उम्मीद नहीं थी। सोचा था देर रात फिर कॉल करके अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बच निकलने की कहानी सुना देगा। कई घंटे भटकने के बाद उसने भाई से संपर्क किया। पता चला कि पिता के साथ कई रिश्तेदार उसकी तलाश कर रहे हैं। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर सर्विलांस से तलाश शुरू की है। इससे छात्र घबरा गया और कमरे पर लौटने के साथ परिवारीजनों को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भागने की कहानी सुना दी।
पिता उसे डॉक्टर बनाने का ख्वाब देख रहे हैं। उनकी इच्छा का मान रखने को बायोलॉजी ले ली थी। कुछ दिन पहले पता चला कि परीक्षा छोड़ देने पर उसे विषय बदलने का मौका मिलेगा। सोचा कि फिजिक्स की परीक्षा छोड़ने से किसी को उसकी कहानी पर शक नहीं होगा, क्योंकि इस विषय में वह अच्छा था।
छात्र ने इंस्पेक्टर को बताया कि पिता के आननफानन रिपोर्ट दर्ज कराने की उसे उम्मीद नहीं थी। सोचा था देर रात फिर कॉल करके अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बच निकलने की कहानी सुना देगा। कई घंटे भटकने के बाद उसने भाई से संपर्क किया। पता चला कि पिता के साथ कई रिश्तेदार उसकी तलाश कर रहे हैं। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर सर्विलांस से तलाश शुरू की है। इससे छात्र घबरा गया और कमरे पर लौटने के साथ परिवारीजनों को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भागने की कहानी सुना दी।
बच्चे पर न थोपें अपनी चाहत
डेमो
- फोटो : अमर उजाला
छात्र के अपहरण का सच सामने आने पर इंस्पेक्टर अमरनाथ वर्मा ने उसके पिता से बात की। पिता ने बताया कि बड़ा बेटा पढ़ाई में फिसड्डी निकला तो मंझले को पढ़ाकर डॉक्टर बनाने का ख्वाब देखा। पांच बीघा जमीन पर खेती के साथ अन्य काम कर उसकी पढ़ाई पर खर्च कर रहा था।
बेटे ने डॉक्टरी में दाखिला लेने पर लाखों के खर्च की बात कही तो समझाया कि सब बेचकर पैसों का इंतजाम करेगा, लेकिन उसे दिक्कत नहीं महसूस होने देगा। इस पर इंस्पेक्टर ने समझाया कि बच्चे को भविष्य तय करने का मौका देना चाहिए। अपनी इच्छा थोपने से मामला गड़बड़ा जाता है। छात्र बोला कि पिता के आगे वह अपनी बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा सका था। इसलिए परीक्षा छोड़ने को ड्रामा रच डाला। इंस्पेक्टर ने उसे भी समझाया और दोबारा ऐसा न करने की हिदायत दी।
'अभिभावकों को चाहिए वे बच्चों के मोबाइल व कमरे को चेक करते रहे और उन पर नजर रखें। इससे पता चलेगा कि वह किस दिशा की ओर जा रहा है। हर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर बने, मगर उन्हें अपनी अपेक्षाएं थोपनी नहीं चाहिए। बच्चे को उसकी रुचि के हिसाब से बढ़ने का मौका दें।' - डॉ देवीशीष, मनोचिकित्सक, लोहिया अस्पताल
बेटे ने डॉक्टरी में दाखिला लेने पर लाखों के खर्च की बात कही तो समझाया कि सब बेचकर पैसों का इंतजाम करेगा, लेकिन उसे दिक्कत नहीं महसूस होने देगा। इस पर इंस्पेक्टर ने समझाया कि बच्चे को भविष्य तय करने का मौका देना चाहिए। अपनी इच्छा थोपने से मामला गड़बड़ा जाता है। छात्र बोला कि पिता के आगे वह अपनी बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा सका था। इसलिए परीक्षा छोड़ने को ड्रामा रच डाला। इंस्पेक्टर ने उसे भी समझाया और दोबारा ऐसा न करने की हिदायत दी।
'अभिभावकों को चाहिए वे बच्चों के मोबाइल व कमरे को चेक करते रहे और उन पर नजर रखें। इससे पता चलेगा कि वह किस दिशा की ओर जा रहा है। हर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर बने, मगर उन्हें अपनी अपेक्षाएं थोपनी नहीं चाहिए। बच्चे को उसकी रुचि के हिसाब से बढ़ने का मौका दें।' - डॉ देवीशीष, मनोचिकित्सक, लोहिया अस्पताल