{"_id":"692b58be12469ee2950632fe","slug":"so-the-disabled-people-will-first-submit-an-application-then-they-will-get-basic-facilities-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1494920-2025-11-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: तो दिव्यांगजन पहले प्रार्थनापत्र देंगे, फिर मिलेंगी मूलभूत सुविधाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: तो दिव्यांगजन पहले प्रार्थनापत्र देंगे, फिर मिलेंगी मूलभूत सुविधाएं
Sun, 30 Nov 2025 02:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 30 Nov 2025 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। राजधानी के पारिवारिक न्यायालय कैसरबाग स्थित मध्यस्थता केंद्र (एडीआर) में आने वाले दिव्यांगजनों के लिए मानो अधिकारों की कोई जरूरत ही नहीं। यहां रैंप, लिफ्ट और दिव्यांग-हितैषी शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। ऊपर से अधिकारी कह रहे हैं कि जब तक दिव्यांगजन खुद प्रार्थनापत्र नहीं देंगे, तब तक सुविधाओं की मांग ही क्यों समझी जाए।
दिव्यांग पीड़िता जॉली मोहन के पत्र को भले ही आगे बढ़ा दिया गया हो, लेकिन अव्यवस्थाओं को दूर करने की गंभीरता कहीं दिखाई नहीं देती। हैरानी यह कि शौचालय जैसी जरूरी सुविधा के लिए भी आवेदन की मांग की जा रही है। शनिवार को एडीआर के सीनियर असिस्टेंट सीबू श्रीवास्तव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि महीने में एक-दो ही दिव्यांग आते हैं। ऊपर आने की जरूरत नहीं पड़ती, नीचे ही हस्ताक्षर करा लेते हैं। शौचालय के लिए किसी ने अभी तक प्रार्थनापत्र दिया ही नहीं। शिकायत आएगी तभी कार्रवाई होगी। स्थिति यह है कि केंद्र के पास दिव्यांगजनों का कोई डाटा तक नहीं। मतलब, कितने लोग रोजाना परेशानी झेल रहे हैं, इसका कोई हिसाब ही नहीं। पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से पूछा गया तो सभी ने चुप्पी साध ली।
शिकायत के बाद भी आधे-अधूरे इंतजाम
जॉली मोहन अब शौचालय के लिए भी प्रार्थनापत्र देने की तैयारी में हैं ताकि आगे किसी और को अपमान न झेलना पड़े। एडीआर का कहना है कि अब भूतल पर मध्यस्थता कक्ष बनाया जा रहा है लेकिन भूतल तक पहुंचने के लिए भी रैंप नहीं है। यानी व्हीलचेयर पर आने वाले दिव्यांगजन के लिए बाहर इंतजार करना ही नियति है।
विज्ञापन
मूलभूत सुविधा न होना निंदनीय
मध्यस्थता केंद्र में काम चल रहा है तो सुविधाएं भी उपलब्ध कराना जरूरी है। दिव्यांगजनों के लिए रैंप और शौचालय तक न होना निंदनीय है। सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है। हम चाहते हैं कि तुरंत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- दीनानाथ मिश्र, अधिवक्ता एवं महामंत्री, पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन
विज्ञापन
दिव्यांग पीड़िता जॉली मोहन के पत्र को भले ही आगे बढ़ा दिया गया हो, लेकिन अव्यवस्थाओं को दूर करने की गंभीरता कहीं दिखाई नहीं देती। हैरानी यह कि शौचालय जैसी जरूरी सुविधा के लिए भी आवेदन की मांग की जा रही है। शनिवार को एडीआर के सीनियर असिस्टेंट सीबू श्रीवास्तव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि महीने में एक-दो ही दिव्यांग आते हैं। ऊपर आने की जरूरत नहीं पड़ती, नीचे ही हस्ताक्षर करा लेते हैं। शौचालय के लिए किसी ने अभी तक प्रार्थनापत्र दिया ही नहीं। शिकायत आएगी तभी कार्रवाई होगी। स्थिति यह है कि केंद्र के पास दिव्यांगजनों का कोई डाटा तक नहीं। मतलब, कितने लोग रोजाना परेशानी झेल रहे हैं, इसका कोई हिसाब ही नहीं। पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से पूछा गया तो सभी ने चुप्पी साध ली।
विज्ञापन
शिकायत के बाद भी आधे-अधूरे इंतजाम
जॉली मोहन अब शौचालय के लिए भी प्रार्थनापत्र देने की तैयारी में हैं ताकि आगे किसी और को अपमान न झेलना पड़े। एडीआर का कहना है कि अब भूतल पर मध्यस्थता कक्ष बनाया जा रहा है लेकिन भूतल तक पहुंचने के लिए भी रैंप नहीं है। यानी व्हीलचेयर पर आने वाले दिव्यांगजन के लिए बाहर इंतजार करना ही नियति है।
विज्ञापन
मूलभूत सुविधा न होना निंदनीय
मध्यस्थता केंद्र में काम चल रहा है तो सुविधाएं भी उपलब्ध कराना जरूरी है। दिव्यांगजनों के लिए रैंप और शौचालय तक न होना निंदनीय है। सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है। हम चाहते हैं कि तुरंत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- दीनानाथ मिश्र, अधिवक्ता एवं महामंत्री, पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन