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Lucknow News: दूरबीन विधि से निकाली सामान्य से दो गुना बड़ी तिल्ली
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लखनऊ। लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से सामान्य से दो गुना बड़ी तिल्ली निकालने में कामयाबी हासिल की। साथ में गॉल ब्लेडर (पित्ताशय की थैली) में पनपी पथरी को भी बाहर निकाला। डॉक्टरों का कहना है संस्थान में पहली दफा इतनी बड़ी तिल्ली की सर्जरी हुई है। महिला का स्वास्थ्य सही होने पर उसे छुट्टी दे दी गई।
बहराइच निवासी काजल कुमारी (30) को खून संबंधी बीमारी थी। हीमोग्लोबिन सात से आठ ग्राम रहता था। बार-बार संक्रमण हो रहा था। डॉक्टरों को दिखाया, पर राहत नहीं मिली। परिजनों ने मरीज को लोहिया संस्थान के जनरल सर्जरी विभाग की ओपीडी में दिखाया। सर्जरी विभाग के डॉ. अमरजोत सिंह ने मरीज की रेडियोलॉजी व पैथोलॉजी संबंधी जांचें कराईं।
जांच में तिल्ली (इस्पलीन) का आकार दोगुने से ज्यादा बड़ा मिला। उन्होंने बताया कि सामान्य महिलाओं में तिल्ली का आकार आठ से नौ सेंटीमीटर होता है। मरीज में यह बढ़कर 24 सेंटीमीटर से ज्यादा हो गया था। इससे परेशानी ज्यादा थी। 20 जनवरी को मरीज को भर्ती किया गया। 21 को दूरबीन विधि से ऑपरेशन कर तिल्ली व गॉल ब्लेडर में पनपी पथरी को निकाला। ऑपरेशन करीब दो घंटे चला। सेहत में सुधार होने पर महिला को डिस्चार्ज कर दिया गया।
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रक्त कोशिकाएं का निर्माण होता है प्रभावित
डॉ. अमरजोत ने बताया कि तिल्ली का आकार सामान्य से ज्यादा होने से रक्त कोशिकाएं के निर्माण व खत्म होने की प्रक्रिया प्रभावित थी। हीमोग्लोबिन कम था। चिकित्सा विज्ञान में इसे हीमोलेटिक एनीमिया कहते हैं। रोगों से लड़ने की क्षमता कम होने पर वह संक्रमण की चपेट में आ रही थीं। रक्तस्राव होने से उसे रोकना कठिन था। गॉल ब्लेडर में पथरी पनप आई थी। इससे पेट में दर्द भी था।
ऑपरेशन टीम के सदस्य
डॉ. अमरजोत सिंह, डॉ. प्रियंका राय, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. शिवांक, एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके दास, डॉ. शरीफ, डैनी डेविड, अजीज समेत डॉक्टर व टेक्नीशियन थे।
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बहराइच निवासी काजल कुमारी (30) को खून संबंधी बीमारी थी। हीमोग्लोबिन सात से आठ ग्राम रहता था। बार-बार संक्रमण हो रहा था। डॉक्टरों को दिखाया, पर राहत नहीं मिली। परिजनों ने मरीज को लोहिया संस्थान के जनरल सर्जरी विभाग की ओपीडी में दिखाया। सर्जरी विभाग के डॉ. अमरजोत सिंह ने मरीज की रेडियोलॉजी व पैथोलॉजी संबंधी जांचें कराईं।
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जांच में तिल्ली (इस्पलीन) का आकार दोगुने से ज्यादा बड़ा मिला। उन्होंने बताया कि सामान्य महिलाओं में तिल्ली का आकार आठ से नौ सेंटीमीटर होता है। मरीज में यह बढ़कर 24 सेंटीमीटर से ज्यादा हो गया था। इससे परेशानी ज्यादा थी। 20 जनवरी को मरीज को भर्ती किया गया। 21 को दूरबीन विधि से ऑपरेशन कर तिल्ली व गॉल ब्लेडर में पनपी पथरी को निकाला। ऑपरेशन करीब दो घंटे चला। सेहत में सुधार होने पर महिला को डिस्चार्ज कर दिया गया।
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रक्त कोशिकाएं का निर्माण होता है प्रभावित
डॉ. अमरजोत ने बताया कि तिल्ली का आकार सामान्य से ज्यादा होने से रक्त कोशिकाएं के निर्माण व खत्म होने की प्रक्रिया प्रभावित थी। हीमोग्लोबिन कम था। चिकित्सा विज्ञान में इसे हीमोलेटिक एनीमिया कहते हैं। रोगों से लड़ने की क्षमता कम होने पर वह संक्रमण की चपेट में आ रही थीं। रक्तस्राव होने से उसे रोकना कठिन था। गॉल ब्लेडर में पथरी पनप आई थी। इससे पेट में दर्द भी था।
ऑपरेशन टीम के सदस्य
डॉ. अमरजोत सिंह, डॉ. प्रियंका राय, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. शिवांक, एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके दास, डॉ. शरीफ, डैनी डेविड, अजीज समेत डॉक्टर व टेक्नीशियन थे।