इस तरह से आपका दिमाग रहेगा हमेशा जवान
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जरा कल्पना कीजिए उस दिन की जब आपका दिमाग कभी बूढ़ा न हो। ऐसा हो जाए तो संभव है अल्जाइमर जैसी वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों से निजात मिलना। वह दिन दूर नहीं जब ऐसा हकीकत में संभव होगा।
यदि सबकुछ ठीक रहा और नई दवा पर भारत में चल रहा ट्रायल सफल रहा तो जल्द ही ऐसी दवा उपलब्ध होगी जिसके इस्तेमाल से इंसानी दिमाग कभी बूढ़ा नहीं होगा। यह सब संभव होगा लखनऊ मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक प्रो. अनिल गुलाटी की खोज से।
वैज्ञानिक का दावा है कि दिमाग में मौजूद एक पेप्टाइड ही इसे बूढ़ा नहीं होने देगा। बुधवार को अमेरिका की मिडवेस्टर्न यूनीवर्सिटी शिकागो में डीन प्रो. गुलाटी राजधानी में थे।
सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में उन्होंने इंडियन फार्माकोलॉजिकल सोसाइटी के एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी। उनका कहना था कि इंडोथेलिन नामक पेप्टाइड ब्रेन में मौजूद होता है। यह पेप्टाइड ब्लड प्रेशर और रक्त नलिकाओं के मैकेनिज्म को नियंत्रित करता है।
इस तरह से कभी बूढ़ा नहीं होगा आपका दिमाग
इसकी नियंत्रित मौजूदगी दिमाग के न्यूरोन्स का संतुलन बनाए रखती है। शुरुआती शोध से यह जानकारी हमारी टीम को मिली। इस शोध पर गहन रिसर्च के बाद एक कंपाउंड आईआरएल-1620 लैब में तैयार किया।
यह कंपाउंड इंडोथेलिन को नियंत्रित करता है। इस कंपाउंड की दो चरण की ट्रायल हो चुकी है। तीसरे चरण में अब भारत को भी इसमें शामिल किया गया है। अगर सबकुछ सही गया तो फिर दिमाग की अल्जाइमर जैसी बीमारियां इससे दूर हो जाएंगीं। प्रो. गुलाटी ने बताया कि नई दवा को पूरी दुनिया में एक बड़ी संभावना के रूप में देखा जा रहा है। अभी तक अल्जाइमर और दिमाग में न्यूरोन्स के री-जनरेशन को लेकर कोई प्रभावी कंपाउंड को खोजा नहीं जा सका है।
कार्यक्रम में सोसायटी केआजीवन सदस्य डॉ. आलोक धवन को सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) का निदेशक बनने पर सम्मानित किया। इस दौरान केजीएमयू वीसी प्रो. रविकांत, सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. राकेश शुक्ला और सचिव डॉ. अनिल गायकवाड़ मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सीडीआरआई वैज्ञानिक डॉ. आमिर नाजिर ने किया।