उरई से हटाए गए एसपी राकेश शंकर निलंबित
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उरई में नाबालिग बहनों को अगवा कर हत्या किए जाने की गाज वहां से हटाए गए एसपी राकेश शंकर पर गिरी। सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है। डीजीपी ने मुख्यमंत्री से उनके निलंबन की सिफारिश की थी।
उरई के शहर कोतवाली क्षेत्र के रामनगर मोहला निवासी भूरे शुक्ला की पुत्री नीतू (17) व वैशाली (15) को 22 सितंबर की रात अगवा कर लिया गया था। बाद में उसकी हत्या कर दी गई। आरोप है कि कुठौंद निवासी गौरव चतुर्वेदी और उसके साथी दोनों बहनों को उठाकर ले गए थे।
शनिवार को दोनों बहनों के शव नून नदी में बोरे में बंद मिले। पुलिस ने इस मामले में ठीक से कार्रवाई नहीं की तो रविवार को लोग भड़क गए। उग्र भीड़ ने कोतवाली में घुसकर पुलिस वालों पर हमला बोल दिया।
जमकर पथराव किया और कोतवाली परिसर आग के हवाले कर दिया। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। आंसू गैस के गोले भी दागे गए।
तीन दरोगा सस्पेंड
सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री ने घटना की सूचना मिलते ही पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की और एसपी राकेश शंकर को रविवार को ही हटा दिया। तीन दरोगा सस्पेंड और कोतवाल लाइन हाजिर कर दिए गए। सूत्रों के अनुसार सोमवार को डीजीपी एएल बनर्जी ने मुख्यमंत्री को घटना की रिपोर्ट दी।
इसमें घटना के दौरान एसपी द्वारा ठीक से ड्यूटी न निभाने की बात कही गई। साथ ही प्रकरण की लापरवाह मॉनिटरिंग का जिम्मेदार माना। हटाए जाने से पहले एसपी द्वारा गैरजिम्मेदारी से दिए गए बयान को भी संज्ञान में लिया गया। एसपी ने बयान दिया था कि घर वालों को बेहोशी की दवा देकर दोनों बहनें फरार हो गई थीं।
हालांकि, पीड़ित परिवार उनके इस बयान सहमत नहीं थे। बताया जाता है कि डीजीपी ने शंकर को निलंबित करने की सिफारिश की थी जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी।
प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा ने बताया कि एसपी राकेश शंकर को निलंबित कर दिया गया है। उरई में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। सरकार कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ की इजाजत किसी को नहीं देगी।