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लखनऊ के अस्पताओं में बच्चों की जान बचाना हो रहा है मुश्किल, जानें कैसे

Fri, 05 Aug 2016 02:12 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Fri, 05 Aug 2016 02:12 PM IST
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shortage of medical facilities in kgmu
बच्ची की मौत के बाद दुखी परिवारीजन - फोटो : amar ujala

केजीएमयू, ट्रॉमा सेंटर के बाल रोग विभाग में बृहस्पतिवार को वेंटिलेटर नहीं मिलने से दिमागी बुखार से पीड़ित बच्ची की मौत हो गई। बच्ची का इलाज गोमतीनगर के निजी अस्पताल में चल रहा था। 

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दोपहर बारह बजे हालत बिगड़ने पर उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया था। ट्रॉमा सेंटर में केवल चार बेड की वेंटिलेटर यूनिट है। बाराबंकी देवा, के मो. हसन की बेटी आफरीन (8) को दिमागी बुखार की शिकायत पर पांच दिन पहले गोमतीनगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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 परिवारीजन मो. अय्यूब ने बताया कि बृहस्पतिवार को आफरीन की हालत बिगड़ गई। इस पर डॉक्टरों ने तुरंत वेंटिलेटर की जरूरत बताई। आनन-फानन दोपहर करीब एक बजे उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। कैजुअलिटी में डॉक्टरों ने ऑक्सीजन लगा दी।
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 जानकारी पर पता चला कि चार बेड की बाल रोग विभाग की वेंटिलेटर यूनिट फुल है। इस पर डॉक्टरों ने बच्ची को दूसरे सेंटर ले जाने की सलाह दी।

 परिवारीजन बच्ची को स्ट्रेचर पर बाहर लाए तभी उसकी सांस उखड़ने लगी और बेहोश हो गई। इस पर आफरीन को दोबारा कैजुअलिटी लाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

सुविधाओं के अभाव में हुई बच्ची की मौत

shortage of medical facilities in kgmu
डेमो

रोते विलखते परिवारीजन व्यवस्था को कोसते हुए बच्ची का शव लेकर बाराबंकी चले गए। परिवारीजनों का कहना था कि इमरजेंसी में अगर केजीएमयू जैसे संस्थान में वेंटिलेटर नहीं मिलेगा तो गरीब मरीजों की जान बचनी बेहद मुश्किल है।

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में चार बेड और बाल रोग विभाग में 15 बेड की वेंटिलेटर यूनिट 24 घंटे फुल रहती है। ऐसे में 10 से 15 मरीज वेटिंग में हैं।

सिविल में एक करोड़ रुपये से पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट में दस बेड की पीडियाट्रिक वेंटिलेटर यूनिट शुरू होनी थी। दो साल हो गए लेकिन यूनिट नहीं बनी।

बलरामपुर अस्पताल में 50 बेड के विभाग पर एक भी वेंटिलेटर नहीं है। लोहिया में पांच बेड की यूनिट स्टाफ के अभाव चलायी जा रही है। 63 लाख का बजट पांच बेड की वेंटिलेटर यूनिट के लिए जारी किया गया लेकिन मशीनों की खरीदारी नहीं हो सकी। 

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