{"_id":"5fc92df68ebc3e9bd0127195","slug":"sharma-faction-lost-in-the-legislative-council-elections-bjp-created-history","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विधान परिषद चुनाव में शर्मा गुट का वर्चस्व टूटा, भाजपा ने रचा इतिहास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विधान परिषद चुनाव में शर्मा गुट का वर्चस्व टूटा, भाजपा ने रचा इतिहास
Thu, 03 Dec 2020 11:57 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 03 Dec 2020 11:57 PM IST
विज्ञापन
घाटमपुर उपचुनाव में कौन होगा भाजपा का दावेदार
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आखिरकार विधान परिषद के शिक्षक कोटे की सीटों के चुनाव में भी भाजपा की रणनीति सफल रही। पार्टी ने शिक्षक कोटे की 6 सीटों के चुनाव में जिन चार पर उम्मीदवार उतारे थे उनमें तीन पर जीत सुनिश्चित कर ली है। खासतौर पर मेरठ से लगभग 48 साल से लगातार जीतकर उच्च सदन पहुंच रहे और अजेय माने जाने वाले माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा जैसे कद्दावर नेता को पटखनी देकर यह साबित कर दिया कि उसके लिए अब कोई चुनौती कठिन नहीं है। यह पहला मौका है जब शिक्षक कोटे से भाजपा के एमएलसी उच्च सदन में पहुंचेंगे। स्नातक कोटे की पांच सीटों के चुनाव में भी ज्यादातर की मतगणना का रुझान रात तक भाजपा के पक्ष में ही दिखाई दे रहा है।
हालांकि खबर लिखे जाने तक नतीजों की औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी लेकिन भाजपा उम्मीदवारों ने मेरठ शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और लखनऊ शिक्षक सीटों पर पहले राउंड में ही इतनी बढ़त बना ली जिसे पाटकर जीत की तरफ बढ़ना फिलहाल दूसरे उम्मीदवार के लिए बहुत आसान नहीं दिखाई देता। मेरठ में शिक्षक सीट पर भाजपा के श्रीचंद्र शर्मा ने ओमप्रकाश शर्मा को एक तरह से पराजित कर दिया है केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। बरेली-मुरादाबाद सीट पर भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो ने सपा के संजय मिश्र और शिक्षक संघ शर्मा गुट के सुभाष चंद्र शर्मा को परास्त किया है। आगरा में चार बार से शर्मा गुट से ही शिक्षक एमएलसी चुने जा रहे जगवीर किशोर जैन की जीत का रास्ता भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। हालांकि जानकारी के अनुसार यहां अभी भाजपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार आकाश के बीच काफी कडी टक्कर हो रही है। जीत किसी की भी हो सकती है। लखनऊ में उमेश द्विवेदी ने डॉ. आर.पी. मिश्र को शिकस्त देने की स्थिति बना ली है। वाराणसी में सपा समर्थित लालबिहारी की जीत सुनिश्चित दिख रही है तो गोरखपुर-अयोध्या सीट पर निर्दलीय अजय सिंह और शर्मा गुट के ध्रुव कुमार त्रिपाठी में काफी कड़ा मुकाबला है।
विज्ञापन
हालांकि खबर लिखे जाने तक नतीजों की औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी लेकिन भाजपा उम्मीदवारों ने मेरठ शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और लखनऊ शिक्षक सीटों पर पहले राउंड में ही इतनी बढ़त बना ली जिसे पाटकर जीत की तरफ बढ़ना फिलहाल दूसरे उम्मीदवार के लिए बहुत आसान नहीं दिखाई देता। मेरठ में शिक्षक सीट पर भाजपा के श्रीचंद्र शर्मा ने ओमप्रकाश शर्मा को एक तरह से पराजित कर दिया है केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। बरेली-मुरादाबाद सीट पर भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लो ने सपा के संजय मिश्र और शिक्षक संघ शर्मा गुट के सुभाष चंद्र शर्मा को परास्त किया है। आगरा में चार बार से शर्मा गुट से ही शिक्षक एमएलसी चुने जा रहे जगवीर किशोर जैन की जीत का रास्ता भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। हालांकि जानकारी के अनुसार यहां अभी भाजपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार आकाश के बीच काफी कडी टक्कर हो रही है। जीत किसी की भी हो सकती है। लखनऊ में उमेश द्विवेदी ने डॉ. आर.पी. मिश्र को शिकस्त देने की स्थिति बना ली है। वाराणसी में सपा समर्थित लालबिहारी की जीत सुनिश्चित दिख रही है तो गोरखपुर-अयोध्या सीट पर निर्दलीय अजय सिंह और शर्मा गुट के ध्रुव कुमार त्रिपाठी में काफी कड़ा मुकाबला है।
विज्ञापन
शिक्षक राजनीति में होगा उलटफेर
शिक्षक नेता ओमप्रकाश शर्मा की शिकस्त बड़ा संदेश देने वाली और प्रदेश की शिक्षक राजनीति में बड़े उलटफेर की गाथा कहने वाली है। इस गुट के अन्य प्रत्याशियों में आगरा से चार बार से लगातार जीत रहे जगवीर किशोर जैन की शिकस्त तथा बरेली-मुरादाबाद सीट पर पहले शर्मा गुट से ही एमएलसी रह चुके सुभाष चंद्र शर्मा, लखनऊ सीट पर पहली बार चुनाव लड़ रहे डॉ. आर.पी. मिश्र की हार यह साबित करती है कि शिक्षकों के बीच इस गुट का दबदबा तेजी से समाप्त होता जा रहा है।
इसलिए बदलेंगे समीकरण
ओमप्रकाश शर्मा की परिषद में गैर मौजूदगी माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) की भूमिका पर असर डालेगी क्योंकि शर्मा के कद के चलते इस संगठन में दूसरों का वह दबदबा ही नहीं बन पाया। जाहिर है कि नतीजे सिर्फ परिषद में भाजपा और दूसरे दलों के सदस्यों के आंकड़ों में बदलाव नहीं करेंगे बल्कि शिक्षकों की राजनीति का दिशा व दशा भी परिवर्तित करेंगे। शिक्षक कोटे की तीन सीटों पर भाजपा की जीत निश्चित तौर पर एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर अन्य चुनाव के लिए भी इस दल के लिए समर्थक और समर्थन बढ़ाएगी।
इस तरह की भाजपा ने तैयारी
ये नतीजे इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भाजपा ने पहली बार शिक्षक कोटे की सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। अभी तक भाजपा कभी विधान परिषद की शिक्षक कोटे की सीटों पर औपचारिक और अधिकृत रूप से चुनाव नहीं लड़ी थी। इस बार भी पार्टी के भीतर इन सीटों का चुनाव अधिकृत और औपचारिक रूप से लड़ने पर असमंजस था लेकिन बाद में फैसला चुनाव लड़ने के पक्ष में हुआ। भाजपा ने इन चुनाव की तैयारी लगभग डेढ़ साल पहले ही शुरू कर दी थी। जिसकी कमान पिछले एक साल से खुद प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह संभाले हुए थे। उन्होंने प्रदेश के महामंत्री अमरपाल मौर्य को चुनाव का प्रभारी बनाकर पूरी जिम्मेदारी सौंपी। जिससे चुनाव की तैयारियों में लगाए जा रहे कार्यकर्ताओं को निरंतर सक्त्रिस्य रखा जाए तो खुद पूरे प्रदेश में इन चुनाव के मद्देनजर जगह-जगह संगठन की बैठकों के साथ मतदाताओं के सम्मेलन किए। पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिये मतदाता बनवाए।
इसलिए बदलेंगे समीकरण
ओमप्रकाश शर्मा की परिषद में गैर मौजूदगी माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) की भूमिका पर असर डालेगी क्योंकि शर्मा के कद के चलते इस संगठन में दूसरों का वह दबदबा ही नहीं बन पाया। जाहिर है कि नतीजे सिर्फ परिषद में भाजपा और दूसरे दलों के सदस्यों के आंकड़ों में बदलाव नहीं करेंगे बल्कि शिक्षकों की राजनीति का दिशा व दशा भी परिवर्तित करेंगे। शिक्षक कोटे की तीन सीटों पर भाजपा की जीत निश्चित तौर पर एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर अन्य चुनाव के लिए भी इस दल के लिए समर्थक और समर्थन बढ़ाएगी।
इस तरह की भाजपा ने तैयारी
ये नतीजे इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भाजपा ने पहली बार शिक्षक कोटे की सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। अभी तक भाजपा कभी विधान परिषद की शिक्षक कोटे की सीटों पर औपचारिक और अधिकृत रूप से चुनाव नहीं लड़ी थी। इस बार भी पार्टी के भीतर इन सीटों का चुनाव अधिकृत और औपचारिक रूप से लड़ने पर असमंजस था लेकिन बाद में फैसला चुनाव लड़ने के पक्ष में हुआ। भाजपा ने इन चुनाव की तैयारी लगभग डेढ़ साल पहले ही शुरू कर दी थी। जिसकी कमान पिछले एक साल से खुद प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह संभाले हुए थे। उन्होंने प्रदेश के महामंत्री अमरपाल मौर्य को चुनाव का प्रभारी बनाकर पूरी जिम्मेदारी सौंपी। जिससे चुनाव की तैयारियों में लगाए जा रहे कार्यकर्ताओं को निरंतर सक्त्रिस्य रखा जाए तो खुद पूरे प्रदेश में इन चुनाव के मद्देनजर जगह-जगह संगठन की बैठकों के साथ मतदाताओं के सम्मेलन किए। पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिये मतदाता बनवाए।