फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   samajwadi party plans to get 60 percent votes in Uttar Pradesh election.

सपा के एजेंडे के केंद्र में नौजवान और किसान: 60 फीसदी वोट पाने के लिए बनाई रणनीति, मध्य वर्ग पर किया विशेष फोकस

Mon, 17 Jan 2022 12:19 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 17 Jan 2022 12:19 PM IST
सार

सपा में यूपी चुनाव जीतने के लिए वोट प्रतिशत अधिकतम ले जाने की रणनीति बनाई है। पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक वोट का हिसाब रख रही है। जिताऊ उम्मीदवार को देख पुराने नेताओं को धैर्य रखने की नसीहत दी जा रही है।

विज्ञापन
samajwadi party plans to get 60 percent votes in Uttar Pradesh election.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सपा इस बार के चुनाव में अपने वोट प्रतिशत को अधिकतम तक ले जाने के रणनीति के साथ काम कर रही है। इसी के तहत पार्टी के घोषणा पत्र में नौजवानों व किसानों से जुड़े मुद्दों की खास झलक दिखेगी। पार्टी की रणनीति है कि रोजगार व संसाधन विकास के जरिए युवाओं को जोड़ा जाए। पार्टी ने खुले तौर पर सामाजिक न्याय की बात शुरू कर दी है। पार्टी के रणनीतिकार हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक वोट पर निगाह गड़ाए हुए हैं।

विज्ञापन


अक्तूबर 1992 में बनी समाजवादी पार्टी तीन बार सत्ता में रह चुकी है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव इस चुनाव में ‘वन मैन शो’ की भूमिका में हैं। ऐसे में वोट प्रतिशत को लेकर वह लंबी लकीर खींचना चाहते हैं। यही वजह है कि अब तक के चुनावों में अधिकतम 30 फीसदी का आंकड़ा न छू सकी पार्टी के रणनीतिकार 60 फीसदी वोट हासिल हासिल करने के लिए हर हथकंडे अपना रहे हैं। पुराने बसपाइयों व भाजपा विधायकों के सपा में आने से पार्टी काफी उत्साहित है। वहीं, पार्टी के रणनीतिकार वोटबैंक का ग्राफ बढ़ाने के लिए लगातार प्रयोग कर रहे हैं।
विज्ञापन


उम्मीदवार चयन में भी दूसरी पार्टियों के उम्मीदवारों को ध्यान में रखा जा रहा है। यही वजह है कि अभी तक पहले व दूसरे चरण के कुछ उम्मीदवारों की ही घोषणा की गई है। इसी तरह अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए बूथ प्रबंधन पर विशेष जोर है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बूथों की स्क्रूटनी की गई है। हर 15 दिन पर बूथ कमेटी के अलग-अलग सदस्यों से फीडबैक लेकर आगे की रणनीति से वाकिफ कराया जा रहा है। जिताऊ उम्मीदवार को देख अपने पुराने नेताओं को धैर्य रखने की नसीहत दी जा रही है। चुनाव लड़ने के आतुर नेताओं को बूथवार टॉरगेट देकर भविष्य में इनाम देने का आश्वासन दिया जा रहा है।

इन मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है

सपा प्रवक्ता व एमएलसी सुनील सिंह यादव साजन कहते हैं कि पार्टी मध्य वर्ग को विशेष तौर पर लक्ष्य बनाए हुए है। इस वर्ग के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने, उनकी पढ़ाई का प्रबंधन करने, किसानों की खेती की लागत कम करने आदि पर जोर दिया जा रहा है। घोषणा पत्र में इसकी झलक दिखेगी। उन्होंने दावा किया कि 80 फीसदी तक वोटबैंक हमारा हो सकता है। विभिन्न सर्वे में सपा का वोटबैंक लगातार बढ़ रहा है।

परंपरागत जनाधार को बचाए रखना चुनौती
लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री व सामाजिक चेतना फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र वर्मा कहते हैं कि सपा ने बसपा के जनाधार को खुद की तरफ खींचा है तो परंपरागत वोटबैंक को संजोया भी है। पार्टी की ओर से मध्य व निम्न वर्ग के लोग लगातार जुड़ते नजर आ रहे हैं। लोग सपा की ओर देख रहे हैं। फिर भी पार्टी को परंपरागत जनाधार को बचाए रखना होगा। छोटी सी चूक घातक हो सकती है।

सपा गठन के बाद किसको कितने फीसदी वोट

- 12वीं विधानसभा चुनाव (1993) में भाजपा को 33.30 फीसदी वोट मिले। सपा व बसपा गठबंधन में सपा को 17.94 फीसदी और बसपा को 11.12 फीसदी वोट मिले। कांग्रेस को 15.08 फीसदी और जनता दल को 12.33 फीसदी वोट मिले। सपा के मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। हालांकि गेस्ट हाउस कांड के बाद बसपा ने समर्थन वापस ले लिया और भाजपा के समर्थन में मायावती मुख्यमंत्री बनीं।

- 13वीं विधानसभा चुनाव (1996) में सपा को 21.80 फीसदी वोट मिले। भाजपा को 32.52 फीसदी, बसपा 19.64 फीसदी और कांग्रेस को 8.35 फीसदी वोट मिले। इस बार पहले कल्याण सिंह, फिर रामप्रकाश गुप्ता और इसके बाद राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री बने।

- 14वीं विधानसभा चुनाव (2002) में भाजपा को 20.08 फीसदी, बसपा 23.06 फीसदी और सपा को 25.37 फीसदी वोट मिले। तीन मई, 2002 को बसपा की मायावती मुख्यमंत्री बनीं। लेकिन 29 अगस्त, 2003 को जोड़-तोड़ कर सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सरकार बनाई।

- 15वीं विधानसभा चुनाव (2007) में बसपा को 30.43 फीसदी, सपा को 25.43 फीसदी और भाजपा को 16.97 फीसदी वोट मिले। 13 मई, 2007 को मायावती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

- 16वीं विधानसभा चुनाव (2012) में सपा को 29.13 फीसदी, भाजपा 15 फीसदी और बसपा 25.91 फीसदी और कांग्रेस को 11.65 फीसदी वोट मिले। सपा के अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने।

- 17वीं विधानसभा चुनाव (2017) में भाजपा को 39.67 फीसदी, सपा 21.82 फीसदी और बसपा 22.23 फीसदी व कांग्रेस को 6.25 फीसदी वोट मिले। भाजपा को योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed