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राजधानी में डिप्रेशन बुजुर्गों की जिंदगी के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। हाल की घटनाओं के बीच केजीएमयू की एक रिपोर्ट में डॉक्टरों ने माना है कि बुजुर्ग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं।
वहीं हाइपरटेंशन सबसे ज्यादा मुसीबत बन रहा है। डिप्रेशन की समस्या ओल्ड एज होम में रहने वाले बुजुर्गों में ज्यादा है। हालांकि, घरों में रहने वाले बुजुर्ग भी इससे बच नहीं पा रहे हैं।
अकेले रहने वाले बुजुर्गों में से 30 प्रतिशत डिप्रेशन के शिकार हैं। केजीएमयू के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग, जेरियाट्रिक मेंटल विभाग और हिन्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बाराबंकी की इस स्टडी में ओल्ड एज होम और घरों में रहने वाले बुजुर्गों पर अलग-अलग स्टडी की गई।
इसकी रिपोर्ट में 27.7 प्रतिशत बुजुर्ग जोकि ओल्ड एज होम में रह रहे थे डिप्रेशन के शिकार पाए गए। सोसाइटी के लोगों के बीच अपने घरों में रहने वाले बुजुर्गों की स्थिति कुछ बेहतर थी।
हाइपरटेंशन है सबसे बड़ा कारण
इनमें से भी 15.6 प्रतिशत बुजुर्ग डिप्रेशन की बीमारी के शिकार थे। डिप्रेशन की बड़ी वजह बीमारी ही थी जिसमें हाइपरटेंशन, शारीरिक अक्षमता और आंखों का कमजोर जैसे कारण प्रमुख थे।
स्टडी करने वाली टीम में शामिल डॉ. अभिषेक गुप्ता ने बताया कि हाइपरटेंशन सबसे बड़ा कारण है जिसके चलते डिप्रेशन हो रहा है। 17.7 बुजुर्गों की जांच में हाइपरटेंशन की पुष्टि हुई।
इस स्टडी में केवल 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों को लिया गया। इन्हें भी हमने 10-10 साल की उम्र के अंतर के तीन ग्रुप में बांटा। स्टडी में पांच ओल्ड एज होम में रहने वाले 101 बुजुर्ग और घरों में रहने वाले 141 बुजुर्गों सहित 242 लोगों को शामिल किया गया।
एक सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि ओल्ड एज होम में रहने वाले 81.3 प्रतिशत बुजुर्ग 70 साल से ऊपर के थे जोकि हाइपरटेंशन के अलावा पेट की बीमारी, शारीरिक समस्या से बुरी तरह से ग्रसित थे।