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घर मे शोरूम या ऑफिस खोलना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है

Sat, 16 Jul 2016 04:42 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Sat, 16 Jul 2016 04:42 PM IST
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showroom and offices can be established in lda colony
डेमो प‌िक - फोटो : Demo

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की विकसित और ले-आउट पास कॉलोनियों में आवासीय भवनों या भूखंड के व्यावसायिक उपयोग को मंजूरी दे दी गई है। महायोजना-2021 में इसके लिए बदलाव कर दिया गया है।

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हाल ही में आवासीय भवनों का भूउपयोग कॉमर्शियल किए जाने की प्रक्रिया को आसान और शुल्क में कमी करने के बाद यह एक और बड़ी राहत दी गई है। अभी तक प्राधिकरण की कॉलोनियों में मिश्रित भू-उपयोग पर पाबंदी लगी हुई थी।
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आवास विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, महायोजना 2021 केजोनिंग रेग्यूलेशंस 7.1.7.3 में बदलाव किया गया है। महायोजना के इस बिन्दु में प्राधिकरण की विकसित या ले-आउट पास वाली कॉलोनियों में भू-उपयोग में बदलाव को प्रतिबंधित करते हुए भविष्य में किसी भी तरह के आवेदन को अनुमति देने पर रोक लगा दी गई थी।
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अब इस प्रावधान को नई अधिसूचना में खत्म कर दिया गया है। इस तरह के मिश्रित भू-उपयोग को अनुमति देने के लिए एक विशेषज्ञ समिति आवेदनों पर फैसला लेगी।

मिश्रित भू-उपयोग में व्यावसायिक गतिविधि के लिए प्रभाव शुल्क जमा करना होगा। यह प्रभाव शुल्क क्षेत्र में यातायात, ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज सिस्टम पर बढ़ने वाले बोझ के अनुपात में सुविधाओं को विकसित कर संतुलन बनाने के लिए जरूरी बजट के अनुपात में होगा।

अधिसूचना में एलडीए के सेक्टर रेट का 25 प्रतिशत और विशेष अनुमति के लिए 50 प्रतिशत प्रभाव शुल्क के रूप में जमा करना होगा। विशेष अनुमति उन व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जरूरी होगी, जिनसे प्रदूषण या किसी तरह के नुकसान संभावना होगी। जिन कॉलोनियों में एलडीए का सेक्टर रेट लागू नहीं है। 

प्रभाव शुल्क की वसूली डीएम सर्किल रेट के आधार पर

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डेमो फोटो

वहां प्रभाव शुल्क की वसूली डीएम सर्किल रेट के आधार पर की जाएगी। मिश्रित भू उपयोग के आवेदनों पर फैसले के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। इसमें एलडीए वीसी के अलावा मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक या उनका प्रतिनिधि, एलडीए बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा नामित गैर सरकारी सदस्य प्रतिनिधि के रूप में समिति में होंगे।

मिश्रित भू-उपयोग के लिए न्यूनतम 18 मीटर सड़क का चौड़ा होना जरूरी होगा। यहां छोटी दुकानों, रेस्त्रां, सरकारी-गैर सरकारी कार्यालय, रैनबसेरा, लाइब्रेरी, संगीत-नृत्य अकादमी, धर्मशाला, अस्पताल को अनुमति होगी। 

वहीं न्यूनतम 24 मीटर चौड़ी सड़क पर 30 प्रतिशत भू-उपयोग के साथ शोरूम को अनुमति दी जाएगी। यहां होटल, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स, सर्कस, मेला, प्राथमिक शिक्षा संस्थान, पेट्रोल पंप, बैंक, हेल्थ क्लब, जिमनेजियम, कंम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र को अनुमति दी जा सकेगी।

अभी तक बिना अनुमति अवैध रूप से आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। अब एलडीए को योजना बनाकर इन इलाकों में सड़कों को चिन्हित करना होगा। इसके बाद ही आवेदनों पर अनुमति दी जा सकेगी। 

पार्किंग भी एक बड़ी समस्या होगी। ऐसे में यह सुनिश्चित कराना होगा कि पार्किंग की व्यवस्था करने वाले आवेदनों को ही अनुमति मिले।

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