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Lucknow News: उपकेंद्रों में कम व अनुभवहीन कर्मी, बढ़ रहे हादसे

Mon, 05 Oct 2026 02:53 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:53 AM IST
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Shortage of staff and lack of experience at substations; accidents on the rise.
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। बिजली उपकेंद्रों पर उपभोक्ताओं की शिकायतें दूर करने वाले संविदाकर्मियों की संख्या करीब 30 फीसदी घटा दी गई है, जबकि हर साल करीब 15 फीसदी उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। पहले चार कर्मचारियों के गैंग से होने वाला काम अब तीन कर्मियों से कराया जा रहा है। आरोप है कि कई उपकेंद्रों पर 11 और 33 हजार वोल्ट की लाइनों के खंभों पर बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और अनुभव के कर्मियों को चढ़ाया जा रहा है। इससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
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संविदा यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद खालिद के मुताबिक, पहले एक गैंग में एक लाइनमैन, एक पेट्रोलमैन और दो सहयोगी होते थे। खंभे पर चढ़कर काम करने की जिम्मेदारी सिर्फ लाइनमैन की थी। अब तीन कर्मचारियों के गैंग में एक कुशल और दो अकुशल संविदा कर्मी रखे जा रहे हैं। शिकायतों का बोझ बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है। खालिद का आरोप है कि शिकायतों का दबाव बढ़ने पर जेई और एसडीओ संविदाकर्मियों से आठ की जगह 12 घंटे तक काम करा रहे हैं। नौकरी से निकालने और वेतन रोकने की धमकी भी दी जाती है।
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उपकेंद्रों पर नहीं है ड्यूटी चार्ट
वीआईपी क्षेत्रों के उपकेंद्रों को छोड़कर अधिकांश जगह संविदाकर्मियों का ड्यूटी चार्ट चस्पा नहीं किया जाता। यूनियन का आरोप है कि ड्यूटी चार्ट नहीं होने से तय अवधि से अधिक काम कराने की शिकायतों का रिकॉर्ड सामने नहीं आ पाता।
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कर्मी बढ़े तो सुधरी व्यवस्था
मई से जुलाई के बीच राजधानी में बिजली संकट के दौरान मध्यांचल निगम के निदेशक तकनीकी हरीश बंसल ने उपकेंद्रों का निरीक्षण किया था। इस दौरान कर्मचारियों की कमी सामने आई। तत्कालीन एमडी रिया केजरीवाल की अनुमति से तीन-चार माह के लिए कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई, जिससे व्यवस्था में सुधार हुआ।

कई हादसे, फिर भी नहीं बदली व्यवस्था
- फरवरी में कल्याणपुर में परशुराम रावत की मौत।
- अप्रैल में दुबग्गा उपकेंद्र पर सुहैल करंट से झुलसा।
- मई में मोहनलालगंज ओल्ड उपकेंद्र में महानंद झुलसे।
- सितंबर में चिनहट शिवपुरी उपकेंद्र के रंजीत कुमार की मौत।
- अक्टूबर में आशियाना उपकेंद्र के संविदा लाइनमैन अभिषेक झुलसे।
पारिश्रमिक : अकुशल संविदाकर्मी 11,200 रुपये और कुशल संविदाकर्मी 14,100 रुपये।
Iवर्टिकल में कर्मियों का शोषण बढ़ा है। प्रबंधन ने उपकेंद्र कर्मियों की संख्या करीब 30 फीसदी घटाकर उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ा दी हैं। कुछ उपकेंद्रों पर जेई कर्मचारियों से आठ की जगह 12 घंटे तक काम करा रहे हैं।I
I- देवेंद्र कुमार पांडेय, प्रदेश महामंत्री, संविदा/आउटसोर्स यूनियनI
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