सरकार के दो मंत्रियों ने यूपी में कारोबारियों व उद्योगों की दिक्कतों पर की बात, बताया- कैसे करेंगे मदद
- सरकार हर स्तर पर उद्योगों, श्रमिकों व शिल्पकारों के प्रति सजग।
- उद्योगों और कारोबारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर ‘अमर उजाला’ ने की सरकार के दो मंत्रियों से बात।
- औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना और एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने दिए उम्मीद भरे जवाब, साझा किए प्रयास।
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कोविड-19 महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन में अर्थव्यवस्था पर तगड़ा असर पड़ा है। उद्योग व निर्यातक कई तरह की कारोबारी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तो छोटी-छोटी पूंजी में बड़ा-बड़ा काम करने वाले लाखों शिल्पकारों, कारीगरों व कामगारों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। ‘अमर उजाला’ ने लगभग एक पखवारे तक उद्योग व कारोबार से जुड़े सभी प्रमुख सेक्टर व उनसे जुड़े लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से लगातार प्रकाशित किया। लाखों लोगों के रोजगार से जुड़ी समस्याओं के समाधान को ले सरकार आगे क्या करने वाली है, इसे जानने के लिए अमर उजाला ने औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना तथा एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह से अलग-अलग बात की। प्रस्तुत हैं दोनों मंत्रियों से महेंद्र तिवारी की बातचीत के प्रमुख अंश...
केंद्र के पैकेज के बाद जरूरत हुई तो पूरक पैकेज पर विचार करेगी प्रदेश सरकार : सिद्धार्थनाथ
सवाल: छोटे से लेकर बड़े निवेशक लॉकडाउन की अवधि में बिजली के फिक्स व अन्य तरह का चार्ज समाप्त कर वास्तविक खर्च के आधार पर बिजली बिल के भुगतान की सहूलियत मांग कर रहे हैं? सरकार का क्या फैसला है?
सिद्धार्थनाथ: लॉकडाउन अवधि का बिजली बिल खपत के आधार पर ही चार्ज लिया जाएगा। बिजली विभाग मान गया है।
सवाल: सरकार ने उद्योगों को शुरू करने के लिए अनुमति दे दी, लेकिन उद्यमियों, हस्तशिल्पियों की शिकायत है कि स्थानीय प्रशासन कारीगरों व श्रमिकों को काम पर आने की इजाजत नहीं दे रहा है। ऐसे में उद्योग कैसे चलेंगे?
सिद्धार्थनाथ : ऐसा नहीं है। सोमवार को ही करीब 900 यूनिट का संचालन शुरू हुआ है। इनमें 85 हजार कामगार काम करते हैं। इन्हें 33 प्रतिशत क्षमता पर काम की अनुमति दी गई है। उद्योग विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी उद्योगों की मदद कर रहे हैं। एमएसएमई विभाग का काल सेंटर काम कर रहा है। जितनी भी शिकायतें आ रही हैं, मदद की जा रही है। यदि किसी को स्थानीय स्तर पर कोई समस्या है, उन्हें बता सकता है। समाधान कराया जाएगा।
सवाल: सभी तरह के उद्योग व निर्यातक निवेश की गई पूंजी फंसने, किसी ओर से कोई आय न होने की वजह से कारोबारी सरकार से मदद की आस लगाए बैठे हैं। क्या सरकार किसी तरह की पैकेज का एलान करेगी?
सिद्धार्थनाथ : निर्यात केंद्र सरकार का विषय है। प्रदेश सरकार ने सभी तरह के उद्योगों की वित्तीय व अन्य समस्याओं का संज्ञान लिया है और केंद्र को विस्तृत सुझाव भेजा है। केंद्र जल्द ही पैकेज का एलान कर सकता है। इससे उद्योगों की सभी तरह की समस्याओं का समाधान हो जाने की उम्मीद है। यदि जरूरत होगी तो राज्य की ओर से सपोर्ट पैकेज पर विचार किया जाएगा।
छोटे उद्योगों, उनसे जुड़े कामगारों व शिल्पियों की सरकार किस तरह मदद करेगी
सवाल: तमाम जगह छोटे उद्योगों, उनसे जुड़े कामगारों व शिल्पियों को रोटी के लाले पड़ गए हैं। सरकार उनकी किस तरह मदद करेगी?
सिद्धार्थनाथ : दिक्कत ये है कि बड़ी संख्या में उद्योग एमएसएमई विभाग से रजिस्टर्ड नहीं हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा है। इससे मदद में मुश्किल आ रही है। जो रजिस्टर्ड हैं उन्हें सिडबी से रेटिंग के आधार पर कैपिटल फाइनेंस की मदद कराई जा सकती है। व्यवस्थित ढांचे में आएं तो मदद में आसानी हो। इसके बावजूद कठिनाई के दौर में हर व्यक्ति की मदद की जा रही है। शिल्पियों व उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए डिजाइन, पैकेजिंग, मार्केटिंग, मेला व प्रदर्शनी आदि की कार्ययोजना तैयार की गई है। 14 से 20 मई तक ऋण मेला लगाने जा रहे हैं। हस्तशिल्पी से लेकर मशीन व फैक्ट्री वाले इसमें ऋण ले सकेंगे।
सवाल: निवेश प्रोत्साहन के लिए क्या नए कदम उठाए जा रहे हैं?
सिद्धार्थनाथ : अधिकतम निवेश मुख्यमंत्री की प्राथमिकता है। इसीलिए उन्होंने निवेश का अलग मंत्रालय और उन्हें इस विभाग का भी मंत्री बनाया। मुख्यमंत्री के निर्देशन में अधिकतम निवेश लाने का रोडमैप तैयार हुआ है। मुख्यमंत्री इस लॉकडाउन के बीच में स्वयं चार बार इस संबंध में बैठकें कर चुके हैं। प्रदेश श्रम कानूनों के सुधार में नंबर एक पर है।
नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई देशों से संवाद किया गया है। इसके बाद सुझावों पर अमल करते हुए जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया व यूरोपीय यूनियन के लिए हेल्पडेस्क बनाया गया है। चीन से जो निवेशक हट रहे हैं, उन्हें किस तरह प्रदेश में लाया जाए, इस पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश की प्रत्येक एमएसएमई यूनिट कम से कम एक नया रोजगार जोड़े, यह प्रयास चल रहा है ताकि अधिकतम लोगों को रोजगार के अवसर मिल सके।
सरकार सभी के हितों के प्रति सजग, जल्द शुरू होगा बदलाव : महाना
सवाल: प्रदेश के उद्योगपति बगैर काम कर्मियों को पूरा वेतन और ऋण पर ब्याज अदायगी की समस्या उठा रहे हैं। सरकार किस तरह इनकी मदद करेगी?
महाना : उद्योगों के बैंक इंट्रेस्ट, ईएमआई, कैपिटल पूंजी से जुड़ी सभी समस्याएं संज्ञान में हैं। इनके समाधान के लिए केंद्र सरकार को संस्तुतियां भेजी गई हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जल्दी ही एक कांप्रिहेंसिव पैकेज की घोषणा का संकेत भी दिया है। उसका इंतजार करना चाहिए।
सवाल: उद्यमी कह रहे हैं सरकार ने ठोस पैकेज नहीं दिया तो कई उद्योग बंद हो जाएंगे और तमाम लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इससे कैसे निपटने की तैयारी है?
महाना : उद्योगों का संचालन सुचारु रूप से हो, सरकार इसके लिए पूरी तरह से संवेदनशील है। लेकिन, एक बात ध्यान में रखना चाहिए। यह वैश्विक संकट है। सभी मिलकर अपने-अपने हिस्से का योगदान करेंगे तो यह दौर जल्द बीत जाएगा। जहां तक इंडस्ट्री और श्रमिक की बात है, दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। सरकार श्रमिक व इंडस्ट्री दोनों के हितों को लेकर सजग है। लेकिन, संसाधन भी सीमित हो गए हैं। इसके बावजूद जहां फैक्ट्री को हर संभव सपोर्ट का प्रयास है, वहीं प्रत्येक श्रमिक का हित सुरक्षित रहे, सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है।
सवाल: बाहर से आए श्रमिकों को किस तरह रोजगार देंगे?
महाना : सरकार हर प्रवासी श्रमिक के कौशल का लेखाजोखा तैयार कर रही है। इसका ऑनलाइन ब्योरा रखा जाएगा। जो स्थानीय स्तर पर काम कर सकते हैं, उनके लिए मनरेगा, ग्रामीण आजीविका मिशन सहित लघु व स्थानीय उद्योगों सहित तमाम सेक्टर में अवसर दिलाने का प्रयास है। जो श्रमिक किसी क्षेत्र विषय में दक्ष हैं, उन्हें कुशलता के आधार पर संबंधित उद्योगों से साझाकर अवसर दिलाने का प्रयास होगा।
सरकार क्या नीतिगत बदलाव करने जा रही है
सवाल: नए उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए सरकार क्या नीतिगत बदलाव करने जा रही है?
महाना : प्रदेश में औद्योगिक पार्क के लिए वर्तमान में पूर्वांचल में 100 एकड़ व मध्यांचल तथा दक्षिणांचल में 150 एकड़ भूमि की जरूरत है। सरकार छोटे पार्कों के प्रोत्साहन देने जा रही है। अब पूर्वांचल में 20 एकड़ व मध्यांचल तथा दक्षिणांचल में 30 एकड़ में ही औद्योगिक पार्क स्थापित किए जा सकेंगे। मेगा इंडस्ट्री के लिए वर्तमान में इंटरेस्ट सब्सिडी 5 फीसदी व अधिकतम 50 लाख रुपये है। अब इसे बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करने जा रहे हैं। लॉजिस्टिक पार्क के लिए इंडस्ट्री का डेढ़ गुना रेट चार्ज होगा। पहले ये चार्ज कॉमर्शियल था। यूपीसीडा के प्लॉट पर मार्च से जून तक जो ब्याज व दंड बन रहा था, उसे माफ कर दिया गया है।
सवाल: नए निवेशकों को यूपी में लाने के लिए क्या नए प्रयास होंगे।
महाना : प्रदेश सरकार विदेशों में देश के राजदूतों व निवेशकों को पत्र लिखने जा रही है। इसमें राजदूतों को जरूरी जानकारी दी जाएगी ताकि वे अपने स्तर से भी निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए प्रेरित करें। यह संभावना भी तलाशी जा रही है कि चीन से आयात होने वाले कौन-कौन से सामान का निर्माण कर सकते हैं। तमाम विदेशी निवेशक चीन से अपना निवेश कम कर रहे हैं। प्रयास है कि उनमें से ज्यादा से ज्यादा निवेशक यूपी में निवेश के लिए आएं। सरकार उन निवेश प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए भी काम कर रही है, जो निवेश प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं।