अखिलेश देंगे मोदी को पाई-पाई का हिसाब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश कर जहां एक उपलब्धि हासिल की है वहीं इस बजट से उसकी जवाबदेही भी बढ़ गई है।
अब राज्य सरकार को केंद्र से मिलने वाली रकम के पाई-पाई का हिसाब देना होगा। अब तक वह इससे बचने के बहाने बना लिया करती थी।
बताते चलें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2014-15 के लिए 2,74,704.59 करोड़ का जो भारी-भरकम बजट पेश किया, उसमें बड़ी हिस्सेदारी केंद्रीय योजनाओं से मिलने वाले रकम की है। बजट में पिछले वर्ष से 24 फीसदी वृद्धि में इस रकम का बड़ा योगदान है।
अब जिम्मेदारी से बचना होगा मुश्किल
जानकार बताते हैं कि अब तक केंद्र सरकार ग्राम्य विकास, सर्वशिक्षा अभियान और एनआरएचएम जैसी योजनाओं का बजट सीधे जिला या मंडल स्तर पर जिम्मेदार प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को जारी करती थीं।
राज्य सरकार अपना हिस्सा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेती थी।
इसका नतीजा ये होता था कि इन योजनाओं में केंद्र से मिलने वाले करीब 25 हजार करोड़ रुपये न तो राज्य सरकार के खाते में आता था और न ही राज्य विधायिका को ही इसके खर्च के बारे में कोई जानकारी हो पाती थी।
केंद्र जब इस बारे में सूचना मांगता तो राज्य सरकार अपने हिस्से का ब्यौरा देकर बाकी जिम्मेदारी से बच लेती थी।
इसलिए बढ़ी जिम्मेदारी
वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बार केंद्र ने विभिन्न योजनाओं के जरिये भेजी जाने वाली रकम भी प्रदेश को भेजने का प्रावधान कर दिया।
प्रदेश सरकार ने बदले दिशानिर्देश के अनुसार यह रकम भी बजट में शामिल कर ली। अब विधायिका से पास रकम ट्रेजरी के जरिये जिलों तक पहुंचेगी। इससे इस रकम पर भी विधायिका का पूर्ण नियंत्रण हो गया।
अब वह जारी की जाने वाली और खर्च हुई राशि पर पूरी नजर रख सकेगी। समय-समय पर इसके खर्च का लेखा-जोखा विधानमंडल के सामने पेश करना होगा।
ट्रेजरी से भुगतान की वजह से महालेखाकार से ऑडिट होती रहेगी जिससे अनियमितताओं पर अंकुश रहेगा। इससे सरकार की जवाबदेही भी बढ़ गई है। अब उसे एक-एक पाई के खर्च का केंद्र को हिसाब देना होगा।