पंचायत चुनाव में अच्छा काम करने वाले अधिकारी हुए सम्मानित
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राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल ने प्रधानों से कहा कि वे विकास कार्यों में सामूहिक निर्णय लें। अक्सर यह शिकायत आती हैं कि ग्राम प्रधान पंचायत सदस्यों की अनदेखी कर निर्णय ले लेते हैं। प्रधानों को ऐसा नहीं करना चाहिए।
ग्राम सभा एवं आम सभा की बैठकों में ही विकास कार्यों के निर्णय लिए जाने चाहिए। राज्य निर्वाचन आयुक्त रविवार को पंचायत चुनाव में अच्छा काम करने वाले अफसरों को सम्मानित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य निर्वाचन आयुक्त ने 39 जिलों के डीएम, 35 जिलों के कप्तान व 10 राज्य स्तर के अफसरों को सम्मानित किया। इसके अलावा कुल 39 जिलों के 53 ऐसे ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया, जो उच्च शिक्षा प्राप्त हैं।
इनमें से कई इंजीनियर हैं तो कई विधि स्नातक, किसी ने बीटेक व एमटेक कर रखा है तो कुछ ने विभिन्न विषयों में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है।
ये अधिकारी भी हुए सम्मानित
सम्मानित होने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में पंचायती राज के प्रमुख सचिव चंचल कुमार तिवारी, डीजीपी जावीद अहमद और पूर्व डीजीपी जगमोहन यादव का नाम शामिल है।
इसके अलावा पंचायत चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गाजियाबाद के डीएम विमल कुमार शर्मा, बुलंदशहर की डीएम बी. चंद्रकला और गाजियाबाद के एसएसपी धमेंद्र सिंह का नाम भी शामिल है।
‘सीएम सर आते तो उन्हें बताते विकास की हकीकत’
सम्मान पाने वाले उच्च शिक्षित ग्राम प्रधान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के न आने पर निराश हुए। कई ग्राम प्रधानों की निराशा मंच से ही प्रकट हो गई।
ज्यादातर ग्राम प्रधानों ने कहा कि यदि सीएम सर आते तो हम उन्हें गांव के विकास की हकीकत बताते। हमें उम्मीद थी कि इसी बहाने मुख्यमंत्री से मिलने का मौका मिलेगा लेकिन यह मौका भी चला गया।
मालूम हो कि राज्य निर्वाचन आयोग के इस सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मुख्य अतिथि के रूप में आना था। लेकिन मुख्यमंत्री की दिल्ली में मीटिंग होने के कारण वे इस कार्यक्रम में नहीं आ सके।