सीतापुर सदर: वोटों का बिखराव हुआ तो भाजपा को होगा फायदा, कांग्रेस का दांव दे सकता है संजीवनी
सीतापुर सदर सीट पर वोटों के बिखराव से भाजपा को फायदा हो सकता है। कांग्रेस ने यहां पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है। ऐसे में सपा का खेल बिगड़ सकता है।
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विधानसभा चुनाव 2017 में सीतापुर सदर विधानसभा सीट से मोदी लहर में जीते नगर विधायक राकेश राठौर के बागी होने के बाद भाजपा के लिए इस बार पर इस सीट पर फिर से कमल खिलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। पार्टी भी इस बात को बखूबी समझ रही है। चुनाव में भाजपा और सपा के बीच सीधी टक्कर के आसार हैं। सपा का प्रत्याशी मुकाबले में कमतर नहीं होगा, ऐसे में कांग्रेस के दांव से भाजपा को चुनाव में संजीवनी मिल सकती है। मुस्लिम वोटों में बिखराव से भाजपा को इसका फायदा मिलेगा। पार्टी यही अनुमान लगा रही है।
2017 के विधानसभा चुनाव में राकेश राठौर सपा के चार बार के विधायक रहे राधेश्याम जायसवाल को हराकर विधायक बने थे, लेकिन बाद में बगावत का रास्ता अख्तियार कर लिया था। पिछले महीनों में वह भाजपा छोड़कर सपा का दामन थाम चुके हैं। विधायक के बागी होने के बाद भाजपा के लिए सीतापुर विधानसभा सीट काफी महत्वपूर्ण हो चुकी है। पार्टी के लोग भी इस बात को बखूबी मान रहे हैं। इसलिए इस सीट को लेकर पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रखेगी। कोशिश यही है कि दोबारा से इस सीट पर कमल खिलाया जाए, लेकिन 2017 की तरह इस बार राह आसान नहीं है।
वजह, इस बार प्रदेश हो या सीतापुर। सियासत की धुरी दो पार्टियों के बीच ही घूम रही है। भाजपा और सपा का ही मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। ऐसे में नगर विधानसभा सीट पर सपा से जो भी प्रत्याशी होगा, उससे भाजपा प्रत्याशी की लड़ाई कांटे की रहने वाली है, लेकिन पिछले दिनों कांग्रेस ने नगर विधानसभा सीट से मुस्लिम महिला को प्रत्याशी के रूप में उतारने से कहीं न कहीं भाजपा को इसका फायदा होता दिख रहा है। भाजपा में फायदे को लेकर गुणा-गणित लग रहे हैं। पार्टी से जुड़े लोग मान रहे हैं कि कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशी से भाजपा की चुनावी डगर आसान हो सकती है।
समझिए, चुनावी गणित
कांग्रेस की प्रत्याशी मुस्लिम चेहरा हैं। चुनावी माहौल को भांपकर वह पिछले कई महीनों से सक्रिय भूमिका में हैं। अपने पक्ष में माहौल भी बना रही हैं। उधर, सपा से पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल और विधायक राकेश राठौर भी अपनी दावेदारी कर रहे हैं। पार्टी किसी एक पर दांव लगाएगी। सपा का जो भी प्रत्याशी होगा, उसे पार्टी का कैडर वोट तो मिलेगा, साथ ही प्रत्याशी का खुद का भी वोट बैंक होगा। कुल मिलाकर भाजपा और सपा ही कड़ा मुकाबला होगा। सियासी पंडितों की माने तो इस कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी सपा के मुस्लिम वोटों में सेंध जरूर लगाएंगी। ऐसे में अगर मुस्लिम वोटों का बिखराव होता है तो फायदा भाजपा को होने की पूरी संभावना है।
सपा का हो सकता नुकसान
कांग्रेस प्रत्याशी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाकर जहां एक ओर भाजपा को फायदा पहुंचा सकती हैं, वहीं भाजपा के कड़े मुकाबले में होने वाली सपा का नुकसान भी कर सकती हैं। मुस्लिम वोट बंटने से नुकसान सपा का ही होता नजर आ रहा है।
अब बसपा के प्रत्याशी पर टिकी निगाहें
भाजपा की निगाहें अब बसपा के प्रत्याशी पर टिकी हैं। सियासी रणनीतिकारों की माने तो अगर बसपा भी मुस्लिम चेहरे पर सदर विधानसभा सीट से दांव लगाती है तो इसका फायदा भाजपा को ही होगा। मुस्लिम वोट और बटेंगे। आप ने रविवार को सदर विधानसभा सीट पर आनंद जायसवाल को अपना प्रत्याशी उतार दिया है। ऐसे में आप प्रत्याशी भी बैक वर्ड वोटों को काटने का काम करेंगे।