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मृत भाई के लिए बहन खा रही है दर-दर की ठोकरें, जानें क्या है वजह
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 08 Dec 2017 01:39 PM IST
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अंजू मिश्रा
- फोटो : amar ujala
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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (बीबीएयू) में इतिहास विभाग के शोध छात्र शैलेश त्रिपाठी की आकस्मिक मृत्यु के बाद उसकी पीएचडी प्रकाशन के लिए बहन अंजू मिश्रा दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। बृहस्पतिवार को अंजू दिन भर विवि के गेट के पास धरने पर बैठी रहीं, लेकिन विवि प्रशासन का कोई अधिकारी उनसे मिलने तक नहीं पहुंचा।
अंजू ने बताया कि पिछले साल मार्च में शैलेश की मृत्यु हो गई। उसका इतिहास विभाग में नियो बुद्धिज्म पर शोध पूरा हुआ था। किंतु उसका प्रकाशन होना बाकी है। इसके लिए उन्होंने जनवरी में विवि प्रशासन को पत्र दिया और विभागाध्यक्ष से मुलाकात भी की। तीन बार के पत्राचार के बाद भी विवि ने कोई जवाब नहीं दिया।
कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने भी मिलने का समय नहीं दिया। आरटीआई लगाई तो इसमें भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसे लेकर प्रथम अपील की है। वहीं इस बारे में रजिस्ट्रार प्रो. आरबी राम ने कहा कि विवि ने इस मामले में निर्णय के लिए एक कमेटी बनाई थी।
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जिसमें बाहरी एक्सपर्ट भी शामिल किए थे। उनका समय न मिल पाने के कारण इस पर निर्णय नहीं हो सका। बृहस्पतिवार को ही कमेटी की बैठक हुई है। कमेटी की रिपोर्ट कुलपति के सामने रखी जाएगी। इसके आधार पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
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अंजू ने बताया कि पिछले साल मार्च में शैलेश की मृत्यु हो गई। उसका इतिहास विभाग में नियो बुद्धिज्म पर शोध पूरा हुआ था। किंतु उसका प्रकाशन होना बाकी है। इसके लिए उन्होंने जनवरी में विवि प्रशासन को पत्र दिया और विभागाध्यक्ष से मुलाकात भी की। तीन बार के पत्राचार के बाद भी विवि ने कोई जवाब नहीं दिया।
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कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने भी मिलने का समय नहीं दिया। आरटीआई लगाई तो इसमें भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसे लेकर प्रथम अपील की है। वहीं इस बारे में रजिस्ट्रार प्रो. आरबी राम ने कहा कि विवि ने इस मामले में निर्णय के लिए एक कमेटी बनाई थी।
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जिसमें बाहरी एक्सपर्ट भी शामिल किए थे। उनका समय न मिल पाने के कारण इस पर निर्णय नहीं हो सका। बृहस्पतिवार को ही कमेटी की बैठक हुई है। कमेटी की रिपोर्ट कुलपति के सामने रखी जाएगी। इसके आधार पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।