यूपी : स्मार्ट फोन खरीद में मंत्री व प्रमुख सचिव आमने-सामने, पीएमओ पहुंचा विवाद
पोषण मिशन के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खरीदे जा रहे स्मार्ट फोन के टेंडर का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने रिपोर्ट मांगी है।
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पोषण मिशन के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खरीदे जा रहे स्मार्ट फोन के लिए कराए जा रहे टेंडर में अनियमितता की शिकायत को लेकर विभागीय मंत्री व प्रमुख सचिव आमने-सामने आ गईं हैं। टेंडर से बाहर हुई एक कंपनी की शिकायत पर मंत्री द्वारा टेंडर रोकने को लेकर लिखे गए पत्र को दरकिनार कर टेंडर खोलने का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। शासन द्वारा टेंडर निरस्त न करके फाइनेंसियल बिड खोलने से नाराज मंत्री भी हर हाल में इस प्रक्रिया को रद्द कराने का रास्ता ढूंढ रही हैं। ऐसे में इस विवाद के अभी और गहराने के आसार दिख रहे हैं।
प्रदेश में पोषाहार वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन दिया जाना है। इसके माध्यम से पोषाहार वितरण, लाभार्थियों की संख्या, उनके स्वास्थ्य आदि गतिविधियों का ब्योरा तैयार किया जाना है।
कंपनी का दावा, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता
स्मार्ट फोन खरीद की प्रक्रिया से बाहर हुई फोन निर्माता कंपनी ‘लावा’ ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत की है। इस आधार पर महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाती सिंह ने विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी को पत्र लिखकर टेंडर निरस्त कर उसे फिर से अपलोड करने के निर्देश दिए थे। पर प्रमुख सचिव ने निर्देश नहीं माना।
टेंडर रद्द कराने पर मंत्री अडिग, आवंटन रुका
निदेशक राज्य पोषण मिशन कपिल सिंह ने भी शासन को रिपोर्ट भेज दी है कि टेंडर प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं बरती गई। मंत्री द्वारा उठाए गए बिंदु निराधार हैं। अपने ही मातहतों द्वारा निर्देशों की अनदेखी से नाराज मंत्री अब टेंडर निरस्त कराने पर अड़ गई हैं। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने टेंडर निरस्त करने के लिए फिर से प्रमुख सचिव व निदेशक से मौखिक रूप से बात की है। लेकिन विभाग ने टेक्निकल बिड के बाद अब फाइनेंशियल बिड भी खोल दिया है। हालांकि मंत्री के दबाव में ही अभी तक किसी कंपनी को टेंडर आवंटित नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी मांगी रिपोर्ट
सूत्रों का कहना है कि मोबाइल कंपनी की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले कंपनी ने पीएमओ और नीति आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई है।