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KGMU: केजीएमयू की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का अड़ंगा, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने मांगा जवाब
Thu, 04 Aug 2022 01:18 PM IST
ishwar ashish
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 04 Aug 2022 01:18 PM IST
सार
केजीएमयू में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने आरक्षण और शासनादेशों की अनदेखी पर 31 अगस्त तक जवाब मांगा है। आरोप है कि अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधि सदस्य के बिना हस्ताक्षर और बगैर सहमति के ही रोस्टर तय कर दिया गया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केजीएमयू की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग महासंघ की शिकायत के बाद राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने कुलसचिव से 31 अगस्त तक जवाब तलब किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रोस्टर समिति में शामिल अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधि सदस्य के बिना हस्ताक्षर और बगैर सहमति के ही रोस्टर तय कर दिया गया। वहीं, एक अन्य सदस्य की आपत्ति को दरकिनार करके विज्ञापन अनुमोदित कर जारी भी कर दिया। इससे आरक्षण और शासनादेश दोनों का उल्लंघन हो रहा है।
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जानकारी अनुसार केजीएमयू ने शिक्षक भर्ती के लिए पिछले महीने विज्ञापन जारी किया है। इसमें 256 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसमें लगभग हर विभाग के शिक्षक शामिल हैं। इन पदों में नर्सिंग संकाय के भी पद शामिल हैं। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग महासंघ के अध्यक्ष रामचंद्र पटेल ने शिकायत में आरोप लगाया कि एससी सदस्य की सहमति के बिना विज्ञापन जारी करने के साथ ही बैकलॉग और सामान्य भर्ती का विज्ञापन एक साथ जारी किया गया है। इनके विज्ञापन अलग-अलग जारी न होने से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी कनिष्ठ हो जाएंगे।
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दूसरा आरोप यह है कि बैकलॉग भर्ती में शुल्क नहीं लिया जाता है, लेकिन केजीएमयू के विज्ञापन में अभ्यर्थियों से आवेदन शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा पिछले विज्ञापन में खाली रह गए सामान्य व ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पदों को कैरी फॉरवर्ड कर लिया गया है, जबकि नियमानुसार इसमें रोस्टर लगना चाहिए था। केजीएमयू को 31 अगस्त तक विस्तृत आख्या देने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने पर आयोग ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
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आरक्षित वर्ग को ऐसे हुआ नुकसान
शिकायती पत्र में केजीएमयू के नियमों का पालन न करने से होने वाले नुकसान का आकलन भी किया गया है। इसके अनुसार केजीएमयू की नीतियों की वजह से अनुसूचित जाति वर्ग को 21 के बजाय सिर्फ 8.8 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग को 27 के बजाय सिर्फ 12.6 प्रतिशत और एसटी अभ्यर्थियों को दो प्रतिशत के बजाय शून्य पद मिल पा रहे हैं। शिकायती पत्र में बैकलॉग भर्ती को निशुल्क आवेदन शुल्क के साथ पहले पूरा करने तथा सामान्य विज्ञापन पर सामान्य वर्ग के आने वाले अधिसंख्य पदों को शासन से स्वीकृत कराने की मांग की गई है।
सभी नियमों का किया गया पालन
केजीएमयू के कुलपति आशुतोष द्विवेदी का कहना है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सभी नियम और प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। इस संबंध में अगर कोई शंका है तो उसे दूर किया जाएगा।