यूपी में 17 अति पिछड़ी जातियों को मिलेगा आरक्षण
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सूबे में 2017 के चुनावी संग्राम की तैयारियों में जुटी प्रदेश सरकार जातियों की गोलबंदी के लिए और आगे बढ़ गई है। देर से ही सही शासन ने ग्राम्य विकास विभाग की कई योजनाओं में 17 अति पिछड़ी जातियों को मात्रात्मक आरक्षण देने का आदेश जारी कर दिया है।
इससे इन जातियों के लाभार्थियों को निर्धारित योजनाओं में 7.5 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित हो गई है।
ग्राम्य विकास सचिव वी. हेकाली झिमोमी की तरफ से जारी आदेश में कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी और मछुआ को ग्राम्य विकास की योजनाओं में 7.5 प्रतिशत मात्रात्मक आरक्षण देने को कहा गया है।
पहले चरण में जिन योजनाओं में लाभ देने का फैसला किया गया है, उनमें लोहिया ग्रामीण आवास, हैंडपंप, ग्रामीण पेयजल योजना और अंबेडकर विशेष रोजगार योजना शामिल हैं। जल्द ही कुछ अन्य योजनाओं में भी इस फैसले को लागू किए जाने के संकेत हैं।
यहां देखें, यह है मामला
प्रदेश में सपा सरकार बनने के बाद पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इन 17 जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने की घोषणा की थी। सपा की पहल पर प्रदेश सरकार ने 3 मार्च 2014 को इन जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी। हालांकि केंद्र ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है।
यह है वजह
प्रदेश सरकार की कोशिश है कि यादव-मुस्लिम समीकरण के साथ अगर इन अति पिछड़ी जातियों का 15 प्रतिशत वोट भी सपा को मिल जाए तो 2017 में उसकी चुनावी सफलता की राह आसान हो जाएगी।
सरकार ने इस मुद्दे पर केंद्र का बहुत सकारात्मक रुख न देखते हुए पिछले वर्ष ही यहां इन जातियों को 7.5 प्रतिशत मात्रात्मक आरक्षण देने की घोषणा कर दी थी, पर लघु सिंचाई विभाग को छोड़कर ज्यादातर विभाग इस पर चुप्पी साध गए।
सूबे में चुनाव भले ही 2017 में हों, लेकिन अगले साल इसकी चहल-पहल निश्चित रूप से शुरू हो जाएगी। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने इन जातियों को अपने पाले में लामबंद कर वोटों की गणित दुरुस्त करने की कोशिश शुरू की है।