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किसानों से भद्दा मजाक, अब दोबारा सर्वे करेगी सरकार!

Fri, 10 Apr 2015 08:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 10 Apr 2015 08:54 AM IST
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Second survey to be conducted for loss of farmers.

केंद्र सरकार के सर्वे के मानकों में तब्दीली कर देने से अब पूरे प्रदेश में फसलों को हुए नुकसान का दुबारा से सर्वे करना होगा। इस बाबत राहत आयुक्त लीना जौहरी ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर नए मानकों के अनुसार जल्द सर्वे करके रिपोर्ट भेजने को कहा है।

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केंद्र सरकार के संशोधित मानकों के अनुसार अब 33 फीसदी या उससे ज्यादा नुकसान होने पर मुआवजा दिया जाएगा। पहले यह सीमा 50 फीसदी या उससे ज्यादा थी।

इसी के साथ सिंचित जमीन के लिए मुआवजे की दर भी 9000 रुपये से बढ़ाकर 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।

वर्षा आधारित जमीन पर 4500 रुपये के बजाय 6750 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा मिलेगा। इससे किसानों को ज्यादा राशि तो मिलेगी, मगर नए सिरे से सर्वे होने से राहत राशि मिलने में देर भी लगेगी।
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राहत आयुक्त जौहरी ने बताया कि यूपी में 25-50 फीसदी और 50-100 फीसदी तक नुकसान का सर्वे पहले ही कराया जा चुका है। इसलिए 33-100 फीसदी का सर्वे करने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।

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...सीधे खाते में रकम भेजी तो होगी और भी देर

Second survey to be conducted for loss of farmers.

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के नए मानकों के आधार पर मुआवजा संबंधी शासनादेश जारी करने के लिए मुख्यमंत्री के सामने भी जल्द ही पत्रावली रखी जाएगी।

अगर केंद्र सरकार ने मुआवजा राशि सीधे किसानों के खातों में भेजने का फैसला ले लिया तो उससे मुआवजा बांटने में और भी देर होगी। शासन के एक अफसर ने बताया कि बड़ी तादाद में प्रभावित किसान ऐसे हैं, जिनका किसी बैंक में खाता नहीं है।

खातों में राशि भेजने का नियम बनाए जाने पर पहले हर किसान का बैंक में खाता खुलवाना होगा। इसमें अच्छा-खासा समय लग जाएगा।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुआवजा राशि सीधे खातों में भेजने की बात कही थी। हालांकि राज्य सरकार को अभी तक इस बाबत केंद्र से कोई लिखित निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।

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