जब बहन बोली, घर में रह रहा शख्स मेरे भाई का बहुरूपिया है
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काकादेव के पैतृक घर में रह रहा शख्स मेरे भाई का बहुरूपिया है। उसके दस्तावेजों की जांच से यह बात उजागर होती है। पासपोर्ट, वोटर आईडी की जन्मतिथि और आरटीओ दफ्तर से बनवाये गए लाइसेंस में जन्म तारीख और वर्ष दोनों में अंतर है।
पुलिस को अपनी प्रारंभिक जांच में ही दस्तावेजों में जन्मतिथि का अंतर मिल गया। इस रिपोर्ट पर एसएसपी शलभ माथुर ने काकादेव पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई का आदेश दे दिया है।
केशवपुरम आवास विकास में रहने वाली मोना वार्लो का कहना है कि इनका पैतृक मकान काकादेव क्षेत्र में है। भाई राजेश स्टैनली बहुत पहले घर छोड़कर चला गया था। माता-पिता के देहांत के बाद अचानक एक शख्स प्रकट हुआ।
उसने कहा कि वह ही राजेश स्टैनली है। अब धर्म परिवर्तन कर राजेश दूबे बन गया है। नम्रता से लव मैरिज कर ली है। इसके बाद दोनों जबरन पैतृक घर में रहने लगे।
बकौल मोना वार्लो उन्हें शक है कि राजेश दूबे नाम का यह शख्स कोई बहुरूपिया है, उनका भाई नहीं। इसके लिए मोना वार्लो ने पुलिस को कुछ साक्ष्य दिए।
भाई-बहन में पुराना है विवाद
काकादेव के एसआई रमाकांत दूबे ने इसकी प्रारंभिक जांच की। उन्होंने पाया कि राजेश दूबे का अधिकांश समय मध्य प्रदेश में बीता है। जबलपुर से पासपोर्ट, निर्वाचन आयोग का पहचान पत्र, बैंक खाता, पैन कार्ड नंबर सब वहीं का है।
वहीं राजेश स्टैनली नाम से कानपुर आरटीओ दफ्तर से लाइसेंस बना है। दोनों के दस्तावेज में जन्मतिथि का अंतर है। ऐसे में यदि राजेश स्टैनली ही राजेश दूबे है तो एक जगह का दस्तावेज फर्जी है।
वह चाहे आरटीओ दफ्तर में लगाया गया दस्तावेज हो या फिर जबलपुर का। काकादेव एसओ उदय प्रताप यादव ने बताया कि एसआई की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने एफआईआर करने का आदेश दे दिया है।
अब दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल कर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि भाई-बहन में प्रापर्टी को लेकर विवाद पुराना है।