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सोनभद्र में जमीन विवाद में हिंसा : राजस्व परिषद ने डीएम से तलब की रिपोर्ट

Fri, 19 Jul 2019 11:08 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 19 Jul 2019 11:08 AM IST
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sonbhadra violence in land dispute, revenue department asked dm for report
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
राजस्व परिषद ने सोनभद्र के जमीन विवाद में 10 लोगों की मौत के मामले में जिलाधिकारी से घटनाक्रम के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके अलावा शुक्रवार को प्रदेश भर के अपर जिलाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इसमें सोनभद्र जैसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए विशेष दिशानिर्देश देने की तैयारी है। 
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सूत्रों ने बताया कि परिषद के चेयरमैन प्रवीर कुमार ने बृहस्पतिवार को सुबह सोनभद्र के डीएम अंकित कुमार अग्रवाल से भूमि विवाद में 10 लोगों की मौत के संबंध में लंबी बात की। उन्होंने प्रकरण में स्थानीय प्रशासन की भूमिका की गहराई से पड़ताल करने और उसमें यदि राजस्व प्रशासन का कोई अधिकारी दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा जिलाधिकारी को यह भी देखने को कहा गया है कि यदि प्रकरण में भू राजस्व नियमों की किसी तरह की विसंगति सामने आई है तो उसके निराकरण के संबंध में प्रस्ताव उपलब्ध कराएं।
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कुमार ने रिपोर्ट मांगे जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि डीएम की रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। रिपोर्ट आने पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि चुनाव व अन्य वजहों से पिछले कई महीनों से एडीएम की मासिक बैठक नहीं हो पाई थी। पिछले महीने मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर ली थी, इसलिए एडीएम को अलग से नहीं बुलाया गया था। अब इस बैठक में राजस्व प्रशासन से जुड़े कार्यों व लंबित राजस्व वादों के निस्तारण पर चर्चा होगी।
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प्रशासन की लचर भूमिका व भू-राजस्व व्यवस्था की खामियां उजागर

सोनभद्र मामले में स्थानीय प्रशासन की भूमिका के साथ भू-राजस्व व्यवस्था की खामियां एक बार फिर उजागर हुई हैं। राजस्व विभाग के एक अधिकारी कहते हैं कि यह घटना बताती है कि लगातार सख्त निर्देशों के बावजूद स्थानीय प्रशासन भूमि विवाद के निस्तारण में अब भी लचर रवैया अख्तियार किए हुए है।

साथ ही यदि मामला किसी प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ा होता है तो वह आंखें मूंद लेने वाले भाव में आ जाता है। इसके अलावा यह बात भी बात भी सामने आ गई है कि राजस्व कानूनों की समीक्षा के बाद बनाई गई नई राजस्व संहिता भी पुराने विवादों के हल में अभी भी पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हो पा रही है। 

प्रदेश में पांच वर्ष से अधिक समय के 77 हजार मामले लंबित
प्रदेश में भूमि विवाद से जुड़े राजस्व वाद अभी भी बड़ी संख्या में लंबित हैं। परिषद ने पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित भूमि विवाद से जुड़े राजस्व वादों के निस्तारण की पड़ताल की तो पता चला कि 77,377 मामले निस्तारण के लिए लंबित पड़े हैं। बलिया जिले व लखनऊ मंडल की स्थिति सबसे खराब सामने आई है। इस मामले में मुजफफरनगर व हापुड़ जिले तथा मुरादाबाद मंडल सबसे अच्छा रहा है।

5 वर्ष से अधिक समय से लंबित मामले निस्तारण में टॉप अच्छे जिले

  • मुजफ्फरनगर/ हापुड़        01
  • रामपुर/मुरादाबाद        05
  • बदायूं/शामली            06
  • फिरोजाबाद            07
  • महोबा                09

सबसे खराब जिले
  • बलिया                9421
  • प्रतापगढ़            8436
  • अंबेडकरनगर            6072
  • गोंडा                5005
  • जौनपुर                4258

सबसे अच्छे मंडल

  • मुरादाबाद            00
  • कानपुर/ सहारनपुर        08
  • अलीगढ़            18

सबसे खराब मंडल
  • लखनऊ             10870
  • वाराणसी            8980
  • आगरा                8584
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