सेना में चयन हुआ तब तक खो दिए पैर, पढ़े मेरठ बवाल के शिकार की कहानी
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जिला मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर स्थित माधवपुर छतौना गांव में एक युवक छह सालों से बिस्तर पर पड़ा जिंदगी के दिन काट रहा है। आईटीबीपी में भर्ती होकर देश की सेवा करने की हसरत लिए घर से निकला युवक भर्ती रद्द होने के बाद मेरठ में हुए बवाल का शिकार हो गया था।
इकलौते बेटे के इलाज के लिए पिता ने अपनी पूरी जमीन गिरवी रख दी लेकिन बेटे की सेहत में सुधार नहीं हुआ। गोसाईगंज थाना क्षेत्र के माधवपुर छतौना गांव निवासी राम दयाल पाल का इकलौता बेटा नीतेश पाल (24) सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था।
बीए दितीय वर्ष की पढ़ाई करते समय नीतेश आईटीबीपी में भर्ती के लिए एक फरवरी 2011 को मेरठ में आयोजित परीक्षा में शामिल होने गया था। परीक्षा में देश भर के 11 राज्यों से अभ्यर्थी पहुंचे थे। भारी भीड़ होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी।
उसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने मेरठ में जमकर बवाल काटा था। आईटीबीपी के जवानों ने एक फरवरी की रात हिमगिरी एक्सप्रेस ट्रेन से सैकड़ों छात्रों को रवाना किया था। नीतेश पाल भी हिमगिरी में बैठकर सुल्तानपुर आ रहा था।
रास्ते में शाहजहां के पास ट्रेन की छत पर बैठे कई अभ्यर्थी नीचे गिर पड़े थे, जिसमें 12 युवकों की मौत हो गई थी, जबकि 100 लोग घायल हुए थे। ट्रेन की इंजन में आग लग गई थी। इंजन में आग लगते ही ट्रेन में बैठे लोग कूदकर बाहर निकलने लगे थे।
चयन का पत्र मिलने तक हो चुकी थी देर
इस बीच नीतेश पाल भी ट्रेन के डिब्बे से बाहर निकला लेकिन पटरी के किनारे पड़ी गिट्टी पर उसका पैर फिसल गया था। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने नीतेश को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया था।
ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में नीतेश के रीढ़ की हड्डी का ऑपेरशन किया गया था। एक वर्ष तक नीतेश का उपचार चलता रहा। हालत में सुधार हो रहा था लेकिन नीतेश के सामने पैसे की तंगी सामने आ गई।
माधवपुर छतौना गांव निवासी नीतेश पाल ने वर्ष 2010 में सीआरपीएफ भर्ती में शामिल हुआ था लेकिन उसका परीक्षा परिणाम आने में देर हो गई। इस दौरान आईटीबीपी की ग्रुप-सी की भर्ती निकली थी, जिसमें शामिल होने के बाद यह हादसा हो गया।
चोट लगने के दो माह बाद मार्च में नीतेश के घर पत्र आया कि उसका चयन सीआरपीएफ में हो गया है और उसे मेडिकल के लिए पहुंचना है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।