अब नहीं बच पाएगा ये सरकारी 'दामाद'
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नोएडा के पूर्व मुख्य अभियंता यादव सिंह पर अब एसआईटी का शिकंजा कसेगा। काले धन की जांच के लिए बना विशेष जांच दल (एसआईटी) अब सिंह के विदेश में जमा धन के बारे में पता करेगा। पीएमओ खुद इस मामले पर पैनी निगाह रखे हुए है।
शनिवार को एसआईटी के अध्यक्ष एमबी शाह और उपाध्यक्ष अरिजीत पसायत ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की अध्यक्ष अनीता कपूर के साथ बैठक कर यादव सिंह के मामले में सीबीडीटी की ओर से की जा रही जांच का जायजा लिया।
एसआईटी ने अनीता कपूर को यादव सिंह और उससे जुड़े लोगों की तलाशी, बरामदगी और बाकी दूसरी कार्रवाइयों पर पूरी निगरानी रखने और सारी जानकारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को देने के लिए कहा है। एसआईटी के निर्देश पर लखनऊ सीबीडीटी ने भी विशेष जांच दल का गठन किया है।
आयकर महानिदेशक (जांच) कृष्णा सैनी इस एसआईटी का नेतृत्व करेंगे। सीबीडीटी ने उन्हें यादव सिंह के काले कारनामों की तह तक जांच कर रिपोर्ट मुहैया कराने को कहा है।
काले धन पर गठित एसआईटी ने खुद यादव सिंह के मामले में संज्ञान लिया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक इस मामले में जांच कर रहे लखनऊ सीबीडीटी के महानिदेशक को कहा गया है कि वह यादव से जुड़े मामले की पूरी जानकारी ईडी के निदेशक को भी दें।
ईडी को जानकारी देने से यादव से जुड़े कथित मनी लांड्रिंग मामलों का पता लगाने में आसानी होगी। ईडी यादव सिंह के खिलाफ मनी लॉड्रिंग रोकथाम कानून के तहत केस भी दर्ज कर सकता है।
छह कंपनियों का कारोबार पांच हजार करोड़
आयकर विभाग की अब तक की जांच से पता चला है कि यादव सिंह की छह कंपनियों का कारोबारी टर्नओवर पांच हजार करोड़ रुपये का है। यादव सिंह की कंपनियों हिचकी क्रिएशन, कुसुम गार्मेंट्स, क्विक इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, केएस अल्टा टेक, चाहत टेक एवं न्यू इरा सॉफ्टवेयर की निदेशक उनकी पत्नी कुसुमलता हैं।
सूत्रों के मुताबिक यादव सिंह ने चार साल में 320 से अधिक कीमती प्लॉट, बड़े ग्रुप हाउसिंग, शैक्षिक संस्थान और कॉमर्शियल प्लॉट पत्नी की 40 कंपनियों को आवंटित कर दिया और फिर इन्हें ऊंची कीमतों पर दूसरी कंपनियों को बेच दिया। प्लॉट सहित कंपनियों को खरीदने वालों ने भी काली कमाई का इस्तेमाल किया।
दोगुनी कीमत में बिके प्लॉट
यादव सिंह की पत्नी कुसुम लता की कंपनियों की ओर से 320 प्लॉट हथियाने का खुलासा हुआ है। एक प्लॉट की न्यूनतम कीमत ढाई करोड़ और अधिकतम 10 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यादव सिंह सिंडीकेट ने इन प्लॉट को दोगुनी कीमत पर बेच कर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया।
नोएडा अथॉरिटी ने साल 2011-12 में कुल 319 प्लॉट आवंटित किए, जिनमें 31 प्लॉट यादव सिंह सिंडीकेट के खाते में आए। आयकर विभाग के सूत्र बताते हैं कि ये प्लॉट 5 से 20 करोड़ रुपये में बिके हैं।
प्राधिकरण ने आईटी को भेजी रिपोर्ट
यादव सिंह के मुख्य अभियंता बनने से लेकर अब तक की रिपोर्ट प्राधिकरण ने तैयार कर ली है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार शाम यह रिपोर्ट आयकर विभाग को भेज दी गई।
पिछले सप्ताह आयकर की इन्वेस्टिगेशन विंग ने तीनों प्राधिकरणों को पत्र लिखकर जानकारी मांगी थी। इसके तहत यादव सिंह की नियुक्ति से लेकर जिन ठेकेदारों को टेंडर दिए गए उनका विवरण, टेंडरों की राशि से लेकर काम का ब्योरा तक देने को कहा था।
अनुमान है कि मुख्य अनुरक्षण अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता के पद पर रहने तक छोटे-बड़े करीब 10 हजार टेंडर जारी किए गए हैं। मौजूदा समय में तैनात प्राधिकरण के अधिकारी इस बात को लेकर परेशान हैं कि जो भी फाइल देखी, उसमें यादव सिंह ही नजर आए। कई फाइलें तो ऐसी भी हैं जिनमें कागजी औपचारिकता भी पूरी नहीं की गई है।
मालूम हो कि 27 नवंबर को जब यादव सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था। इसके लिए आईटी ने प्राधिकरण को पत्र लिखकर पूरी जानकारी मांगी थी। जैसे ही पत्र प्राधिकरण को मिला था, उसके बाद एक टीम गठित कर दी गई थी।
उस टीम ने पुराने कागजातों को खंगाल कर तीन दिन के अंदर रिपोर्ट तैयार कराई और आईटी को भेज दी। आईटी विभाग के विशेषज्ञ टेंडरों की कीमतों का आकलन करके देखेंगे कि कितना पैसा यादव सिंह ने कमाया और विभाग को कितना नुकसान पहुंचाया।