कोरोना से जिंदगी सहमी जरूर थी। भय से ठहरी भी थी। पर, अनलॉक के बाद धीरे-धीरे लोगों ने डर को जीत लिया। वक्त के साथ सोच बदली। जिंदगी फिर पटरी पर है। सरपट। अपनी ही धुन में। अपने ही रंग में। वो भी तब जब कोरोना की भी गति तेज है। बदलाव जरूर आए। परिस्थितियों से दो-दो हाथ करने के लिए बदलाव तो करने ही पड़ते हैं। कोरोना काल के छह महीने 24 सितंबर को पूरे हो जाएंगे। इन छह महीनों में ठहराव के पड़ाव को पार कर जिंदगी ने कैसे रफ्तार पकड़ी, हमारी जिजीविषा कैसे चीजों को बदल रही है, इन सबको दर्शाती खास रिपोर्ट...।
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लॉक-अनलॉक के छह महीने: अपनी ही धुन में जिंदगी फिर पटरी पर, बढ़ते संक्रमण में भी भर रही रफ्तार, तस्वीरें
Thu, 24 Sep 2020 04:43 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 24 Sep 2020 04:43 PM IST
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हजरतगंज बाजार
- फोटो : amar ujala
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बाजारों में लौटी रौनक
- फोटो : amar ujala
लखनऊ में छह माह पहले लॉकडाउन से थमी जिंदगी ने अब रफ्तार भर ली है। स्थितियां सामान्य दिनों जैसी तो नहीं हुईं, लेकिन अनलॉक-3 के मुकाबले 4 में शहर में आवागमन चार गुना बढ़ गया है। परिवहन निगम की बसों का 90 फीसदी बेड़ा भी सड़कों पर उतर चुका है। ट्रेनें जरूर अभी काफी कम हैं, लेकिन व्यस्त रूटों पर इनकी संख्या भी बढ़ रही है। एक से दूसरे शहर के लिए आवागमन बढ़ा है और करीब 80 फीसदी तक गाड़ियां हाईवे पर दौड़ने लगी हैं। बाजार खुल गए हैं और लोग भी खरीदारी को पहुंच रहे हैं। अधिकमास के बाद शुरू हो रहे नवरात्र और आ रही सहालग से लोग उत्साहित हैं। सांस्कृतिक आयोजनों की अनुमति मिलने से संस्कृतिकर्मियों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, शैक्षिक संस्थान, सिनेमाघर खुलने का इंतजार है। होटल, रेस्टोरेंट भी गुलजार नहीं हो सके हैं, पर सबको उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जिंदगी पूरी रौ में होगी। लॉक-अनलॉक के छह माह पूरे होने पर आइए जानते हैं कि कैसे सब कुछ थमने के बाद पटरी पर लौट रहा है।
सड़कों पर वाहनों की लंबी कतार
- फोटो : amar ujala
यातायात: सड़कों पर चार गुना बढ़े वाहन
कहने को तो अभी सड़कों पर कोरोना काल से पहले जैसी वाहनों की भीड़ भले ही न दिख रही हो, लेकिन अनलॉक-3 से तुलना करें तो चार गुना अधिक आवागमन बढ़ा है। राजधानी की सड़कों पर सामान्य दिनों में एक दिन में औसतन तीन से चार लाख गाड़ियां दौड़ती थीं, लेकिन लॉकडाउन में यह आंकड़ा करीब एक प्रतिशत रह गया था। अनलॉक-2 में सख्ती होने से कम लोग ही निकल रहे थे, लेकिन अनलॉक-3 में वाहन खुलेआम फर्राटे भरते नजर आए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक धीरे-धीरे औसतन प्रतिदिन 80 हजार से डेढ़ लाख वाहन सड़कों पर निकलने का अनुमान था, लेकिन यह आंकड़ा अनलॉक-चार में करीब तीन लाख के आसपास पहुंच गया। माना जा रहा है कि इस दौरान सरकारी दफ्तरों में काम ने रफ्तार पकड़ी तो सड़कों पर वाहनों का दबाव भी बढ़ा। अब हजरतगंज जैसे व्यस्त मार्गों में रेड लाइट पर वाहनों की कतार लंबी होने लगी है।
फैक्ट फाइल
सामान्य दिनों में प्रतिदिन तीन से चार लाख गाड़ियां दौड़ती थीं
लॉकडाउन होने पर एक प्रतिशत रह गया था यह आंकड़ा
अनलॉक चार में करीब तीन लाख के आसपास पहुंची संख्या
कहने को तो अभी सड़कों पर कोरोना काल से पहले जैसी वाहनों की भीड़ भले ही न दिख रही हो, लेकिन अनलॉक-3 से तुलना करें तो चार गुना अधिक आवागमन बढ़ा है। राजधानी की सड़कों पर सामान्य दिनों में एक दिन में औसतन तीन से चार लाख गाड़ियां दौड़ती थीं, लेकिन लॉकडाउन में यह आंकड़ा करीब एक प्रतिशत रह गया था। अनलॉक-2 में सख्ती होने से कम लोग ही निकल रहे थे, लेकिन अनलॉक-3 में वाहन खुलेआम फर्राटे भरते नजर आए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक धीरे-धीरे औसतन प्रतिदिन 80 हजार से डेढ़ लाख वाहन सड़कों पर निकलने का अनुमान था, लेकिन यह आंकड़ा अनलॉक-चार में करीब तीन लाख के आसपास पहुंच गया। माना जा रहा है कि इस दौरान सरकारी दफ्तरों में काम ने रफ्तार पकड़ी तो सड़कों पर वाहनों का दबाव भी बढ़ा। अब हजरतगंज जैसे व्यस्त मार्गों में रेड लाइट पर वाहनों की कतार लंबी होने लगी है।
फैक्ट फाइल
सामान्य दिनों में प्रतिदिन तीन से चार लाख गाड़ियां दौड़ती थीं
लॉकडाउन होने पर एक प्रतिशत रह गया था यह आंकड़ा
अनलॉक चार में करीब तीन लाख के आसपास पहुंची संख्या
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स्टेशन पर यात्रीगण
- फोटो : amar ujala
रेलवे: 16 ट्रेनें शुरू हुईं लखनऊ से, क्लोन ट्रेनें भी बढ़ीं
सड़क परिवहन की तुलना में ट्रेनों का संचालन बहुत धीमा है। रेलवे ज्यादातर डिमांड वाले रूटों पर ही ट्रेन चलवा रहा है। इसी रफ्तार में ट्रेनों में सफर करने की झिझक भी टूट रही है। लखनऊ से सामान्य दिनों में 282 ट्रेनें रोजाना चारबाग व जंक्शन पर आती-जाती थीं। 1,75,000 यात्रियों का इनसे आवागमन होता था। लॉकडाउन के बाद शुरुआत में लखनऊ से पुष्पक, लखनऊ मेल व गोमती एक्सप्रेस सहित कुल 18 ट्रेनें चल रही थीं। करीब 12 से 15 हजार यात्री रोजाना सफर करते थे, लेकिन अब संख्या बढ़ी है। अनलॉक-4 में 12 सितंबर से शताब्दी, एसी स्पेशल, हमसफर सहित 16 ट्रेनें लखनऊ से चलनी शुरू हो चुकी हैं। इनसे 20 से 25 हजार यात्रियों का आगमन होता है। यही नहीं 10 क्लोन स्पेशल ट्रेनें भी 21 सितंबर से चलनी शुरू हुई हैं। इनसे औसतन 6000 यात्री रोजाना सफर कर रहे हैं।
फैक्ट फाइल
सामान्य दिनों में 282 ट्रेनें रोजाना आती-जाती थीं, 1,75,000 यात्री करते थे सफर
लॉकडाउन के बाद 18 ट्रेनों का शुरू हुआ संचालन, 12 से 15 हजार यात्री चले
अब 16 ट्रेनें चल रही हैं लखनऊ से, 20 से 25 हजार लोग कर रहे हैं यात्रा
सड़क परिवहन की तुलना में ट्रेनों का संचालन बहुत धीमा है। रेलवे ज्यादातर डिमांड वाले रूटों पर ही ट्रेन चलवा रहा है। इसी रफ्तार में ट्रेनों में सफर करने की झिझक भी टूट रही है। लखनऊ से सामान्य दिनों में 282 ट्रेनें रोजाना चारबाग व जंक्शन पर आती-जाती थीं। 1,75,000 यात्रियों का इनसे आवागमन होता था। लॉकडाउन के बाद शुरुआत में लखनऊ से पुष्पक, लखनऊ मेल व गोमती एक्सप्रेस सहित कुल 18 ट्रेनें चल रही थीं। करीब 12 से 15 हजार यात्री रोजाना सफर करते थे, लेकिन अब संख्या बढ़ी है। अनलॉक-4 में 12 सितंबर से शताब्दी, एसी स्पेशल, हमसफर सहित 16 ट्रेनें लखनऊ से चलनी शुरू हो चुकी हैं। इनसे 20 से 25 हजार यात्रियों का आगमन होता है। यही नहीं 10 क्लोन स्पेशल ट्रेनें भी 21 सितंबर से चलनी शुरू हुई हैं। इनसे औसतन 6000 यात्री रोजाना सफर कर रहे हैं।
फैक्ट फाइल
सामान्य दिनों में 282 ट्रेनें रोजाना आती-जाती थीं, 1,75,000 यात्री करते थे सफर
लॉकडाउन के बाद 18 ट्रेनों का शुरू हुआ संचालन, 12 से 15 हजार यात्री चले
अब 16 ट्रेनें चल रही हैं लखनऊ से, 20 से 25 हजार लोग कर रहे हैं यात्रा
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आलमबाग बस टर्मिनल
- फोटो : amar ujala
परिवहन
24,00,000 तक यात्री कर सकते हैं अनलॉक-4 में सफर
अनलॉक होती जिंदगी में आम जन ने भी संक्रमण का मुकाबला करते हुए सफर शुरू किया। बात परिवहन निगम की करें तो लखनऊ में अनलॉक-3 यानी अगस्त की 1 से 15 तारीख के मुकाबले अनलॉक-4 में 15 सितंबर तक बस में सफर करने वालों की संख्या ढाई लाख तक बढ़ गई। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक पिछले माह के मुकाबले पांच लाख अधिक यात्री सफर करने लगेंगे। सामान्य दिनों में राजधानी से रोजाना 700 बसों का संचालन होता था। लॉकडाउन में बसें बंद हुईं। अब पुरानी रौ में लौटते हुए 600 बसें रोजाना चल रही हैं। लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके बोस ने बताया कि अगस्त में लगभग 19 लाख यात्रियों ने बसों में सफर किया था। सितंबर में 15 तारीख तक ही 12,40,745 यात्री सफर कर चुके हैं। ऐसे में 16 से 30 सितंबर तक यह संख्या 24 लाख से अधिक होने की उम्मीद है।
75% तक पहुंचा ऑटो का संचालन
लखनऊ ऑटो रिक्शा थ्री व्हीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज दीक्षित ने बताया कि अगस्त के मुकाबले सितंबर में ऑटो और टेंपो का संचालन 75% तक पहुंचा है। लॉकडाउन से पहले रोजाना 5000 ऑटो और 3000 टेंपो सवारियां ढो रही थीं। अनलॉक शुरू होने के बाद 5000 ऑटो में से अगस्त में 2500 दौड़ने लगे। सितंबर में 3750 का संचालन हो रहा है। इसी प्रकार 3000 टेंपो में से अगस्त में 1500 का संचालन हुआ और अब 2250 टेंपो सवारी ढो रहे हैं। हालांकि, ऑटो और टेम्पो को लॉकडाउन से पहले की तरह सवारियां नहीं मिल रही हैं। खास तौर पर लोग टेंपो में बैठने से परहेज कर रहे हैं।
24,00,000 तक यात्री कर सकते हैं अनलॉक-4 में सफर
अनलॉक होती जिंदगी में आम जन ने भी संक्रमण का मुकाबला करते हुए सफर शुरू किया। बात परिवहन निगम की करें तो लखनऊ में अनलॉक-3 यानी अगस्त की 1 से 15 तारीख के मुकाबले अनलॉक-4 में 15 सितंबर तक बस में सफर करने वालों की संख्या ढाई लाख तक बढ़ गई। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक पिछले माह के मुकाबले पांच लाख अधिक यात्री सफर करने लगेंगे। सामान्य दिनों में राजधानी से रोजाना 700 बसों का संचालन होता था। लॉकडाउन में बसें बंद हुईं। अब पुरानी रौ में लौटते हुए 600 बसें रोजाना चल रही हैं। लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके बोस ने बताया कि अगस्त में लगभग 19 लाख यात्रियों ने बसों में सफर किया था। सितंबर में 15 तारीख तक ही 12,40,745 यात्री सफर कर चुके हैं। ऐसे में 16 से 30 सितंबर तक यह संख्या 24 लाख से अधिक होने की उम्मीद है।
75% तक पहुंचा ऑटो का संचालन
लखनऊ ऑटो रिक्शा थ्री व्हीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज दीक्षित ने बताया कि अगस्त के मुकाबले सितंबर में ऑटो और टेंपो का संचालन 75% तक पहुंचा है। लॉकडाउन से पहले रोजाना 5000 ऑटो और 3000 टेंपो सवारियां ढो रही थीं। अनलॉक शुरू होने के बाद 5000 ऑटो में से अगस्त में 2500 दौड़ने लगे। सितंबर में 3750 का संचालन हो रहा है। इसी प्रकार 3000 टेंपो में से अगस्त में 1500 का संचालन हुआ और अब 2250 टेंपो सवारी ढो रहे हैं। हालांकि, ऑटो और टेम्पो को लॉकडाउन से पहले की तरह सवारियां नहीं मिल रही हैं। खास तौर पर लोग टेंपो में बैठने से परहेज कर रहे हैं।