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आजम की 'नाक' बचाने को निकाला गया रास्ता

Wed, 22 Jan 2014 09:59 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 22 Jan 2014 09:59 AM IST
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soon GZB haj house issue to get solution

गाजियाबाद हज हाउस का मामला जल्दी सुलझने की उम्मीद है।

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शीघ्र ही नए प्रस्ताव पर सरकार मुहर लगा सकती है। इसके साथ ही वित्त विभाग भी इसके लिए पैसा जारी कर देगा।
 
गाजियाबाद हज हाउस अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री आजम खां के लिए नाक का सवाल बना हुआ था।

वित्त विभाग की आपत्तियों को दूर करने के लिए तोड़ निकाल लिया गया है। सरकार तीन सदस्यीय समिति बनाकर जांच की औपचारिकता पूरी करने के साथ ही इस मामले को हल करने जा रही है।

गाजियाबाद हज हाउस बनाने की घोषणा 2005 में हुई थी। उस समय 226 हाजियों के लिए 3.64 करोड़ रुपये से इसे बनना था।

सरकार ने दो करोड़ रुपये जारी भी कर दिए लेकिन हज हाउस की जमीन पर विवाद हो गया। बाद में न्यायालय ने स्टे दे दिया था।

इसके बाद मायावती सरकार आई और कोर्ट से केस जीतने के बाद 2010 में सरकार ने फिर 2.28 करोड़ रुपये जारी किए। इस बार जब फिर सपा सरकार बनी तो आजम खां को गाजियाबाद हज हाउस की याद आई।
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उन्होंने यहां पर एक बड़ा 1886 हाजियों के लिए हज हाउस बनाने का प्रस्ताव बनवा डाला। नया हज हाउस करीब 41.94 करोड़ रुपये से बनाया जाना है।

जब यह प्रस्ताव वित्त विभाग में गया तो वहां आपत्ति लग गई। वित्त विभाग ने पहले दिए गए 4.28 करोड़ रुपये का हिसाब मांग लिया।

चूंकि हज हाउस में कई सारी निर्माण एजेंसियां अलग-अलग समय में काम करा चुकी हैं, इसलिए पुराने हिसाब में हज समिति गड़बड़ा गई।

नए हज हाउस पर जब वित्त विभाग ने आपत्तियां लगाईं तो मंत्री आजम खां नाराज हो गए। उन्होंने मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को भी कड़ा पत्र लिख दिया। बाद में अल्पसंख्यक व वित्त विभाग के अधिकारियों को बुलाकर मुख्य सचिव ने मामला जल्दी हल कराने के निर्देश दिए।
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पुराने हज हाउस में जितना काम हुआ है उसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति बनी। इसमें लोक निर्माण विभाग के अभियंता, शासन व हज समिति के एक-एक प्रतिनिधि को रखा गया।

समिति बनाने का अनुमोदन खुद मुख्यमंत्री ने किया था।

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