एसिड अटैक सर्वाइवर्स के दुखद अनुभव पढ़िए...
- छेड़छाड़ पर थप्पड़ जड़ा तो तेजाब से जला दिया चेहरा
- 50 हजार की मदद, 30 हजार रिश्वत में लग गए
- शादी का प्रस्ताव ठुकराया तो गुंडे ने एसिड से जला दिया
- 11 महीने में छूट गए एसिड फेंकने वाले
- पांच साल गायब रहा पति लौटा तो जला दिया
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एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए जीवन हर रोज किसी हादसे से गुजरने जैसा बन जाता है। जो जुर्म करता है, उसे मुस्कुराते हुए अदालत से रिहा होते देखना फिर से तेजाब से जलाए जाने से कम दुखद अनुभव नहीं होता।
हालांकि उन्हें इस बात का रंज भी है कि कई बार समाज उन पर ही सवाल उठाने लगता है तो कई बार पुलिस और सरकार आरोपी के साथ खड़े नजर आते हैं। हालांकि परिवार और आस-पड़ोस से मिली मदद ने हिम्मत बंधाई। बीतते हुए वक्त के साथ घाव भी भरता गया।
वहीं राज्य सरकार की ओर से इलाज की सुविधा और मिलने वाली आर्थिक मदद ने उनमें एक नए उत्साह का संचार किया है। हादसे से उबरकर उठ खड़े होने का जज्बा पैदा किया है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मंगलवार को प्रदेश भर की एसिड अटैक सर्वाइवर्स को राजधानी में सरकार की ओर से आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी। ‘अमर उजाला’ ने इनसे मिलकर हालात और भविष्य की उम्मीदों पर बात की।
छेड़छाड़ पर थप्पड़ जड़ा तो तेजाब से जला दिया चेहरा
हादसा : नीवा गांव की राजनीता बताती हैं कि 2013 में वे स्कूली छात्रा थीं। एक दिन अपनी सहेली के साथ स्कूल से लौट रही थीं। रास्ते में एक लड़का उनका पीछा करते हुए आया और सहेली से छेड़छाड़ करने लगा।
राजनीता ने आगे बढ़कर उसे छुड़ाया और लड़के को दो थप्पड़ जड़ दिए। लड़के ने देख लेने की धमकी दी, जिसे राजनीता ने गंभीरता से नहीं लिया। दो दिन बाद ही तीन लड़कों ने स्कूल से लौटते हुए उन्हें फिर से घेरा और उन पर तेजाब फेंक दिया। सहेली तो दूर हो गई, लेकिन राजनीता का चेहरा जल गया।
अब क्या : राजनीता बताती हैं, तेजाब से चेहरा तो जला ही, आंखों की रोशनी भी नाम मात्र की रह गई। स्कूल का सहयोग मिला जिससे पिछले वर्ष उन्हाेंने 12वीं पास की है। उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिली। इस दफा प्रदेश सरकार सहयोग कर रही है तो उन्हें उम्मीद है कि आगे भी ऐसा सहयोग जारी रहेगा। वे चाहती हैं कि उन्हें और उनके जैसी युवा व पढ़ी लिखी लड़कियों को नौकरी देने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाएं।
पहले मिली थी 50 हजार की मदद, 30 हजार रिश्वत में लग गए
हादसा : लछमनपुर गांव की कुसुमा जिसकी जमीन पर अधिया में खेती कर रही थी, वह उससे गलत संबंध कायम करना चाहता था। कुसुमा ने इसका विरोध किया और उसकी खेती से अलग हो गई।
8 सितंबर 2006 को कुसुमा जब अपनी बेटी के साथ घर लौट रही थी, उस पर एसिड फेंक दिया। मां और बेटी दोनों जख्मी हो गए। पुलिस में शिकायत की गई, लेकिन आरोपी का कुछ नहीं हुआ।
साल दर साल बीते लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। आज एक आंख की रोशनी पूरी तरह खत्म हो चुकी है। दूसरी से बहुत कम नजर आता है।
किसने की मदद : 2008 में सरकार के समाज कल्याण विभाग से 50 हजार रुपये की मदद मिली थी, लेकिन उसे पाने के लिए 30 हजार रुपये रिश्वत देनी पड़ गई। इस दफा मिलने वाली सरकारी मदद पर कुसुमा संतोष जताते हुए कहती हैं, तेजाब से मेरी बेटी का हाथ भी जल गया था, उसे भी मदद मिलनी चाहिए।
शादी का प्रस्ताव ठुकराया तो गुंडे ने एसिड से जला दिया
हादसा : अपनी मां के साथ रह रही गीता परिवार को संभालने के लिए दुकान चलाती थीं। वर्ष 2000 में वहां आने वाले एक गुंडे ने पहले परेशान किया और फिर शादी का प्रस्ताव रखा। गीता ने इन्कार कर दिया। चार दिन के बाद गुंडा फिर आया और न सुनते ही गीता पर एसिड उछाल दिया। गीता का चेहरा, हाथ और शरीर का काफी हिस्सा जल गया।
अब क्या : गीता बताती हैं कि उनका बाल विवाह हुआ था, बाद में वे पति से अलग हो गई थीं। एसिड अटैक के बाद पति उसे अपने साथ ले गए लेकिन एक साल बाद ही मायके जाने पर मजबूर कर दिया। करीब 16 वर्ष बाद मदद के लिए चुने जाने पर वे कहती हैं, एसिड बेचने वालों पर सख्ती होनी चाहिए।
11 महीने में छूट गए एसिड फेंकने वाले
हादसा : बेबी वसीमा 2007 में 17 वर्ष की थीं। पढ़ी-लिखी न होने के कारण वह किसी घरेलू उद्योग में मजदूरी करती थी। वहां से लौटते समय चार लड़कों ने उन्हें रोक कर जोर-जबर्दस्ती करने की कोशिश की।
वसीमा ने विरोध किया तो उस पर तेजाब डाल दिया। वसीमा कहती हैं, मेरे इलाज की वजह से परिवार कर्ज में डूब चुका है। चार दफा सर्जरी के बाद भी केवल 20 प्रतिशत ही देख पाती हूं।
अब क्या : हादसे के बाद जिन चार लड़कों ने एसिड फेंका, उन्हें 11 महीने बाद रिहा कर दिया गया। वसीमा कहती हैं कि जो बयान उन्होंने दिया, पेशकार ने अदालत में उसे बदल कर लिखा जिससे आरोपी छूट गए। वे बताती हैं कि सरकार से मिल रही मदद वे जीवन को फिर से संभालने का प्रयास करेंगी।
पांच साल गायब रहा पति लौटा तो जला दिया
हादसा : लालगंज की मालती का 1986 में बाल विवाह हुआ था। पति रोजाना ही मारता-पीटता। एक दफा उसने पुलिस में शिकायत कर दी, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। पांच साल बाद 2011 में वह छत पर सो रही थी। रात करीब दो बजे पति आया और एसिड डालकर भाग गया। बेटी रोशनी का हाथ जला तो बेटे शिवा के भी तेजाब के छींटे पड़ गए।
अब क्या : हादसे के बाद उन्हें कोई मदद नहीं मिली। अब जाकर प्रदेश सरकार ने सुध ली है तो सबसे पहले वह अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना चाहेंगी। साथ ही चाहती हैं कि उनकी बेटी को सरकार नौकरी दिला दे।
ज्यादती से रोका तो जेठ और देवर ने जला दिया
हादसा :बिंदा के जेठ और देवर यौन शोषण करने का प्रयास करते थे। उसने इसका विरोध किया। 2013 में उस पर तेजाब फेंक दिया। इससे उसका आधा चेहरा और कान गल गए हैं।
अब क्या : जेठ और देवर को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद वे जमानत पर रिहा कर दिए गए। समाज ने आर्थिक और नैतिक मदद की। सरकारी मदद पर बिंदा कहती हैं कि इससे वे तीनों बच्चों का भविष्य संवारने की कोशिश करेंगी।
पिता से दुश्मनी में मासूम बच्ची की जिंदगी कर दी तबाह
हादसा : जूली पांच साल की है। एक तरफ से आंख, नाक, होंठ, कान, गाल, गर्दन, सभी कुछ गलकर कंधे से जा चिपका है। अगस्त 2014 में फतेहपुर के जहानाबाद गांव में वह पिता के साथ सोई हुई थी। उसी दौरान पिता हीरालाल से दुश्मनी रखने वालों ने दोनों पर एसिड फेंक दिया। पिता की मौत हो गई।
अब क्या : परिवारीजन बताते हैं कि गरीबी के कारण उसका इलाज नहीं कराया जा सका है। सरकार से मदद मिलने के बाद उम्मीद है कि मासूम का जीवन कुछ हद तक सुधर सकेगा।