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Virendra Thakur Murder Case: शहाबुद्दीन गैंग के शूटरों ने की वीरेंद्र ठाकुर की हत्या, बिहार के शूटरों ने दिया वारदात को अंजाम; चार संदिग्धों की पहचान

Tue, 28 Jun 2022 02:10 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 28 Jun 2022 02:10 AM IST
सार

पुलिस के मुताबिक, बिहार के बाहुबली शहाबुद्दीन गिरोह के शूटर्स ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया है। बाहुबली शहाबुद्दीन की मौत के बाद से उसका खास गुर्गा रईस खान गिरोह को ऑपरेट कर रहा है। वहीं ठेकेदार गोरख उर्फ वीरेंद्र ठाकुर की हत्या में नामजद आरोपी फिरदौस रईस खान का खास आदमी है। 

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shooters of shahabuddin gang killed virendra thakur lucknow police identify four suspects
मृतक वीरेंद्र ठाकुर (बायें) व घर में जांच के लिए मौजूद फॉरेंसिक टीम। - फोटो : amar ujala

विस्तार

इलाके में दबंगई, कारोबार में वर्चस्व, धोखा और इश्कमिजाजी के कारण रेलवे ठेकेदार वीरेंद्र उर्फ गोरख ठाकुर की हत्या की गई। वीरेंद्र की हत्या की साजिश एक साल पहले से रची गई थी। तीन साल पहले हमले में असफल हो चुके दुश्मन इस बार मौका नहीं चूकना चाहते थे। इस बार वारदात को अंजाम देने के लिए सुपारी किलर का प्रयोग किया गया। पुलिस का दावा है कि हत्या के पीछे शहाबुद्दीन गैंग के शूटरों का हाथ है। 

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पुलिस के मुताबिक, बिहार के बाहुबली शहाबुद्दीन गिरोह के शूटर्स ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया है। बाहुबली शहाबुद्दीन की मौत के बाद से उसका खास गुर्गा रईस खान गिरोह को ऑपरेट कर रहा है। वहीं ठेकेदार गोरख उर्फ वीरेंद्र ठाकुर की हत्या में नामजद आरोपी फिरदौस रईस खान का खास आदमी है। पुलिस की एक टीम बिहार में हत्या आरोपी फिरदौस, वीरेंद्र की पहली पत्नी प्रियंका, उसके प्रेमी बिट्टू जायसवाल के अलावा शूटर्स की तलाश में जुटी है। वहीं पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र ठाकुर की दूसरी पत्नी खुशबुन तारा, फिरदौस की चचेरी बहन भी है।
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पुलिस के अनुसार, जो चार संदिग्ध सीसीटीवी कैमरों में दिखे हैं। उनकी पहचान हो चुकी है। उनका ब्योरा मिल गया है। एक शूटर का ब्योरा आना बाकी है। सुरक्षाकर्मियों का कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा है। उन पर भी शक की सुई है। पुलिस आरोपियों की तलाश में लखनऊ से बिहार तक दबिश दे रही है।

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वीरेंद्र के मोबाइल में मिले कई संदिग्ध नंबर

पुलिस ने वीरेंद्र के मोबाइल के बारे में जानकारी हासिल की। जिसमें दो मोबाइल नंबर सक्रिय होने की बात सामने आई। पुलिस ने इन दोनों नंबरों की कॉल डिटेल निकलवा चुकी है। जिसमें कई संदिग्ध नंबर मिले हैं। कुछ नंबरों पर लगातार बातचीत होने की बात सामने आई। इन नंबरों पर ही जब पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो कई सुराग हाथ लगे हैं। पत्नी खुशबुन तारा से मिली कई जानकारियों से भी पुलिस को मदद मिली। इसी वजह से पुलिस की एक और टीम बिहार सोमवार सुबह बिहार रवाना कर दी गई।

जेल में बंद आरोपी से भी हुई पूछताछ

वीरेंद्र पर चारबाग के पूर्वोत्तर रेलवे प्लेटफार्म के बाहर स्टैंड पर दो जुलाई 2019 हमला हुआ था। इस हमले में उसे रीढ़ की हड्डी में गोली लगी थी। लेकिन वह बच गया। वहीं इस हमले के बाद से वह दिव्यांग हो गया। इस वारदात में जीआरपी ने चार लोगों को जेल भेजा था। जिनमें तीन जमानत पर बाहर हैं, वहीं एक आरोपी जेल में है। पुलिस ने जेल में बंद आरोपी का बयान दर्ज कराया।

निजी सुरक्षाकर्मी गायब, तलाश जारी

वीरेंद्र ने शाहजहांपुर के जिन तीन गार्ड को अपनी सुरक्षा के लिये रखा था। वह भी काम नहीं आये थे। पता चला था कि गार्ड ने ही दरवाजा खोलकर वीरेंद्र का कमरा बताया था। इधर बदमाश वीरेंद्र के कमरे में गये, उधर गार्ड फरार हो गये। पुलिस की टीम शाहजहांपुर गई तो वहां ताला बंद मिला। घर वाले भी फरार हो गये हैं। मोबाइल नंबर बंद है। उनके कई रिश्तेदारों से पुलिस ने पूछताछ की लेकिन कोई जानकारी नहीं दे सका।

लखनऊ में पढ़ाई के दौरान हुई दोस्ती बन गई बीबी

फिरदौस की चचेरी बहन खुशबुन तारा लखनऊ में रहकर पढ़ाई करती थी। फिरदौस बिहार में बालू ठेकेदारी के विवाद में माफिया के निशाने पर आ गया तो वह बिहार से लखनऊ भाग आया। वह अपनी चचेरी बहन खुशबुन तारा के पास रहने लगा। वहां भी जब असुरक्षित महसूस किया तो वीरेंद्र की शरण में चला गया। इसके बाद वीरेंद्र का खुशबुन के कमरे पर आना-जाना शुरू हुआ। वह पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद करता था। वहीं से दोनों में प्यार हुआ। फिर दोनों पति-पत्नी बन गए। उधर, फिरदौस को यह बात नागवार गुजरी कि उसकी चचेरी बहन ने वीरेंद्र से शादी कर ली। वह वापस बिहार गया जहां से वीरेंद्र ठाकुर की हत्या की साजिश रचने लगा। वहां पर उसने पश्चिमी चंपारण के नामी शूटर विनय वर्मा से मुलाकात की। उसके जरिए हत्या का खूनी खेल रचा।

सुरक्षाकर्मी संदेह के घेरे में

पुलिस के मुताबिक वीरेंद्र के घर पर तैनात सभी सुरक्षाकर्मी भी संदेह के घेरे में हैं। उनकी तलाश में पुलिस ने शाहजहांपुर आवास पर दबिश दी लेकिन नहीं मिले। वहीं कई रिश्तेदारों व परिचितों से भी पूछताछ की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि कहीं इस हत्याकांड में ये सुरक्षाकर्मी भी तो नहीं शामिल हैं। साजिश के तहत सभी वीरेंद्र की सुरक्षा में तैनात हुए। इसके बाद अंदर से बाहर की पूरी जानकारी दी। फिर हत्याकांड को अंजाम देने के बाद भागे बदमाशों के कुछ देर बाद सभी गायब हो गये। वहीं सभी के मोबाइल बंद आ रहे हैं। पुलिस सभी सुरक्षाकर्मियों के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवा रही है।

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