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जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे स्मार्ट मीटर, कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की मांग
Sat, 19 Sep 2020 12:19 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 19 Sep 2020 12:19 PM IST
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भार जंपिंग मामले में जांच के लिए सेंटर पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) भेजे गए स्मार्ट मीटर मानकों पर खरे नहीं पाए गए हैं। सीपीआरआई की ओर से पावर कॉर्पोरेशन को मिली जांच रिपोर्ट में ज्यादातर नमूने स्मार्ट मीटर मुख्य पैरामीटर में ही फेल हो गए हैं। वहीं कुछ मीटरों की रिपोर्ट पहले ही आ जाने के बावजूद उसे दबाए रखने वाले अभियंताओं पर भी शिकंजा कस रहा है।
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पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने इस पर संबंधित अभियंताओं से जवाब-तलब करते हुए पूरी रिपार्ट मांगी है। उधर, करीब नौ महीने पहले इस मामले की शिकायत करने वाले राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने स्मार्ट मीटरों की गहन जांच कराने और निर्माता कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की है। सीपीआरआई की जांच में स्मार्ट मीटर की तकनीक मानकों पर खरी नहीं उतरी है।
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आशंका जताई जा रही है कि जब इन मीटरों में भार जंपिंग हो सकती है तो मीटर रीडिंग भी जंप कर सकती है। ऐसे में इसकी जांच कराई जानी चाहिए। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा करीब नौ महीने पहले स्मार्ट मीटरों में भार जंपिंग का मामला सामने आने के बाद ऊर्जा मंत्री से शिकायत की गई थी। 4518 स्मार्ट मीटरों का भार तीन गुना से भी ज्यादा जंप कर गया था, जिस पर ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर पावर कॉर्पोरेशन ने चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी।
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जवाबदेही तय करने के लिए पूरी रिपोर्ट तलब की
कमेटी ने शुरुआती जांच के बाद सभी बिजली कंपनियों से स्मार्ट मीटर के नमूने लेकर सीपीआरआई के पास जांच के लिए भेजा था। पहले तो कोरोना की आड़ लेकर काफी दिनों तक जांच लंबित रखी गई। बाद में पता चला कि सीपीआरआई ने बिजली कंपनियों को जांच रिपोर्ट भेज दी है।
इसके बाद उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री व पावर कॉर्पोरेशन के उच्चाधिकारियों से फिर शिकायत की तो दबी जांच रिपोर्ट का खुलासा हुआ। गर्दन फंसती देख अभी तक जांच रिपोर्ट दबाए रखने वाले अभियंता सफाई दे रहे हैं कि जांच रिपोर्ट गुम हो गई थी। पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए रिपोर्ट गायब करने और दबाए रखने वाले अभियंताओं की जवाबदेही तय करने के लिए पूरी रिपोर्ट तलब की है।
इसके बाद उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री व पावर कॉर्पोरेशन के उच्चाधिकारियों से फिर शिकायत की तो दबी जांच रिपोर्ट का खुलासा हुआ। गर्दन फंसती देख अभी तक जांच रिपोर्ट दबाए रखने वाले अभियंता सफाई दे रहे हैं कि जांच रिपोर्ट गुम हो गई थी। पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए रिपोर्ट गायब करने और दबाए रखने वाले अभियंताओं की जवाबदेही तय करने के लिए पूरी रिपोर्ट तलब की है।