मथुरा बवाल: जवाहर बाग में थी रामवृक्ष की 'समानान्तर सरकार'
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मथुरा के जवाहर बाग में ‘स्वाधीन भारत’ के नाम से समानांतर सरकार चलाने वाला रामवृक्ष यादव भारत सरकार को ‘ब्रिटिश इंडिया सरकार’ बताता था।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित ‘आजाद हिंद सरकार’ का निष्ठावान बताकर यादव अधिक से अधिक लोगों की सहानुभूति हासिल करता और उन्हें अपने साथ मिला लेता। यही नहीं, इसका प्रचार इंटरनेट और सोशल साइट्स के जरिये भी कर रहा था। उसने जवाहर बाग को अपनी सरकार का हेडक्वार्टर घोषित रखा था।
रामवृक्ष और उसके साथी नेताजी के नाम पर लोगों को इस कदर बरगला चुका था कि वे गृह युद्ध के लिए तैयार हो चुके थे। उसके साथी व अन्य लोग रामवृक्ष को ‘प्रणेता’ के नाम से पुकारते थे और उसकी बातों में पूरी तरह विश्वास करते थे।
सिद्धार्थनगर का रहने वाला रामचंद्र गुप्ता बताता है कि वह वर्ष 2008 में मथुरा आश्रम में रामवृक्ष से मिला और नेताजी की सरकार के बारे में जाना। उसे उम्मीद थी कि नेताजी की सरकार पूरे भारत वर्ष में कायम होगी।
इकट्ठा कर लिया था 600 क्विंटल गेहूं व 200 क्विंटल चावल
वह बताता है कि 18 अप्रैल 2016 तक वह जवाहर बाग में ही था, इस दौरान यहां लोग किसी भी हमले से जूझने की तैयारी कर रहे थे। आपात स्थिति से बचने के लिए 600 क्विंटल गेहूं और 200 क्विंटल चावल, दाल, आलू आदि इकट्ठा किया गया था।
उसका दावा है, जब 20 दिन पहले बिजली सप्लाई काटी गई तो उन लोगों ने सोलर लाइट खरीद कर लगा दी, जिससे जरूरी कामों में बिजली की कमी बाधा न बने।
‘जय सुभाष’ और ‘जय हिंद’ के नारों के साथ ये लोग अपने विचारों का प्रचार करते और भारत सरकार के खिलाफ जंग के लिए तैयार रहने को कहते।
इन्हें झांसा दिया जाता था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध में उपयोग किए गए हथियारों का पूरा जखीरा उनके पास है, इसलिए वे युद्ध के लिए भी तैयार हैं।
फेसबुक पर पेज बनाकर प्रचार
18 अप्रैल को फेसबुक पेज ‘स्वाधीन भारत नेशनल मूवमेंट’ में कहा गया कि वे सब नेताजी के सच्चे अनुयायी हैं। इसलिए उनसे जुड़ी सभी जानकारियां भारत सरकार से लेना चाहते हैं। इसके लिए वे मथुरा के जवाहर बाग में धरना दे रहे हैं। नेताजी उनके लिए ‘रूलर ऑफ द नेशन’ हैं।
मथुरा प्रशासन को धमकाया
फेसबुक पेज ‘स्वाधीन भारत नेशनल मूवमेंट’ पर कहा गया कि वे नेताजी से जुड़े दस्तावेज लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, मथुरा प्रशासन उन्हें हटाने का प्रयास कर रहा है। प्रशासन को धमकाते हुए लिखा गया कि उनके आंदोलन के खिलाफ कोई भी कदम उठाना गैरकानूनी होगा।
ये है सच्चा इतिहास
उपद्रवी खुद को नेताजी के ‘आजाद हिंद सरकार’ का हिस्सा बताते हुए लोगों को बरगला रहे थे। जबकि आजाद हिंद सरकार द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद खत्म मान ली गई थी।
बता दें, सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद सरकार’ का गठन 21 अक्तूबर 1943 को सिंगापुर में आजाद हिंद फौज के साथ किया था। इसका अपना मंत्रिमंडल था और सचिव व सलाहकारों के साथ प्रशासनिक अमला भी।
तब के जर्मनी, जापान, इटली, क्रोएशिया, थाईलैंड, बर्मा, मंचुकुओ, फिलिपीन जैसे देशों के साथ इसके राजनयिक संबंध कायम हुए और कई देशों ने बधाई संदेश भेजे।
भारत में इसके अधीन अंडमान द्वीप समूह और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र में बर्मा व लगते हुए शहरों में जापान द्वारा कब्जा किए गए क्षेत्र को माना जाता है। अंग्रेजों ने आजाद हिंद फौज के सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया। उनमें से कुछ पर अंग्रेज सरकार ने देशद्रोह के मुकदमे भी चलाए।
बाहुबली से कम रुतबा नहीं था रामवृक्ष का
मथुराकांड के लिए जिम्मेदार माना जा रहा रामवृक्ष मरदह थाने के रायपुर-बाघपुर का निवासी है। एक दशक पहले जब वह गांव से गया था, तो गंवई इंसान था। लेकिन दो साल पहले गांव लौटा, तो उसका रुतबा बाहुबली से कम नहीं था।
गांव वाले बताते हैं कि रामवृक्ष की जय गुरुदेव में आस्था है। उनका शिष्य बनने के बाद आसपास के इलाके में वह केवल उन्हीं लोगों से मिलता था, जो जय गुरुदेव से जुड़े थे। रामवृक्ष गाजीपुर से लोकसभा और विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है।
ग्रामीणों की माने तो वर्ष 1976 में इमरजेंसी के दौरान वह जेल गया था। जेल से छूटने के बाद बाबा जय गुरुदेव का शिष्य बन गया और पूरा जीवन उनके लिए समर्पित कर दिया। रामवृक्ष लोकतंत्र रक्षक सेनानी भी है।
वह अपनी पत्नी कलावती, बेटी गुड़िया तथा बड़े बेटे राजनारायण के साथ एक दशक से मथुरा में रह रहा है। उसकी बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है और छोटा बेटा विवेक दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी करता है। रामवृक्ष के भाई उदय प्रताप फौज में हैं और उनका परिवार गांव में ही रहता है।
रामवृक्ष ने 1977 में जहूराबाद से विधानसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ा था। बाद में बाबा की दूरदर्शी पार्टी से 1984 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था।
एक रुपये में मिलना चाहिए 60 लीटर डीज़ल
रामवृक्ष यादव लोगों के मन में शासन प्रशासन के खिलाफ बगावत और नफरत के बीज बो रहा था। उन्हें भड़काने के साथ लालच भी देता और बाजार से कम दामों पर सामान बिकवाता था।
बाजार से 35 रुपये किलोग्राम के रेट पर चीनी खरीदकर पब्लिक को 25 रुपये में बेचता था। जब अंगूर 60 रुपये किलोग्राम थे, तब उसने 20 रुपये की दर पर बिकवाए।
इसके बाद भी कब्जाधारियों के अलावा कोई और उसके जाल में नहीं फंसा। वह खुद को नेताजी सुभाष चंद्र बोस का फालोअर बताने लगा।
उसकी मांग थी कि एक रुपये में 60 लीटर डीजल मिलना चाहिए, सोना 12 रुपये किलो होना चाहिए, मुद्रा सोने की होनी चाहिए। आजाद हिंद फौज का सिक्का चलना चाहिए, ऐसे प्रवचन देता था।