सपा बदले चेहरे के साथ उतरेगी 2017 चुनाव में
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ऐसा लगता है कि सपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में बदले चेहरे के साथ उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार की ओर से हाल में लिए गए फैसलों पर नजर डालने से यही संकेत मिलते हैं। साथ ही यह भी ध्वनित होता है कि सपा अपनी छवि मुस्लिम हितैषी तो रखना चाहती है लेकिन हिंदुत्व विरोधी चेहरे के साथ नहीं।
गोवध पर बने कानूनों को कड़ा करने से लेकर अवध व बृज सर्किट बनाने और वरिष्ठ नागरिकों को श्रवण यात्रा के फैसले तक सपा सरकार की इसी कोशिश का हिस्सा नजर आते हैं। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सूबे में बदले राजनीतिक परिदृश्य ने सपा को चेहरे बदलने की चिंता करने के लिए विवश किया है।
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद समाजवादी खेमे के रणनीतिकारों की समझ में यह बात आ चुकी है कि उसे मुस्लिमों की चिंता करने वाले राजनीतिक दल की पहचान बनाए रखने के साथ इसका भी ध्यान रखना होगा कि उसके किसी फैसले से सपा पर हिंदुत्व विरोधी पार्टी का आरोप चस्पा न होने पाए।
गोवध विरोधी कानून को बनाया सख्त
इसीलिए सपा सरकार की कलम से एक के बाद एक इस तरह के फैसले निकल रहे हैं जो हिंदुओं के दिल व दिमाग में यह बात ठीक तरह से बैठा सकें कि उस पर सिर्फ मुसलमानों की चिंता करने का आरोप लगाना ठीक नहीं।
खासतौर से सपा सरकार द्वारा गोवध विरोधी कानून सख्त बनाना। इसको तोड़ने वालों पर गुंडा एक्ट व गैंगस्टर में कार्रवाई का प्रावधान बनाना और अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का गोदूध पर बोनस देने और गाय के दूध से बने उत्पादों की सरकार द्वारा बिक्री की व्यवस्था कराने का ताजा ऐलान इसी कोशिश का हिस्सा नजर आते हैं।
इसे सपा सरकार की चेहरा बदलने की कोशिश का हिस्सा ही कहा जाएगा कि समाजवादी सरकार द्वारा शुरू किसी योजना के शुरुआती समारोह में कभी भगवा टोली की पहचान बना ‘जय श्रीराम’ जैसा नारा गूंजे। तीर्थयात्रियों ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए तो सरकार की तरफ से भी उन्हें ‘श्रीराम नाम मालाएं’ बांटी गईं और यात्रा के दौरान भक्तिमय वातावरण बनाने के उद्देश्य से भजन सुनाने की व्यवस्था थी।
हिंदू भक्तों के लिए दी बहुत सी सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर के ऑनलाइन दर्शन कराने वाली वेबसाइट ‘आई भक्ति यात्रा’ का उद्घाटन भी किया। यह भी कहा कि सरकार कोशिश करेगी कि वेबसाइट के जरिये लोगों को न सिर्फ काशी-विश्वनाथ के दर्शन हों बल्कि प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिरों के दर्शन की सुविधा भी मिले।
किसी व्यक्ति के चाहने पर उसके नाम से मंदिर में पूजा, आरती व अनुष्ठान की सुविधा भी वेबसाइट पर मिलेगी। साथ ही प्रसाद घरों पर पहुंचाने की व्यवस्था होगी।
इससे पहले कैलास मानसरोवर यात्रियों को 50-50 हजार रुपये का यात्रा अनुदान, बृज, अवध व बुंदेलखंड पर्यटन सर्किट बनाने का फैसला, अयोध्या, मथुरा व काशी के विकास के लिए योजनाओं की घोषणा तथा आगरा व वाराणसी को जोड़ते हुए हेरिटेज आर्क बनाने का ऐलान भी भविष्य में भाजपा को उन्हीं के मद्दों पर मात देने की सपा की तैयारी का हिस्सा होने का संकेत देते हैं।