सब कुछ वैसा ही हुआ, तो क्या पहले से तय था 'सपा का झगड़ा'
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क्या समाजवादी पार्टी की पारिवारिक कलह किसी योजना के तहत हुई...। क्या सबकुछ स्क्रिप्टेड था...। सपा के घमासान के अब तक के घटनाक्रम तो कुछ यही बता रहे हैं।
सपा में घमासान के प्री-प्लांड होने संबंधी कथित ईमेल को भले ही हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टीव जार्डिंग फर्जी बताकर इसे फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कह रहे हों पर शनिवार का घटनाक्रम उनकी कथित स्क्रिप्ट की तस्दीक ही कर रहा है।
शुक्रवार रात तक जिस तरह अखिलेश-शिवपाल खेमा एक-दूसरे के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में दिख रहा था। शनिवार सुबह मात्र चार घंटे में सबकुछ शांत हो जाने से इस बात को बल मिल रहा है कि पूरी पटकथा अखिलेश की छवि निखारने और उन्हें ही भविष्य का नेता प्रोजेक्ट करने के लिए तैयार की गई थी।
स्टीव जार्डिंग का कथित ईमेल लीक होने के एक दिन बाद ही उनकी प्रतिक्रिया सामने आई। स्टीव ने इससे इन्कार किया है। इस ईमेल को फर्जी करार देते हुए एक ट्वीट में उन्होंने कहा है कि इस तरह की हरकतें अखिलेश विरोधियों की कुंठा को दिखाती हैं।
सपा सुप्रीमो का अचानक 'मुलायम' हो जाने से हो रहा संदेह
शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री अखिलेश को पार्टी से निकालने वाले मुलायम का अचानक निष्कासन रद्द कर देना, संदेह पैदा कर रहा है।
हालांकि, ईमेल फजी है या नहीं ये तो जांच का विषय है। पर सोशल मीडिया में ये चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस पूरे वाक्ये से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 'विनर' बनकर निकले हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव कमजोर पड़ गए हैं।
सवाल इसलिए भी उठाए जा रहे हैं कि स्टीव जार्डिंग सपा के अहम चुनावी रणनीतिकार हैं। इसी साल सितंबर में खबर आई थी कि सपा ने विधानसभा चुनावों के लिए उन्हें ‘हायर’ किया है।
कहा जा रहा है कि जार्डिंग ने मुलायम सिंह यादव को सलाह दी है कि वे एक पारिवाहिक कलह का नाटक करें जिसमें चाचा शिवपाल खलनायक नजर आएं और अखिलेश यादव बेदाग छवि वाले नेता।
सपा में घमासान काफी कुछ इसी के मुताबिक रहा। इससे इसके प्री-प्लांड होने की बात कही जा रही है।