मुलायम के करीबी मंत्री शारदा को अखिलेश ने किया बर्खास्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव व शिवपाल यादव के करीबी उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शारदा प्रताप शुक्ला को मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया। मुख्यमंत्री ने राजभवन को बृहस्पतिवार को बर्खास्तगी की चिट्ठी भेजी जिस पर राज्यपाल राम नाईक ने मुहर लगा दी।
शारदा प्रताप सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर पहले से ही अखिलेश के निशाने पर थे। इस बीच, सपा से टिकट न मिलने पर बगावत कर दी और रालोद के टिकट पर सरोजनीनगर क्षेत्र में मुलायम के पौत्र अनुराग यादव के खिलाफ मैदान में उतर आए।
शारदा को शिवपाल खेमे ने टिकट दिया था। बाद में अखिलेश ने उनका टिकट काटकर सांसद धर्मेंद्र यादव के भाई अनुराग यादव को प्रत्याशी घोषित किया था। टिकट कटने के बाद शारदा ने अखिलेश पर परिवारवादी होने का आरोप भी लगाया था।
साढ़े सात महीने मंत्री रहे शारदा प्रताप शुक्ला
शारदा को सीएम ने 27 जून 2016 को मंत्रिमंडल में शामिल किया था। वे करीब साढ़े सात महीने ही मंत्री रह पाए।
चेतावनियां मिलती रहीं पर नहीं माने शारदा
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर पहले से ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निशाने पर रहे उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शारदा प्रताप शुक्ला को बर्खास्तगी से पहले कई बार चेतावनी दी गई।
लखनऊ के सरोजिनीनगर से अनुराग यादव की जीत सुनिश्चित करने के लिए पहले तो सपा ने शारदा को चेतावनी देकर मैदान से हटने का दबाव बनाया लेकिन जब वह नहीं माने तो उन्हें मंत्रिमंडल और पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
शारदा पर कार्रवाई करके सपा ने यह साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी से बगावत करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इससे पहले बुधवार को पूर्व एमएलसी राकेश सिंह राणा समेत आठ बागी नेताओं को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
विधायक रामपाल के साथ भी ऐसा ही हुआ था
सीतापुर के सपा विधायक रामपाल यादव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। रामपाल जब तक अखिलेश के प्रति वफादार रहे तब तक तो सरकार और एलडीए उनके अवैध निर्माणों की तरफ से आंखे मूंदे रहा।
जैसे ही उन्होंने जिला पंचायत के चुनाव में अखिलेश की इच्छा के खिलाफ जाकर बेटे को चुनाव लड़ाने की हिमाकत की, सरकार उन्हें सबक सिखाने में जुट गई। सीएम ने रामपाल के सारे अवैध निर्माणों की जांच के साथ ही उन्हें गिराने का भी आदेश दिया। साथ ही उन्हें विधानमंडल दल से भी निलंबित कर दिया था।
उनके बेटे जितेंद्र को भी पार्टी से बाहर किया गया। पिछले साल जनवरी में रामपाल सपा से निष्कासित हुए लेकिन परिवार में झगड़ा शुरू होने पर दिसंबर में मुलायम के कहने पर उनकी वापसी हो गई। इस बार सपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने लोकदल जॉइन कर लिया।
कुनबे के सदस्य की वजह से हुई कार्रवाई
सरोजनीनगर सीट से मुलायम कुनबे का सदस्य मैदान में न होता तो शारदा प्रताप की बर्खास्तगी न होती। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद ही शारदा के राजधानी के किला मोहम्मदी इलाके में स्थित दस करोड़ रुपये की एलडीए की जमीन पर किए अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलाया गया।
इस दौरान उन्होंने कई बार बगावती तेवर दिखाए और सीएम पर आंखे भी तरेरी लेकिन इसे नजरंदाज किया जाता रहा।