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15 जनवरी भी बीती, शताब्दी अस्पताल में सन्नाटा
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 16 Jan 2014 10:58 AM IST
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शताब्दी अस्पताल के भूतल में पर्चा काउंटर और वेटिंग एरिया में सन्नाटा है।
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इसी तल के एक हिस्से में बने ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांट डिपार्टमेंट और सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग में कुछ चहल-पहल थी। वहां कर्मचारी फाइलें-फर्नीचर आदि शिफ्ट कर रहे थे।
फर्स्ट फ्लोर पर सन्नाटा पसरा था। इस फ्लोर पर यूरोलॉजी विभाग और मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर भी हैं। वार्ड खाली पड़े थे।
ऑपरेशन थिएटर को विभागों को देने के लिए कंपनी के कर्मचारी फ्लैश लाइट व अन्य उपकरणों को दुरुस्त करने में लगे थे।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के सौ साल पूरे होने की याद में बनाए गए शताब्दी अस्पताल में बुधवार को मरीज नहीं दिखे। जिस रफ्तार से वहां कार्य चल रहा है अभी 15 से 20 दिन तक ओपीडी और मरीजों की भर्ती शुरू करने की संभावना भी नहीं दिख रही है।
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ये हाल तब है जबकि कुलपति प्रो. डीके गुप्ता ने 30 दिसंबर को आयोजित पत्रकारवार्ता में अस्पताल को 15 जनवरी तक शुरू करने की घोषणा की थी। इसके बाद से शताब्दी अस्पताल में विभागों को शिफ्ट करने की कवायद शुरू हो गई थी।
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कुलपति की घोषणा की सच्चाई को जानने के लिए शताब्दी अस्पताल पहुंची ‘अमर उजाला’ टीम को भूतल पर सन्नाटा पसरा मिला। ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग में शिफ्टिंग के बाद डॉ. विवेक गुप्ता अपने केबिन में बैठकर अंग प्रत्यारोपण शुरू करने की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे।
टीम फर्स्ट फ्लोर पर पहुंची तो वहां सिर्फखाली कुर्सियां ही स्वागत कर रही थीं। इसी फ्लोर पर मॉड्यूलर ओटी बनी है। वहां पहुंचने पर पाया गया कि शीशे का स्लाइडिंग डोर लॉक था, लेकिन बिडिंग निकल जाने के कारण लॉक अलग था और दरवाजे को खिसका कर वहां कोई भी जा सकता था।
मॉड्यूलर ओटी स्थापित करने वाली कंपनी के दो कर्मचारी भी उसी समय वहां पहुंच गए। उन्होंने स्लाइडिंग टूटी होने पर आश्चर्य जताया और ओटी खोलकर अपने कार्य में जुट गए।
इसी फ्लोर पर बने दो वार्ड भी खाली पड़े हुए थे। इन वार्डों में आधुनिक बेड लगे हुए थे, लेकिन ऊपर से आने वाली सीवर लाइन के लीक होने के कारण वार्ड में तेजी से पानी टपक रहा था।
यही हाल शताब्दी अस्पताल के सेकंड फ्लोर का था। मरीजों का इंतजार करती कुर्सियां व डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ का इंतजार करते केबिन तीन साल से सफेद हाथी बने अस्पताल का हश्र बयां कर रहे थे।
दो ओटी के फर्श निकले खराब
शताब्दी अस्पताल में करोड़ों की लागत से बनी मॉड्यूलर ओटी में भी कमियां निकल रही हैं। मरीजों को शिफ्ट करने और ऑपरेशन शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा यही कमियां बन रही हैं।
यदि ओटी तैयार नहीं हुए और मरीज भर्ती हो गए तो शताब्दी अस्पताल से पुराने परिसर तक मरीज को लेकर दौड़ लगानी पड़ेगी। सूत्रों की मानें तो दो मॉड्यूलर ओटी के फर्श में क्रैक मिली है।
अभी ये ओटी केजीएमयू प्रशासन को हैंडओवर नहीं हुए हैं। ओटी की फर्श को पहले दुरुस्त किया जाएगा। इसके बाद ही हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होगी।
गिफ्ट देना चाह रहे थे अधिकारी
शताब्दी अस्पताल के लिए 15 जनवरी खास महत्व का दिन बनता जा रहा है। इस अस्पताल की नींव भले ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने रखी हो, लेकिन दो बार यहां की ओपीडी का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के जन्मदिन के मौके पर ही हुआ था।
केजीएमयू के अधिकारियों ने 15 जनवरी 2010 और फिर 15 जनवरी 2011 को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती से शताब्दी हॉस्पिटल की ओपीडी का उद्घाटन कराया था।
इस बार भी कुलपति प्रो. डीके गुप्ता ने स्वयं 15 जनवरी को ओपीडी शुरू करने की घोषणा की थी। हालांकि ये घोषणा पूरी नहीं हो पाई।
एक बार ‘रिजेक्ट’ कर चुके हैं मरीज
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना दिवस के 100 वर्ष पूरे होने के मौके को यादगार बनाने के लिए सपा सरकार में शताब्दी अस्पताल की स्थापना की योजना बनाई गई थी।
26 अप्रैल 2005 को सपा सुप्रीमो व तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इसकी नींव रखी थी। दो फेज में बनने वाले इस हॉस्पिटल का बजट शुरुआत में 200 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था।
फर्स्ट फेज लगभग बनकर तैयार होने के बाद एक साल तक अस्पताल ऐसे ही पड़ा रहा। रॉबिन हुड पैटर्न के कारण अस्पताल मरीजों को आकर्षित नहीं कर पाया। 50 रुपये पंजीकरण शुल्क और 300 रुपये परामर्श शुल्क देकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना फेल हो गई।
जिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए एक रुपये का पर्चा लेकर इलाज कराने वालों की लाइन लगती थी। उन्हें शताब्दी अस्पताल में मरीज ही नहीं मिले। दो वर्षों में बमुश्किल लगभग 3500 मरीज ही वहां पहुंचे।
इसी कारण सितंबर 2012 में ओपीडी बंद कर दी गई। कैबिनेट से इसे केजीएमयू की तर्ज पर ही चलाने की अनमुति मिलने के बाद दोबारा ओपीडी शुरू करने की कवायद चल रही है।