मिशन यूपी के लिए सपा के 169 प्रत्याशी लगभग तय
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समाजवादी पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। सबसे ज्यादा ध्यान उन 169 सीटों पर है, जहां सपा प्रत्याशी 2012 में चुनाव हार गए थे। कई दिनों तक चले साक्षात्कार के आधार पर चयन समिति ने इन सीटों पर संभावित प्रत्याशियों के पैनल तैयार कर लिए गए।
पूरी रिपोर्ट के साथ विधानसभा क्षेत्रवार पैनल में शामिल नामों की सूची एक-दो दिन में प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंप दी जाएगी।
सपा विधानसभा और लोकसभा चुनावों में प्रत्याशियों की घोषणा सबसे पहले करती रही है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों का चयन एक साल पहले कर लिया गया था। लगभग यही पैटर्न 2014 के लोकसभा चुनाव में आजमाया गया। हालांकि आखिरी दौर में कुछ उम्मीदवार बदल दिए गए थे।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए भी उम्मीदवारों का ऐलान चुनाव से काफी पहले करने की योजना है। सबसे पहले हारी हुई 169 सीटों पर प्रत्याशी तय किए जाएंगे।
इन सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के लिए प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने छह सदस्यीय समिति बनाई थी। समिति ने 23 जुलाई से 9 अगस्त के बीच प्रदेश मुख्यालय में टिकट के लगभग 1400 दावेदारों के साक्षात्कार लिए। साक्षात्कार के समय ही संभावित दावेदारों पर काफी हद तक सहमति बन गई थी। शेष नामों पर भी कवायद पूरी कर ली गई।
पांच हजार वोटों से कम से चुनाव हारे तो मिलेगा मौका
सूत्रों के मुताबिक कुछ सीटों पर पराजित प्रत्याशियों को ही फिर से चुनाव में उतारने की सिफारिश की गई है जबकि कुछ जगह नए चेहरे लाने पर विचार करने का सुझाव है। पांच हजार से कम वोटों से चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों में अधिकतर पर फिर भरोसा जताया जा सकता है।
चयन समिति के एक सदस्य ने सोमवार को बताया कि उन्होंने हर सीट पर संभावित प्रत्याशियों का पैनल तैयार कर लिया है। इसे जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष को सौंप दिया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि सपा साल के अंत तक हारी हुई सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर सकती है।
जीती सीटों पर रिस्क लेने के मूड में नहीं
भले ही सपा ने हारी हुई सीटों पर उम्मीदवार चुनने का पहला चरण पूरा कर लिया हो लेकिन वह 2012में जीती गई सीटों पर कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है। मौजूदा विधायकों की सीटों पर प्रत्याशी चयन विलंब से होगा। यदि इन सीटों पर उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए तो विधायकों में असंतोष पैदा हो सकता है।
इससे बचने के लिए लगभग एक साल तक मौजूदा सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर कसरत नहीं की जाएगी। सपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी कई मौजूदा विधायकों के टिकट बदलेगी। कुछ विधायक खुद भी दलबदल कर सकते हैं। ऐसे भी दो-चार विधायक हैं जो अपनी सीट बदलना चाहते हैं, लेकिन यह सब आखिरी दौर में होगा।