अमर उजाला से बोले एसपी सिंह बघेल: करहल सपा का गढ़ होता तो अखिलेश यहां बार-बार क्यों आते
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विस्तार
करहल के समर को आप कैसा मानते हैं?
करहल की जनता का आशीर्वाद और समर्थन पूरी तरह मिल रहा है। पर, इससे घबराकर सपा के लोग अब गुंडई पर उतर आए हैं। दो दिन पहले हमारे प्रचार के लिए आई महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राज्यसभा सांसद गीता शाक्य पर हमला हुआ। मेरी हत्या करने के लिए मेरे काफिले पर हमला किया गया।
यहां से चुनाव लड़ने का निर्णय किसका था?
करहल सपा का गढ़ नहीं है, यहां से भाजपा ने भी चुनाव जीता है। पार्टी ने सपा अध्यक्ष के सामने चुनाव लड़ाने के योग्य समझा, इसके लिए नेतृत्व का आभारी हूं। यदि सपा का गढ़ होता, तो अखिलेश यादव को यहां बार-बार नहीं आना पड़ता। अखिलेश ही नहीं, शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव सहित पूरा सैफई कुनबा यहां ताकत लगा रहा है, हमें विश्वास है कि करहल में कमल खिलेगा। अखिलेश अपने पार्टी के प्रत्याशी से ज्यादा समय खुद की सीट पर दे रहे हैं। उन्होंने खुद सीट चुनी थी, यदि कोई खुद चुनाव जीतता है, तो वह चाहता है कि शांतिपूर्ण चुनाव हो, लेकिन सपा अब भय और आतंक से चुनाव जीतना चाहती है।
क्या दलित वोट बैंक भाजपा को मिल रहा है, खासतौर पर जाटव वोट?
दलित वोट बैंक भाजपा को ही मिल रहा है। करहल में बसपा प्रत्याशी जाटव हैं, लेकिन करहल का जाटव मतदाता समझ कर वोट दे रहा है कि सपा को कौन हरा सकता है। भाजपा ही सपा को हरा सकती है, इसलिए जाटव भाजपा को वोट दे रहे हैं। दलित मतदाता जानते हैं कि जब सपा की सरकार आती है, तो सबसे ज्यादा उत्पीड़न उन्हीं का ही होता है। मोदी-योगी सरकार की योजनाओं से दलित वर्ग के जीवन मे गुणात्मक सुधार आया है।
सपा के लोग आपके अनुसूचित जाति वर्ग के प्रमाण पत्र पर सवाल उठा रहे हैं?
उच्च न्यायालय ने मेरे अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को वैध ठहराया है। धनगर जाति से हूं, जो कि दलित वर्ग की जाति है। मुझे प्रत्याशी घोषित करने के बाद हमारा पूरा समाज भाजपा के पक्ष में लामबंद हो गया है। दो चरण में भाजपा को पिछले चुनाव से भी अच्छी जीत मिलेगी।
रालोद और सुभासपा से सपा के गठबंधन का पिछड़े वोट बैंक पर कितना असर होगा?
2017 में सपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ था। 2019 में बसपा और सपा का गठबंधन हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और भाजपा के टीम वर्क के आगे उनके गठबंधन फेल हुए। अब इन छोटे-छोटे गठबंधन का कोई असर नहीं होगा। जहां तक पिछड़े वोट बैंक की बात है, तो हमारे प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पिछड़े वर्ग से हैं। भाजपा ने ही दलित परिवार की सामान्य महिला बेबीरानी मौर्य को राज्यपाल बनाया था। पिछड़े वर्ग को लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधान परिषद में भाजपा ने जितना प्रतिनिधित्व दिया, उतना कभी किसी पार्टी ने नहीं दिया। चुनाव में 36 जातियों के वोट की आवश्यकता होती है, दो समाज के वोट से आप चुनाव नहीं जीत सकते हैं।
भाजपा के झूठ की उम्र पूरी हो चुकी, जनता अब सपा के सच के साथ : डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव पूर्व राज्यसभा सांसद, सपा
बुंदेलखंड भाजपा के मजबूत किलों में से एक माना जाता है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां के सभी 19 विधानसभा क्षेत्रों में भगवा परचम फहराया था। इसके बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भी क्षेत्र की चारों लोकसभा सीट भाजपा अपने पाले में करने में कामयाब रही थी। लेकिन, इस विधानसभा चुनाव में ज्यादातर सीटों पर भाजपा को सपा से मिल रही कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पिछले चुनाव में ऐसा क्या हुआ था, जो सपा रसातल में पहुंच गई थी, इस बार सपा की मजबूत कड़ी क्या है, इन सब सवालों को लेकर सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद और कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव से विकास सनाड्य ने बातें कीं। पेश हैं प्रमुख अंश...
2012 में पूर्ण बहुमत हासिल करने वाली सपा के 2017 में रसातल में पहुंचने के क्या कारण रहे?
विकास व जनकल्याणकारी योजनाओं के मामले में अखिलेश यादव की तुलना किसी से नहीं की जा सकती है। लेकिन, 2017 के चुनाव में सपा अखिलेश के कामों को लोगों तक सही ढंग से पहुंचा नहीं पाई थी। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद भाजपा ने 2017 में होने वाले यूपी के चुनाव पर नजरें जमा दी थीं। झूठ और फरेब के बूते एक माहौल तैयार किया था। काला धन वापस लाने का भरोसा देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए थे। किसानों से उनकी दशा संवारने और युवाओं को रोजगार देने का भरोसा दिया। योगी, केशव, मनोज सिन्हा, दिनेश शर्मा यानी अलग-अलग वर्गों के लोगों को मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया था। जनता बहकावे में आ गई और 2017 में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बना डाली। हालांकि, हार के बाद भी हमारा वोट प्रतिशत कम नहीं हुआ था। झूठ की उम्र ज्यादा लंबी नहीं होती है। यही वजह है कि माहौल सपा के पक्ष में बन गया है।
सपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का दावा कर रही है, इसका क्या आधार है?
आज स्थिति एकदम अलग है। पांच साल हमने लगातार काम किया। बूथ स्तर पर हमारा मजबूत संगठन तैयार है। 2017 के मुकाबले इस बार पार्टी के सभी लोग एक साथ एक मंच पर हैं। किसी में भी कोई मतभेद नहीं है। हमारा गठबंधन भी बड़े जनाधार वाले दलों से हुआ है। इसका बड़ा लाभ मिल रहा है। बीते दो चरणों के चुनाव में सपा गठबंधन ने एकतरफा बढ़त बनाई है। जनता अखिलेश और योगी के कार्यकाल की तुलना कर रही है, जिसमें अखिलेश आगे हैं। भाजपा के झूठे दावे और वादों की पोल भी खुल गई है। महंगाई से जनता त्रस्त है। योगी सरकार ने रोजगार देने की जगह छीनने का काम किया। जाति-धर्म में बांटने के सिवाय प्रदेश में पिछले पांच सालों में और कोई काम नहीं किया गया। अपराध का ग्राफ बहुत बढ़ा है।
भाजपा सपा पर गुंडे-माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाती है?
भाजपा सरकार में सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाएं हुई हैं। आईपीएस अधिकारी तक हत्या के आरोप में वांछित चल रहे हैं। दुष्कर्म की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं। महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। भाजपा सरकार खुलेआम अपराधियों को संरक्षण दे रही है। फर्जी एनकाउंटर कर एक जाति विशेष के लोगों को निशाना बनाया गया। अपराधियों को टिकट देने में भी भाजपा आगे है। मैं ये विश्वास दिलाता हूं कि सपा सरकार में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। सभी को समान रूप से सम्मान मिलेगा।