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विजय दिवस: बचपन में पिता की वर्दी काटकर बनाई थी सैनिक की ड्रेस, कारगिल वार में निभाया वादा

Sun, 22 Jul 2018 05:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 22 Jul 2018 05:46 PM IST
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story of kargil shaheed sunil jaung.
शहीद सुनील जंग का परिवार। - फोटो : amar ujala

26 जुलाई ही वह दिन था, जब वीर जांबाजों ने कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ दिया था। इसे विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। दुश्मनों की ईंट से ईंट बजाने को ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू हुआ और अपने शौर्य का परिचय देकर जांबाजों ने देशप्रेम की ऐसी इबारतें लिखी, जो युगों तक याद रखी जाएगी।

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दरअसल, सियाचिन से जब गोरखा राइफल्स की टुकड़ी लौट रही थी तो पाकिस्तानी घुसपैठिए खाली पड़ी भारतीय पोस्टों पर काबिज हो गए। सीमित संसाधनों में जिन जवानों ने अदम्य शौर्य व साहस का परिचय देकर जीत दिलाई, उनमें राइफलमैन सुनील जंग लखनऊ के ऐसे नायक थे, जो लखनऊ से सबसे पहले शहीद हुए थे। वो 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंट के जवान थे जिनकी शहादत 15 मई 1999 को हुई थी।
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भीषण गोलीबारी में दुश्मनों को निपटाया
16 साल की उम्र में गोरखा राइफल्स में भर्ती होने वाले राइफलमैन सुनील जंग लखनऊ के पहले शहीद थे, जिन्होंने कारगिल में दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। 10 मई, 1999 को सेना की ओर से उन्हें कारगिल सेक्टर पहुंचने के आदेश मिले। वह एक टुकड़ी के साथ आगे बढ़ रहे थे। उन्हें केवल यह पता था कि चार से पांच सौ घुसपैठिए हिंदुस्तान की सीमा में घुस आए हैं। तीन दिन तक भीषण गोलाबारी के बीच 15 मई को दुश्मन की एक नापाक गोली उनके सिर को चीरती हुई निकल गई।

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बचपन में ही हो गया था वीरता का बीजारोपण

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सुनील जंग की मां व पिता। - फोटो : amar ujala

राइफलमैन सुनील जंग की इस वीरता का बीजारोपण बचपन में ही हो गया था। देशभक्ति उन्हें विरासत में मिली थी। उनके दादा मेजर नकुल जंग व पिता नर नारायण जंग महत भी सेना को सेवाएं दे चुके थे। उसी परंपरा को सुनील जंग ने आगे बढ़ाया। उनकी इस देशभक्ति का परिचय उस समय मिल गया था, जब वह आठ साल के थे और स्कूल के एक फैंसी ड्रेस प्रोग्राम में पार्टीसिपेट कर रहे थे।

उन्होंने मंच से ऐलान किया कि देश की रक्षा के लिए वह अपने लहू का एक-एक कतरा बहा देंगे और मौका पड़ने पर उन्होंने अपने शब्दों का अक्षरश: पालन भी किया। वर्दी का इतना शौक था कि जिद करके पिता की पुरानी वर्दी काटकर अपने लिए ड्रेस तैयार कराई थी।

मां को मलाल, नहीं मिला शौर्य चक्र
राइफलमैन सुनील जंग की मां बीना महत इस बात से दुखी हैं कि बेटे को मरणोपरांत शौर्य चक्र नहीं मिला। जिसके लिए वह लगातार केंद्र सरकार से गुहार भी लगाती रही हैं। मां चाहती है कि सुनील की बहन सुनीता को सरकारी नौकरी मिल जाय तो तंगहाली दूर हो। बीना महत ने बताया कि सरकार ने स्टेडियम बनाने का वादा किया था जो अभी तक अधूरा है।

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