{"_id":"5f2396e88ebc3e63b66d5c3e","slug":"sero-survey-from-next-month-also-in-up-antibodies-will-be-seen-in-people-blood","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी में भी अगले महीने से सीरो सर्वे, लोगों के खून में देखेंगे एंटीबाडी, एक लाख किट खरीद रहा विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी में भी अगले महीने से सीरो सर्वे, लोगों के खून में देखेंगे एंटीबाडी, एक लाख किट खरीद रहा विभाग
Fri, 31 Jul 2020 09:28 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 31 Jul 2020 09:28 AM IST
विज्ञापन
कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में कोरोना संक्रमण का सामुदाय में वायरस की प्रकृति व स्तर का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग सीरोलॉजिकल सर्वे कराएगा। 5 अगस्त से इसकी शुरुआत की संभावना है। इसमें लोगों के रैंडम खून के नमूने लेकर एंटीबॉडी की जांच होगी।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग एक लाख किट खरीद रहा है। सर्वे में आगरा, मेरठ सहित ऐसे जिलों का शामिल किया जा रहा है जहां संक्रमण पीक पर जाने के बाद अब कम हो रहा है या हो गया है। ऐसे भी जिले लिए जाएंगे, जहां तेजी से संक्रमण बढ़ा है।
विभाग का मानना है कि संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकने या जोखिम के स्तर के बारे में वास्तविक डाटा का पता लगाने का एकमात्र तरीका लोगों में एंटीबॉडी की उपस्थिति का परीक्षण है। सीरो सर्वे एक विश्व स्तर पर इस्तेमाल किया जाने वाला विश्वसनीय मानक है। जो एक निश्चित संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी के लेवल को मापता है।
विज्ञापन
इस तकनीक का उपयोग इसलिए भी किया जाता है कि बड़े पैमाने पर टीकाकरण की जांच की जा सके और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता का स्तर देखा जा सके। देश में दिल्ली, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में सीरो सर्वे पहले से हो रहे हैं।
विज्ञापन
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग एक लाख किट खरीद रहा है। सर्वे में आगरा, मेरठ सहित ऐसे जिलों का शामिल किया जा रहा है जहां संक्रमण पीक पर जाने के बाद अब कम हो रहा है या हो गया है। ऐसे भी जिले लिए जाएंगे, जहां तेजी से संक्रमण बढ़ा है।
विज्ञापन
विभाग का मानना है कि संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकने या जोखिम के स्तर के बारे में वास्तविक डाटा का पता लगाने का एकमात्र तरीका लोगों में एंटीबॉडी की उपस्थिति का परीक्षण है। सीरो सर्वे एक विश्व स्तर पर इस्तेमाल किया जाने वाला विश्वसनीय मानक है। जो एक निश्चित संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी के लेवल को मापता है।
विज्ञापन
इस तकनीक का उपयोग इसलिए भी किया जाता है कि बड़े पैमाने पर टीकाकरण की जांच की जा सके और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता का स्तर देखा जा सके। देश में दिल्ली, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में सीरो सर्वे पहले से हो रहे हैं।
व्यक्ति के खून में देखेंगे एंटीबाडी
संजय गांधी पीजीआई के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के पूर्व हेड प्रो.टीएन ढोल बताते हैं कि सीरो सर्वे में व्यक्ति का खून लेकर उसे कोविड-19 के एंटीजन से रिएक्शन कराते हैं। इससे उसमें एंटीबॉडी का पता चलता है। यह सर्वे बताएगा कि उतर प्रदेश में कितने प्रतिशत लोग संक्रमित हैं।
लेकिन इस सर्वे का एक पहलू यह भी है कि जो लोग बिना लक्षणों वाले एसिम्प्टोमैटिक हैं उनमें एंटीबॉडी नहीं बनती है। साथ ही कुछ ऐसे लोग भी होत हैं जो साइलेंट कैरियर होते हैं। वायरस उनमें आता है और वह दूसरों को संक्रमित कर देत हैं लेकिन उन्हें कुछ नहीं होता। इसलिए सीरो सर्वे के रिजल्ट बहुत भरोसेमंद नहीं हैं।
प्रो.टीएन ढोल के अनुसार यदि लोगों में टी सेल इम्युनिटी विकसित होगी तभी वह संक्रमण से पूरी तरह बचेंगे। आईजीजी गलाइको प्रोटीन चाहे व्यक्ति के अंदर हो या न हो। आईजीजी गलाइको प्रोटीन का ही खून में सीरो सर्वे से पता चलता है।
लेकिन इस सर्वे का एक पहलू यह भी है कि जो लोग बिना लक्षणों वाले एसिम्प्टोमैटिक हैं उनमें एंटीबॉडी नहीं बनती है। साथ ही कुछ ऐसे लोग भी होत हैं जो साइलेंट कैरियर होते हैं। वायरस उनमें आता है और वह दूसरों को संक्रमित कर देत हैं लेकिन उन्हें कुछ नहीं होता। इसलिए सीरो सर्वे के रिजल्ट बहुत भरोसेमंद नहीं हैं।
प्रो.टीएन ढोल के अनुसार यदि लोगों में टी सेल इम्युनिटी विकसित होगी तभी वह संक्रमण से पूरी तरह बचेंगे। आईजीजी गलाइको प्रोटीन चाहे व्यक्ति के अंदर हो या न हो। आईजीजी गलाइको प्रोटीन का ही खून में सीरो सर्वे से पता चलता है।