पैरों की मसाज और प्वॉइंटेड शूज से हो सकती है ये बड़ी समस्या
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इन दिनों पूरी की पूरी जनरेशन पॉइंटेड शूज पहनने लगी है। ये इतने टाइट हैं कि खून का बहाव रोकते हैं। इसी तरह बिछिया पहनना सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, लेकिन ये दोनों ही चीजें साइलेंट किलर कही जाने वाली मधुमेह की बीमारी में घातक साबित होता है।
इन दिनों मधुमेह रोगियों में पैरों में अल्सर के मामले सामने आ रहे हैं, जिसका परिणाम यह हो रहा है कि पैर काटना तक पड़ रहा है। ऐसे में पॉइंटेड शूज, बिछिया से बचना और घाव का प्रबंधन ही डायबिटिक फुट में फायदेमंद साबित होगा।
यह कहना है मुंबई के जेजे अस्पताल प्रो. मिलिंद रुके का। वह बृहस्पतिवार से राजधानी लखनऊ में शुरू हुए रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया के अधिवेशन में ‘फुट एंप्युटेशन’ के बारे में बता रहे थे।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजितप्री-कांग्रेस और कॉरपोरेट सिंपोजिया में अमेरिका से डॉ. वुकिच, इंग्लैंड से डॉ. एंड्रयू बोल्टन और तंजानिया से डॉ. जेडजी अब्बास ने भी इस बारे में कई अहम जानकारियां दीं।
प्रमुख वक्ता प्रोफेसर मिलिंद ने सबसे पहले चिकित्सकों से सवाल किया कि वे डायबिटिक फुट होने पर अंग विच्छेदन में क्यों भेज रहे हैं, जबकि उनके घावों का बेहतर प्रबंधन करते हुए इसे रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पैरों में अल्सर होने और व्यक्ति के डायबिटीक मिलने पर इस बात की संभावना छह में से एक है कि उसका पैर काटना होगा। इन मामलों को कम किया जा सकता है। प्रो. मिलिंद ने कहा कि वास्तविकता में ऐसा हो नहीं रहा है।
मसाज की आदत भी खतरनाक
खासतौर से सरकारी अस्पतालों में अंग विच्छेदन को ही सही विकल्प माना जा रहा है, जबकि यह आखिरी विकल्प होना चाहिए। वहीं उन्होंने पॉइंटेड शूज व बिछिया से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया।
प्रो. मिलिंद ने भारतीयों की मसाज करने की आदत को भी डायबिटीज में खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि हमारी त्वचा की ऊपरी सतह पर जोर से किया गया मसाज डर्मिटाइटिस को नुकसान पहुंचा सकता है। मधुमेह रोगियों को अक्सर पैर पर जोर से मसाज करने की आदत हो जाती है, क्योंकि उनके पैरों में महसूस करने की क्षमता घट जाती है।
जोर से मसाज करने पर बाहरी त्वचा की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिसका सुबूत होता है त्वचा का काला पड़ना। इसकी वजह से भी डायबिटिक फुट के मामले बढ़ रहे हैं।
पैर काटना ही विकल्प नहीं
डायबिटीज में अल्सर और पैर के सड़ने की वजह से अंग विच्छेदन जैसा विकल्प अपनाना आम हो चला है। प्रो. मिलिंद ने एक तकनीक बताई, जिसमें घाव की सड़न और संक्रमित फ्यूइड को साफ किया जाता है।
इस प्रक्रिया में घाव को संक्रमण रहित करते हुए अंग विच्छेदन की आशंका कम की जा सकती है। इस प्रक्रिया में घाव पर स्पंज की शीट बिछाकर घाव के विस्तार के नाप में शीट को काटा जाता है।
फिर यह शीट असंक्रमित करके घाव पर इस तरह बांध दी जाती है कि उसमें हवा प्रवेश न कर पाए। शीट में ही एक पाइप भीतर जोड़कर मशीन से तीन चार दिन तक सक्शन कराया जाता। इस दौरान संक्रमित बैक्टीरिया और फ्लूइड घाव से खत्म हो जाता है।
डायबिटिक रोगी इससे बचें
-पैरों की मसाज बिल्कुल न करें।
-गर्म पानी में पैर डुबोने से बचें।
-आयुर्वेदिक इलाज न कराएं।
-न ही जौंक को घाव में लगाएं।
ये भी जानें
- 1/6 संभावना है कि डायबिटिक फुट में पैर काटने की नौबत आ सकती है, इसे कम किया जा सकता है
- 30 सेकंड में एक डायबिटिक फुट काटा जा रहा है
- भारत में इनमें से आधे मामले