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गंगा किनारे ‘नो डवलपमेंट-नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में निर्माण पर होगी सख्त कार्रवाई

Wed, 23 Sep 2020 02:02 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 23 Sep 2020 02:02 AM IST
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Strict action will be taken on construction in 'No Development-No Construction Zone' along the Ganga
varanasi ganga - फोटो : amar ujala
गंगा नदी के किनारे ‘नो डवलपमेंट-नो कंस्ट्रक्शन जोन’ में निर्माण या अतिक्रमण करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी के आदेश के तहत सिंचाई विभागाध्यक्ष ने बिजनौर से उन्नाव-कानपुर तक गंगा नदी के दोनों किनारों पर स्थित भूमि के लिए यह अधिसूचना जारी कर दी। उन्होंने संबंधित निर्देशों का कड़ाई से पालन के लिए भी है। अलबत्ता जिला प्रशासन की पूर्व अनुमति से रिवर वाटर-वे (जल मार्ग) की डिसिल्टिंग का कार्य हो सकेगा।
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सिंचाई विभाग के अनुसार, बिजनौर से उन्नाव-कानपुर तक गंगा नदी के दोनों किनारों से 100 मीटर तक किसी भी प्रकार के निर्माण, अतिक्रमण, व्यावसायिक गतिविधियां, पट्टे, नीलामी और प्रदूषण करने वाली सभी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए इस क्षेत्र को नो डवलपमेंट-नो कंस्ट्रक्शन जोन अधिसूचित किया गया था। इसके तहत उत्तर प्रदेश की सीमा के अंतर्गत बिजनौर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कांशीराम नगर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव एवं कानपुर तक गंगा नदी के दोनों किनारे आएंगे।
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केंद्रीय जल आयोग की ओर से एनजीटी में दी गई अंतिम रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि इस जोन में अस्थायी निर्माण राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की पूर्व अनुमति के बाद ही हो सकेगा। इसके तहत दैविक-प्राकृतिक आपदा या धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों के लिए अस्थायी निर्माण की गतिविधियां ही अनुमन्य होंगी। इसके अलावा निर्धारित नियमों के तहत नियंत्रित बालू, पत्थर, बजरी और नदी किनारे के पदार्थों का खनन किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्तजिला प्रशासन की पूर्व अनुमति से संरक्षित स्मारक, मंदिर, बोरिंग, श्मशान घाट की मरम्मत, रिवर वाटर-वे की डिसिल्टिंग और क्षतिग्रस्त बंधों की मरम्मत एवं रख-रखाव का कार्य किया जा सकेगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा चिह्नित रेड श्रेणी के उद्योग प्रतिबंधित रहेंगे। 
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