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STF के हत्थे चढ़े छह लोगों ने अवैध इंटरनेट कॉलिंग से बनाए 33 लाख

Sat, 20 Jan 2018 11:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 20 Jan 2018 11:26 AM IST
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stf arrested six people for illegal internet calling
एसटीएफ के हत्‍थे चढ़े आरोपी।

यूपी एटीएस की टीम ने अवैध तरीके से इंटरनेट कॉलिंग का धंधा करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 7 लैपटॉप, मोबाईल फोन, बिल बुक व अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

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यह रैकेट बहुत दिनों से इंटरनेट कॉल को वाइस कॉल में बदलने वाला कॉलिंग कार्ड बेचने का धंधा कर रहा था। एटीएस को पिछले साल से ही इनकी तलाश थी।

यह जानकारी देते हुए एटीएस के आईजी असीम अरूण ने बताया कि पिछले साल इंटरनेट गेटवे को बाईपास करके और राष्ट्रीय सुरक्षा को धता बताते हुए कार्य करने वाले 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और उनके पास से 16 सिम बॉक्स और 50 हजार सिम बरामद किए गए थे।
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लेकिन उस समय यह पता नहीं चल पाया था कि सिम बॉक्स में कॉल ट्रैफिक कहां से आ रहा था और आम लोग नेट कॉलिंग कार्ड कहां से ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि तभी से एटीएस की टीम नजर रखे हुए थी। कुशीनगर पुलिस और टर्म सेल (टेलीकॉम इन्फोर्समेंट रिसोर्स एंड मॉनिटरिंग सेल) की मदद लेकर एटीएस की टीम ने इस रैकेट का भंडाफोड किया है। इस रैकेट में राम प्रताप सिंह, विजय शर्मा, राम सिंगार सिंह, संतोष सिंह, हरिकेश बहादुर सिंह और बृजेश पटेल शामिल हैं।
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आईजी ने बताया कि इस रैकेट का मुखिया राम प्रताप सिंह दुबई रिटर्न है और कुशीनगर केतिनहवा बाजार हाटा में आरएन ग्रुप प्रा. लि. नाम से कंपनी बनाकर ‘वीओआईपी’ (वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) डॉयलर (इंटरनेट कॉलिंग) का काम कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि पूछताछ में राम प्रताप ने बताया कि वह लोग आम लोगों को कॉलिंग कार्ड बेचते थे और उसके माध्यम से कॉल करने पर इंटनेट कॉल को वाइस कॉल में भी बदलते थे।

राम प्रताप ने बताया कि इस धंधे के लिए ‘वीओएस-3000’ नाम की तकनीक की जानकारी उसने किसी बाहरी व्यक्ति से सीखा था। इस तकनीक का मुख्य काम वीओआईपी कॉल को पीएसटीएन पर डायवर्ट करने का है। आईजी ने बताया कि इस रैकेट का भंडाफोड़ करने वाली टीम को पुरस्कृत किया जाएगा।

दो साल में कमाए 33 लाख

आईजी ने बताया कि इस रैकेट के सदस्यओं के पास 19 गेटवे आईपी हैं और इसके जरिए ही कॉलिंग को बेचकर ये लोग ग्राहक भी बना रहे थे। रैकेट में शामिल लोग अब तक 6 हजार से अधिक उपभोक्ता भी बना चुके हैं। इसके अलावा रैकेट के सदस्य सिम बॉक्स पर जाने वाली कॉल को नियंत्रित करने का भी काम करते थे। उन्होंने बताया कि इस धंधे के से इन लोगों ने दो साल में करीब 33 लाख रुपये कमाए हैं।

ऐसे काम करता है सिम बॉक्स

आईजी ने बताया कि विदेश से आने वाले इंटरनेट कॉल को सिम बाक्स के माध्यम से वाइस कॉल में बदलकर भारत के किसी भी नंबर पर बात कराई जा सकती है। इस तकनीक की खासियत यह है कि कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर विदेश के बजाय भारत का ही नंबर डिस्पले करेगा। ऐसी कॉल गेटवे के माध्यम से नहीं आती हैं। इसलिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और टेलीफोन नियामक संस्थाएं भी इनकी मॉनिटरिंग नहीं कर पाते हैं।

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