फिल्म 'पीके' को टैक्स फ्री करने पर अखिलेश ने दी सफाई
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आमिर खान की फिल्म ‘पीके’ को लेकर बढ़े विवाद के बीच सपा के प्रदेश प्रवक्ता और मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि इस फिल्म का विरोध करने वालों को भारतीय संस्कृति और धर्म की सतही जानकारी है। फिल्म में धर्म पर नहीं, ढोंगी बाबाओं पर चोट की गई है। ऐसे बाबा हमें अपने समाज में खूब दिखाई दे रहे हैं।
विहिप और बजरंग दल जैसे संघ परिवार के संगठनों के संरक्षण में ही धर्म के नाम पर ढोंगी बाबाओं का पाखंड बढ़ा है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को इस फिल्म को सूबे में टैक्स फ्री कर दिया है।
वहीं इस पर लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. रमेश दीक्षित का कहना है कि मैंने कल रात ‘पीके’ देखी। अच्छी पिक्चर है। इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जो विरोध किया जाए। अलबत्ता धर्म के नाम पर पाखंड करने वालों का पर्दाफाश किया गया है। यह अंधविश्वास के खिलाफ तार्किक ढंग से बनाई गई फिल्म है।
फिल्म में तपस्वी का किरदार कुछ वैसा ही है जैसा आशाराम बापू या धर्म के नाम पर पाखंड करने वाले दूसरे लोगों का होता है। प्रदेश सरकार ने इसे टैक्स फ्री करके कुछ तो अच्छा काम किया। फिल्म के मुख्य कलाकार आमिर मुस्लिम हैं, इसलिए संघ परिवार के कुछ संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। वे इसकी आड़ में तनाव पैदा करना चाहते हैं। यही उनका एजेंडा है।
हिंदू धर्म की छवि खराब करने की साजिश
जबकि बजरंग दल के पूर्व संयोजक व विहिप के मठ-मंदिर विभाग के संयोजक वेद प्रकाश सचान का कहना है कि मैने ‘पीके’ फिल्म तो नहीं देखी, लेकिन इसके बारे में पूरी जानकारी है। इसमें हिंदू धर्मस्थलों को घटिया तरीके से दिखाया गया है।
देवी, देवताओं का अपमान किया गया है। यह फिल्म हिंदू धर्म की छवि खराब करने की साजिश है। मुझे लगता है कि फिल्म बनाने में विदेशी पैसा लगा है।
विदेशी शक्तियां नहीं चाहतीं कि मोदी सरकार में देश में अमन-चैन रहे। उनका उद्देश्य साफ है, ऐसी फिल्म बनवाओ जिससे लोग आपस में लड़ें। प्रदेश सरकार ने ‘पीके’ को टैक्स फ्री किया तो आश्चर्य नहीं हुआ। सपा सरकार हिंदू विरोधी है, मुस्लिमों का तुष्टीकरण करती है।
इनका अपना एक अलग राग
इसी विषय पर वरिष्ठ रंगकर्मी और भारतेंदु नाट्य अकादमी के पूर्व निदेशक सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ का कहना है कि मैंने फिल्म देखी है। ईश्वर और धर्म के बारे में गलत व्याख्या को चुनौती देने वाली फिल्मों की समाज को जरूरत है। ‘पीके’ में इस विषय को चुना गया है। यह धर्म के नाम पर लालच और डर पर हमला करती है।
इन दोनों वजहों से न जाने लोग कहां भटक गए हैं। यूथ को दिशा देने वाली फिल्म है। इसे टैक्स फ्री करना सरकार का अच्छा कदम है।
टैक्स फ्री करने का मानक
उत्तर प्रदेश में फिल्मों को तीन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए टैक्स फ्री किया जाता है। फिल्म में शैक्षिक संदेश, लोकउपयोगी और इसमें कोई धार्मिक संदेश दिया गया हो। इसके आधार पर फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया जाता है जिससे इसे आम जनता देख सके।
फिल्मों को टैक्स फ्री करने के लिए उत्तर प्रदेश आमोद एवं पणकर अधिनियम 1979 की धारा 11 (1) में दी गई शक्तियों के आधार पर राज्यपाल से अनुमति लेने के बाद फिल्मों को टैक्स फ्री करने संबंधी आदेश जारी किया जाता है। फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा मुख्यमंत्री या फिर विभागीय मंत्री कर सकता है।