{"_id":"5bdfdeabbdec226970457b70","slug":"shagun-tripathi-of-lucknow-nominated-for-international-peace-award-2018","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड के लिए नामित हुई लखनऊ की बेटी शगुन, किया था ये साहस भरा काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड के लिए नामित हुई लखनऊ की बेटी शगुन, किया था ये साहस भरा काम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 05 Nov 2018 11:39 AM IST
विज्ञापन
शगुन त्रिपाठी
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक किशोरी को बचाने के लिए बदमाशों से भिड़ने वाली लखनऊ की कक्षा आठवीं की छात्रा शगुन त्रिपाठी को विश्व के प्रतिष्ठित इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस पीस प्राइज-2018 के लिए नामित किया गया है। पाकिस्तान की मलाला को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया था। शगुन त्रिपाठी समेत विश्व के 109 बच्चों को इस पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।
इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस पीस प्राइज हर साल बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले किड्स राइट फाउंडेशन की ओर से दिया जाता है। इसकी पुरस्कार राशि एक लाख पाउंड है। यह राशि फाउंडेशन की तरफ से विजेता बच्चे के देश में निवेश की जाती है।
शगुन की मां नीलम और पिता कौशल किशोर त्रिपाठी ने सीएमएस अलीगंज की प्रिंसिपल शिवानी के साथ यूपी प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी। शिवानी सिंह ने बताया कि पूरे विश्व से इस पुरस्कार के लिए बच्चों की ओर से आवेदन किए गए थे। हमने भी शगुन का नाम भेजा था। समिति ने शगुन को शॉर्टलिस्ट कर लिया है। अगर शगुन का चयन होता है तो फिर यह लखनऊ के साथ ही पूरे भारत के लिए गर्व का विषय होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस पीस प्राइज हर साल बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले किड्स राइट फाउंडेशन की ओर से दिया जाता है। इसकी पुरस्कार राशि एक लाख पाउंड है। यह राशि फाउंडेशन की तरफ से विजेता बच्चे के देश में निवेश की जाती है।
विज्ञापन
शगुन की मां नीलम और पिता कौशल किशोर त्रिपाठी ने सीएमएस अलीगंज की प्रिंसिपल शिवानी के साथ यूपी प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी। शिवानी सिंह ने बताया कि पूरे विश्व से इस पुरस्कार के लिए बच्चों की ओर से आवेदन किए गए थे। हमने भी शगुन का नाम भेजा था। समिति ने शगुन को शॉर्टलिस्ट कर लिया है। अगर शगुन का चयन होता है तो फिर यह लखनऊ के साथ ही पूरे भारत के लिए गर्व का विषय होगा।
विज्ञापन
सीतापुर और लखनऊ के डीएम ने किया था सम्मानित
शगुन दो साल पहले उस समय चर्चा में आई थीं, जब वह एक किशोरी को बचाने के लिए बदमाशों से भिड़ गई थी। यह घटना आठ अगस्त 2016 की है। शगुन अपने मम्मी-पापा के साथ सीतापुर स्थित अपने गांव से आ रही थी। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक किशोरी को चार लोग जबर्दस्ती कार में बैठाने की कोशिश कर रहे थे।
यह देखकर उसके पिता वापस लौटकर आए। बदमाशों ने उनके पिता पर हमला कर दिया। इसको देखकर शगुन ने कार में रखा हथौड़ा निकालकर एक बदमाश के सिर पर मार दिया। एक बदमाश घायल हुआ तो आसपास के लोग भी जुट गए। यह देख वे भाग निकले। इसके बाद 100 नंबर पर फोन करके पुलिस को बुलाया गया। इस घटना के बाद शगुन को सीतापुर और लखनऊ के जिलाधिकारी ने सम्मानित किया।
आईएएस बनना चाहती हैं शगुन
शगुन ने बताया कि उसका सपना आईएएस बनना है। इस पुरस्कार के लिए उसका चयन हो या फिर नहीं, इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अगर इस घटना से सीख लेकर कुछ लोग भी मदद करने के लिए आगे आएंगे तो समाज और बेहतर होगा।
यह देखकर उसके पिता वापस लौटकर आए। बदमाशों ने उनके पिता पर हमला कर दिया। इसको देखकर शगुन ने कार में रखा हथौड़ा निकालकर एक बदमाश के सिर पर मार दिया। एक बदमाश घायल हुआ तो आसपास के लोग भी जुट गए। यह देख वे भाग निकले। इसके बाद 100 नंबर पर फोन करके पुलिस को बुलाया गया। इस घटना के बाद शगुन को सीतापुर और लखनऊ के जिलाधिकारी ने सम्मानित किया।
आईएएस बनना चाहती हैं शगुन
शगुन ने बताया कि उसका सपना आईएएस बनना है। इस पुरस्कार के लिए उसका चयन हो या फिर नहीं, इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अगर इस घटना से सीख लेकर कुछ लोग भी मदद करने के लिए आगे आएंगे तो समाज और बेहतर होगा।